एमपी के कई खेल संघों पर नेताओं और अफसरों का कब्जा, जानें कैसे हुआ खुलासा

मध्य प्रदेश के खेल संघों में नेताओं और सरकारी कर्मचारियों का कब्जा है। खिलाड़ियों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है। नेताओं और परिवारवाद का प्रभाव संघों पर बढ़ चुका है।

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Sandeep Kumar
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News in Short

मध्य प्रदेश के 24 खेल संघों के अध्यक्ष पद पर नेताओं का कब्जा है।
15 संघों के अध्यक्ष सरकारी कर्मचारी हैं, 5 में ही खिलाड़ी अध्यक्ष हैं।
खिलाड़ी पदों से हाशिए पर हैं, राजनीति और परिवारवाद का प्रभाव है।
MPCA में सिंधिया परिवार का दबदबा, परिवारवाद टेबल टेनिस में भी।
एथलेटिक्स एसोसिएशन में राजनीतिक लड़ाई का असर खिलाड़ियों पर है।

News in Detail

मध्य प्रदेश के 24 खेल संघों के अध्यक्ष पद पर नेता काबिज हैं। 15 संघों की कमान सरकारी कर्मचारियों के पास है। केवल 5 संघों के अध्यक्ष खिलाड़ी हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के चुनावों पर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि जिनका खेल से कोई संबंध नहीं, वे संघों में हैं।

कोर्ट के बाद मध्य प्रदेश के खेल संघों की जांच की गई। पाया गया कि कई खेलों की कमान ऐसे लोगों के पास है, जिनका खेल से कोई लेना-देना नहीं। फिटनेस वाले खेलों के अध्यक्ष हाई बीपी और शुगर के मरीज हैं। जिन्होंने शूटिंग नहीं की, वे शूटिंग एसोसिएशन में पद पर हैं।

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MPCA पर सिंधिया परिवार का कब्जा

प्रदेश के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट की कमान खिलाड़ियों के हाथ में नहीं है। पिछले 22 सालों से कोई क्रिकेटर MPCA का अध्यक्ष नहीं बना। वर्तमान में महाआर्यमान सिंधिया अध्यक्ष हैं। इससे पहले उनके पिता ज्योतिरादित्य और दादा माधवराव सिंधिया भी अध्यक्ष रहे। जिला स्तर पर भी स्थिति समान है। हर जिले में प्रभावशाली नेताओं का वर्चस्व है। योग्य पूर्व खिलाड़ी और प्रशासक मौके का इंतजार कर रहे हैं।

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टेबल टेनिस एसोसिएशन में परिवारवाद 

मध्य प्रदेश टेबल टेनिस एसोसिएशन में परिवारवाद का उदाहरण है। जब दो कार्यकाल पूरे कर चुके पदाधिकारी हटे, तो परिवार में सत्ता बनी रही। नए अध्यक्ष प्रमोद सोनी, ओम सोनी के छोटे भाई हैं। पूर्व सचिव जयेश आचार्य की पत्नी रिंकू आचार्य नई सचिव बनीं। जयेश और रिंकू आचार्य अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं। दोनों टेबल टेनिस की ट्रेनिंग भी देते हैं।

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खेल संघों पर इनका कब्जा

  1. हर खेल संघ में राजनीति से जुड़े व्यक्ति पदाधिकारी हैं। मुख्यमंत्री, विधायक और स्थानीय नेता संघों पर अपना प्रभाव बनाए रखते हैं।
  2. कई खेल संघ परिवार की जागीर बन गए हैं। पिता के बाद बेटा, पत्नी या परिवार का सदस्य पद पर काबिज होता है। यह सिलसिला सालों से चलता आ रहा है।
  3. अधिकांश संघों में खिलाड़ी या तो नहीं हैं या उन्हें मामूली पद दिए जाते हैं। उनके पास नीतिगत और निर्णायक भूमिका नहीं होती।
  4. राज्य स्तरीय संघों की तरह, जिला संघों में भी स्थानीय नेताओं का वर्चस्व है। इससे प्रतिभाओं को निखारने का काम ठप हो गया है।
  5. कई संघों में पदाधिकारी दशकों से काबिज हैं। नियमों की अनदेखी कर बार-बार चुने जाते हैं। इससे नई सोच और ऊर्जा का प्रवेश रुक गया है।

राजनीतिक लड़ाई का असर खिलाड़ियों पर

मध्यप्रदेश एथलेटिक्स एसोसिएशन में दो गुट हैं। एक गुट के अध्यक्ष खेल मंत्री विश्वास सारंग हैं। इस गुट को मप्र ओलंपिक संघ से मान्यता मिली है। दूसरे गुट के अध्यक्ष कोच अमानत खान हैं। इस गुट को भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन मान्यता देता है। दोनों गुटों की राजनीतिक लड़ाई का असर खिलाड़ियों पर है। सारंग वाले गुट को खेल विभाग सुविधाएं मुहैया कराता है। दूसरा गुट उपेक्षित है।

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इन खेल संघों पर नेताओं का दबदबा...

फुटबॉल एसोसिएशन: राजनीति का प्रभाव है। कार्यकारी अध्यक्ष आलोक चंसोरिया राजनेता हैं। सचिव अमित रंजन देब 2004 से इस पद पर हैं। उनके पिता भी अध्यक्ष रह चुके हैं। इंदौर में रातों-रात कार्यकारिणी भंग कर विधायक रमेश मेंदोला को अध्यक्ष बना दिया गया।

बैडमिंटन एसोसिएशन: सचिव अनिल चौगुले 26 साल से पद पर हैं। नियम के मुताबिक तीन कार्यकाल की इजाजत है। भोपाल संघ में जय सिंह मथारू 40 साल से सचिव हैं।

कराटे एसोसिएशन: यह संघ बीजेपी नेताओं का गढ़ है। मुख्य संरक्षक कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला हैं। डायरेक्टर विक्रम सिंह पवार हैं, जिनकी मां बीजेपी विधायक हैं। कार्यकारी अध्यक्ष बीजेपी खेल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं।

बॉक्सिंग एसोसिएशन: अध्यक्ष संजय सेठ (बीजेपी) और सचिव दिग्विजय सिंह (बीजेपी नेता) हैं।

तैराकी एसोसिएशन: अध्यक्ष पीयूष शर्मा (बीजेपी नेता) हैं।

सॉफ्टबॉल एसोसिएशन: अध्यक्ष रमेश मेंदोला (बीजेपी विधायक) और सचिव समीर गुप्ते (बीजेपी नेता) हैं।

राइफल एसोसिएशन: अध्यक्ष रमेश मेंदोला (बीजेपी विधायक) हैं।

हॉकी, बास्केटबॉल, जूडो, घुड़सवारी में नेता, व्यापारी या रिटायर्ड कर्मचारी अध्यक्ष या सचिव हैं। इनका खेल से कोई संबंध नहीं है। खिलाड़ियों को सलाहकार या संयुक्त सचिव जैसे पदों पर रखा गया है। इन पदों पर उनकी कोई सुनवाई नहीं होती।

महाआर्यमान सिंधिया मंत्री विश्वास सारंग एथलेटिक्स टेबल टेनिस MPCA मध्यप्रदेश
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