जहां वंदे मातरम अनिवार्य, वहां से मुसलमान बच्चों को बाहर निकालें: इमाम

मध्य प्रदेश के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने वंदे मातरम् को इस्लाम विरोधी बताया। उन्होंने मुसलमानों से बच्चों को स्कूलों से निकालने की अपील की। इस बयान पर राजनीति गर्माई हुई है।

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Sandeep Kumar
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News in Short

  • उज्जैन में मुफ्ती नासिर अली ने वंदे मातरम को इस्लाम विरोधी बताया।
  • नासिर ने कहा यह आदेश धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है।
  • कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी विरोध जताया और धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला दिया।
  • केंद्र ने सरकारी आयोजनों और स्कूलों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को अनिवार्य किया है।
  • मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने वंदे मातरम के कुछ छंदों पर आपत्ति जताई।

News in Detail

वंदे मातरम को लेकर समर्थन और विरोध बढ़ रहा है। ताजा मामला मध्य प्रदेश के उज्जैन का है। यहां इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने इसे इस्लाम विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि यह आदेश धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है। वंदे मातरम में हिंदुस्तान की भूमि की पूजा की जाती है। मुसलमानों के लिए यह सही नहीं है। पूजा में किसी को शरीक करना इस्लाम के खिलाफ है।

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सरकार फैसला वापस ले

मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा, जो स्कूलों में वंदे मातरम् अनिवार्य किया जा रहा है, वहां से मुसलमानों को अपने बच्चों को निकाल लेना चाहिए। हम नहीं स्वीकार सकते कि कोई मुसलमान इस्लाम के तहत रहते हुए किसी और खुदा की इबादत करे। यह फैसला कानून के खिलाफ है। मैं सरकार से अपील करता हूं कि वह अपना फैसला वापस ले।"

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विधायक आरिफ मसूद भी दे चुके हैं ये बयान

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी केंद्र सरकार के फैसले का विरोध किया। 12 फरवरी को मसूद ने कहा, भारत एक प्रजातांत्रिक देश है। हमें संविधान के आर्टिकल 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार मिला है।

मसूद ने कहा वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर कोई झगड़ा नहीं है। विवाद कुछ लाइनों को लेकर है, जो मजहबी आजादी पर असर डालती हैं। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा, वह वंदे मातरम् की कुछ लाइनों पर एतराज जता चुके हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस नए कानून की जांच कर रहा है। बोर्ड की राय आने तक कोई फैसला नहीं होगा। 

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केंद्र ने अनिवार्य किया है वंदे मातरम 

केंद्र सरकार ने 28 जनवरी को नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनके अनुसार, अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और अन्य औपचारिक आयोजनों में 'वंदे मातरम' बजाना अनिवार्य होगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना जरूरी होगा।

अब तक वंदे मातरम का केवल पहला हिस्सा गाया जाता था, लेकिन सरकार ने अब पूरे 6 छंदों को अनिवार्य किया है। मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं का कहना है कि बाद के छंदों में मातृभूमि की वंदना उनके मजहबी सिद्धांतों (एकेश्वरवाद) के खिलाफ है।

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