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News in Short
हाजी मोहम्मद हारून ने वंदे मातरम् पर आपत्ति जताई।
वे संविधान में दी गई स्वतंत्रता का हवाला देते हैं।
वंदे मातरम् को समझने में कठिनाई, नया हिंदी गीत बनाने की मांग।
अल्लामा इकबाल के सारे जहां से अच्छा गीत की सराहना की।
सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की चिंता जताई, सरकार से अपील।
News in Detail
जमीअत उलेमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने वंदे मातरम् गीत पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इस गीत पर हमेशा आपत्तियां रही हैं। मुसलमानों ने इस पर ऐतराज किया है। हारून ने कहा कि मुल्क से मोहब्बत करना उनका ईमान है। वे अपने देश और मां-बाप से मोहब्बत करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम और पूजन में बड़ा फर्क है।
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संविधान ने मुसलमानों को स्वतंत्रता दी
हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि पूजनीय लफ्ज पर उनकी आपत्ति है। वे अल्लाह के अलावा किसी की इबादत नहीं करते। पूरी दुनिया जानती है कि इस्लाम का क्या मौकफ है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान ने मुसलमानों को स्वतंत्रता दी है। यह सरकार और प्रदेश सरकार को भी पता है। हारून ने कहा कि जबरदस्ती की कोशिश की जाती है, लेकिन अभी तक कानून नहीं बनाया गया है, केवल ऑर्डर जारी किए जाते हैं।
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वंदे मातरम् को लोग नहीं समझते
हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि बड़े लोग वंदे मातरम् और जन गण मन के मतलब को नहीं समझते। एक पत्रकार ने एक जिम्मेदार व्यक्ति से वंदे मातरम् गाने को कहा, लेकिन वे नहीं गा पाए। हारून ने भारत सरकार से अनुरोध किया कि वंदे मातरम् बंगाली भाषा का गीत है। भारत में हिंदी भाषा बोली जाती है। उन्होंने कहा कि एक बेहतरीन गीत हिंदी में होना चाहिए। इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनानी चाहिए। इस कमेटी में विद्वानों, शायरों और कवियों को शामिल करना चाहिए।
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नए गीत के निर्माण की मांग
हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि अल्लामा इकबाल का गीत 'सारे जहां से अच्छा' भारत में गाया जाता है। यह गीत फौज में भी बजाया जाता है। उन्होंने कहा कि या तो इसे भारत का गीत माना जाए या नया गीत बनाया जाए। हारून ने कहा कि ये दोनों गीत बहुतों की समझ में नहीं आते। कई हिंदू भाइयों को भी ये गीत समझ में नहीं आते। उन्होंने कहा कि जबरदस्ती किसी पर गीत थोपना ठीक नहीं है। उन्होंने एक नए गीत के निर्माण की मांग की।
हिंदी में एक गीत बनना चाहिए
हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि भारत के लिए हिंदी में एक गीत बनना चाहिए। उर्दू में सारे जहां से अच्छा है, लेकिन हिंदी में भी ऐसा गीत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये गीत बहुतों को समझ में नहीं आता। हिंदू भाइयों को भी इसका मतलब नहीं पता होता। लोग गाते हैं लेकिन इसका मतलब नहीं बता पाते। उन्होंने कहा कि एक अच्छा गीत बनाना चाहिए, जो सभी को पसंद आए। यह गीत भारत की फौज, पुलिस और आम लोगों को अच्छा लगे। हारून ने इस तरह के गीत की मांग की।
यदि सौहार्द बिगड़ता है, तो यह ठीक नहीं
हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि यह गलत है। यदि सौहार्द बिगड़ता है, तो यह ठीक नहीं। अगर किसी मजलिस में यह गीत पढ़ा जा रहा हो और कुछ लोग न पढ़ें, तो यह सवाल उठता है। पढ़ने वाले दूसरे लोगों को यह समझ में नहीं आता। वे सीधे उन्हें देशद्रोही कह देते हैं, जो गलत है। उन्होंने कहा कि हम देश से प्रेम करते हैं।
हम अपने पहाड़ों, नदियों से मोहब्बत करते हैं। अल्लामा इकबाल ने हिमालिया के बारे में कहा था। "सारे जहां से अच्छा" में यह सब है। हारून ने कहा कि जब यह गीत पढ़ा जाता है, तो सभी धर्मों के लोग इसे पसंद करते हैं। फौज में भी यह गाया जाता है। उन्होंने भारत सरकार और प्रदेश सरकार से हिंदी में अच्छा गीत बनाने की मांग की।
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