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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- 305 जोड़ों का विवाह: महाशिवरात्रि पर बागेश्वर धाम में 305 निर्धन बेटियों का भव्य कन्यादान संपन्न हुआ।
- विदेशी राजदूतों की मौजूदगी: अर्जेंटीना और चिली समेत 9 देशों के राजदूत इस पावन समारोह के साक्षी बने।
- नेपाली जोड़े का संगम: भारत और नेपाल के रीति-रिवाजों से एक नेपाली जोड़े का विवाह भी हुआ।
- रामभद्राचार्य का आशीर्वाद: जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने धीरेंद्र शास्त्री को अगले साल शादी करने का आशीर्वाद दिया।
- भावुक विदाई समारोह: धीरेंद्र शास्त्री ने पिता की तरह बेटियों को उपहार देकर विदा किया और आशीर्वाद दिया।
NEWS IN DETAIL
Chhatarpur. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 305 निर्धन बेटियों का कन्यादान किया। इस आयोजन में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज भी शामिल हुए।
यह आयोजन कोई साधारण शादी नहीं बल्कि एक विशाल आध्यात्मिक उत्सव बन गया है। इस भव्य समारोह में देशभर के बड़े-बड़े संतों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। भक्तों की भारी भीड़ के बीच यहां चारों तरफ मंगल गीतों की गूंज रही। पंडित शास्त्री ने स्वयं आगे बढ़कर हर एक जोड़े को अपना आशीर्वाद दिया।
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विदेशी मेहमान और 9 देशों के राजदूत बने विवाह के साक्षी
इस बार का सामूहिक विवाह समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा। समारोह में केवल भारत के लोग ही नहीं बल्कि विदेशी मेहमान भी आए। अर्जेंटीना, चिली, पेरू और उरुग्वे जैसे 9 देशों के राजदूत यहां मौजूद रहे। इक्वाडोर, कोलंबिया, पनामा और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधि भी इस पावन कार्य में शामिल हुए।
विदेशी मेहमानों ने भारतीय सनातन संस्कृति और विवाह की परंपराओं को बड़े करीब से देखा। उन्होंने धाम की व्यवस्था और पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सेवा भाव की प्रशंसा की। यह नजारा देख ऐसा लग रहा था मानो पूरी दुनिया बागेश्वर धाम आ गई हो।
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले : अब धीरेंद्र शास्त्री के विवाह में आऊंगा
समारोह में तुलसी पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने विशेष शिरकत की। उन्होंने मंच से अपनी बात रखते हुए सभी 305 जोड़ों को सुखद जीवन दिया। जगद्गुरु ने मजाकिया लहजे में एक ऐसी बात कही जिसने सबका ध्यान खींच लिया।
उन्होंने कहा कि वह अगले साल पंडित धीरेंद्र शास्त्री के विवाह में आना चाहेंगे। यह सुनकर वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से पूरे पंडाल को गूंजा दिया। स्वामी जी ने बताया कि वह जल्द ही लंबी अवधि के लिए एकांतवास पर जाएंगे। उनके वचनों ने इस पूरे वैवाहिक कार्यक्रम में चार चांद लगाने का काम किया।
एक नेपाली जोड़ा भी बना हमसफर
इस सामूहिक विवाह की सबसे खास बात भारत और नेपाल का अटूट रिश्ता रही। समारोह में एक जोड़ा ऐसा था जो पड़ोसी देश नेपाल से विवाह करने आया था। यहां शादी की रस्में भारतीय और नेपाली दोनों ही रीति-रिवाजों से पूरी की गई। दोनों देशों के पंडितों ने मिलकर मंत्रोचार किया और इस विवाह को संपन्न कराया।
नेपाल से लगभग 50 बाराती इस खास पल का गवाह बनने के लिए धाम पहुंचे। यह दृश्य देखकर लगा कि धर्म और संस्कृति सीमाओं के बंधन को नहीं मानती। बागेश्वर धाम ने एक बार फिर दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया।
भावुक पल: जब दूल्हा-दुल्हन की आंखों में खुशी के आंसू
शादी के मंडप में जब वरमाला का समय आया तो माहौल काफी भावुक हो गया। 30-30 की टोली में दूल्हा और दुल्हन को मंच पर आमंत्रित किया गया था। जैसे ही पंडित धीरेंद्र शास्त्री जोड़ों के पास पहुंचे, कई लोग फूट-फूटकर रोने लगे। एक दूल्हा तो गुरुदेव के चरणों में गिर पड़ा और उनका आशीर्वाद लेने लगा।
कई बेटियों ने शास्त्री जी के गले लगकर अपनी विदाई का दुख और खुशी साझा की। पंडित शास्त्री ने बड़े भाई और पिता की तरह हर बेटी का कन्यादान किया। उन्होंने सभी जोड़ों को गृहस्थी बसाने के लिए आवश्यक उपहार और गृहस्थी का सामान दिया।
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संतों का जमावड़ा और राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति
बागेश्वर धाम के इस मंच पर संतों की एक लंबी कतार देखने को मिली। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी और इंद्रेश उपाध्याय जी ने भी जोड़ों को अपना स्नेह दिया। हनुमानगढ़ी के प्रसिद्ध राजूदास महाराज ने भी इस पुनीत कार्य में अपनी उपस्थिति दर्ज की।
अमरावती की सांसद नवनीत कौर राणा ने भी कार्यक्रम में पहुंचकर अपना योगदान दिया। उन्होंने प्रत्येक विवाहित जोड़े को 11-11 हजार रुपए की नकद सहायता राशि भेंट की। धाम की ओर से यह आयोजन लगातार सातवें वर्ष सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है। यहां जात-पात से ऊपर उठकर मानवता और धर्म की सेवा का संदेश दिया गया।
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