वंदे मातरम् पर विधायक आरिफ मसूद के बयान से मचा घमासान, सीएम बोले- गाना करेंगे जरूरी
Aman Vaishnav | Feb 13, 2026, 10:54 IST
mp bhopal mla arif masood vande mataram protest
केंद्र सरकार के आदेश के बाद अब मध्यप्रदेश के सभी स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम् के सभी 6 छंद गाना अनिवार्य होगा। सीएम मोहन यादव ने पूरे प्रदेश में इसे लागू करने के लिए निर्देश दिए हैं। वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसका विरोध किया है।
केंद्र सरकार के फैसले के बाद अब मध्यप्रदेश में सभी स्कूलों, मदरसों और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी 6 छंद गाना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे तुरंत लागू करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद भी किया।
सीएम मोहन यादव ने कहा कि वंदे मातरम् मंत्र ने आजादी की लड़ाई में एक ऊर्जा का काम किया है। यह हमारे सेनानियों के संघर्ष को और ताकतवर बनाता था, और इसकी महत्वता वाकई काबिल-ए-तारीफ है।
उन्होंने आगे कहा कि अब यह मंत्र हर जगह गूंजेगा। अब हर कार्यक्रम में जन-गण-मन से पहले या बाद में वंदे मातरम् का सम्मान के साथ गायन किया जाएगा। यह हमारे शहीदों को सही श्रद्धांजलि होगी।
कांग्रेस
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मुख्यमंत्री के इस ऐलान का विरोध किया है। आरिफ मसूद ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां हर नागरिक को संविधान के तहत अपने अधिकार मिलते हैं।
आरिफ मसूद ने खास तौर पर आर्टिकल 25 का जिक्र किया, जो हर किसी को अपने धर्म का पालन और प्रचार करने की आजादी देता है। इसलिए किसी भी नए कानून या आदेश को लागू करने से पहले यह जरूरी है कि उसे संविधान के हिसाब से परखा जाए।
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आरिफ मसूद ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बनाए गए कानून का अब अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सिर्फ वह नहीं, बल्कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी इस मामले पर गंभीरता से सोच रहा है। जब तक बोर्ड अपनी आधिकारिक राय नहीं बना लेता, तब तक इस पर कोई भी अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।
आरिफ मसूद ने ये भी कहा कि वंदे मातरम के सम्मान को लेकर मुस्लिम समाज को कोई आपत्ति नहीं है। आपत्ति सिर्फ गीत की कुछ पंक्तियों को लेकर है, जिन पर पहले भी ऐतराज जताया गया है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जो लोग आज वंदे मातरम् पर बहस कर रहे हैं, वही लोग सबसे ज्यादा संविधान का मजाक उड़ाते हैं।
आरिफ मसूद ने कहा कि इस मुद्दे पर सोच-समझकर और विस्तार से चर्चा करने के बाद ही कोई राय बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की राय के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा और उसी के आधार पर आखिरी फैसला लिया जाएगा।
स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जो भी नागरिक है, उसे देश का कानून मानना पड़ेगा। उन्होंने ये भी कहा कि चाहे मदरसा हो या कोई और स्कूल, सभी को वंदे मातरम् गाना होगा।
मंत्री ने ये भी बताया कि आजादी की लड़ाई सिर्फ कांग्रेस की ही नहीं थी। ये फैसला बहुत पहले ही लिया जाना चाहिए था ताकि युवा पीढ़ी को राष्ट्रवाद से जोड़ा जा सके।
अब तक वंदे मातरम् का सिर्फ पहला हिस्सा गाया जाता था, लेकिन अब सरकार ने इसके सभी 6 छंदों को गाना अनिवार्य कर दिया है। मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं का कहना है कि बाद के छंदों में मातृभूमि की वंदना इस तरह की गई है कि वह उनके धार्मिक विचारों (जो एकेश्वरवाद पर आधारित हैं) के खिलाफ है। इस वजह से आरिफ मसूद और पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे अध्ययन और धार्मिक स्वतंत्रता के जायरे में रखा है।
केंद्र सरकार के नई गाइडलाइन में कहा था कि अब वंदे मातरम् को राष्ट्रगान जन गण मन से पहले बजाया जाएगा। इस दौरान, सभी को खड़े रहना जरूरी होगा।
यदि किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान दोनों बजाए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम् बजाया जाएगा, उसके बाद राष्ट्रगान बजेगा। हालांकि मंत्रालय ने यह भी साफ किया था कि अगर वंदे मातरम् किसी डॉक्यूमेंट्री या न्यूजरील का हिस्सा है, तो वहां दर्शकों से खड़े होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि कार्यक्रम में कोई अव्यवस्था न फैले।
जहां सिर्फ बजाया जाएगा: यह उन कार्यक्रमों के लिए है, जैसे राष्ट्रपति और राज्यपाल के औपचारिक कार्यक्रम, सिविल इन्वेस्टिचर और राष्ट्रीय ध्वज के परेड में इसे बजाना।
जहां बजाने के साथ सामूहिक गायन होगा: यह तिरंगा फहराने के मौके, सांस्कृतिक और औपचारिक समारोहों और राष्ट्रपति के सार्वजनिक कार्यक्रमों में होगा।
जहां गाया जा सकता है: यह स्कूलों के कार्यक्रमों और उन आयोजनों में होगा, जहां मंत्री या अन्य गणमान्य लोग मौजूद होते हैं।
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जन-गण-मन से पहले वंदे मातरम्
उन्होंने आगे कहा कि अब यह मंत्र हर जगह गूंजेगा। अब हर कार्यक्रम में जन-गण-मन से पहले या बाद में वंदे मातरम् का सम्मान के साथ गायन किया जाएगा। यह हमारे शहीदों को सही श्रद्धांजलि होगी।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने किया विरोध
आरिफ मसूद ने खास तौर पर आर्टिकल 25 का जिक्र किया, जो हर किसी को अपने धर्म का पालन और प्रचार करने की आजादी देता है। इसलिए किसी भी नए कानून या आदेश को लागू करने से पहले यह जरूरी है कि उसे संविधान के हिसाब से परखा जाए।
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सिर्फ कुछ पंक्तियों को लेकर आपत्ति
आरिफ मसूद ने ये भी कहा कि वंदे मातरम के सम्मान को लेकर मुस्लिम समाज को कोई आपत्ति नहीं है। आपत्ति सिर्फ गीत की कुछ पंक्तियों को लेकर है, जिन पर पहले भी ऐतराज जताया गया है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जो लोग आज वंदे मातरम् पर बहस कर रहे हैं, वही लोग सबसे ज्यादा संविधान का मजाक उड़ाते हैं।
इस आधार पर होगा आखिरी फैसला
स्कूल शिक्षा मंत्री बोले- कानून मानना पड़ेगा
मंत्री ने ये भी बताया कि आजादी की लड़ाई सिर्फ कांग्रेस की ही नहीं थी। ये फैसला बहुत पहले ही लिया जाना चाहिए था ताकि युवा पीढ़ी को राष्ट्रवाद से जोड़ा जा सके।
ये है वंदे मातरम् के 6 छंदो का विवाद
वंदे मातरम् अब राष्ट्रगान से पहले बजेगा
यदि किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान दोनों बजाए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम् बजाया जाएगा, उसके बाद राष्ट्रगान बजेगा। हालांकि मंत्रालय ने यह भी साफ किया था कि अगर वंदे मातरम् किसी डॉक्यूमेंट्री या न्यूजरील का हिस्सा है, तो वहां दर्शकों से खड़े होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि कार्यक्रम में कोई अव्यवस्था न फैले।
तीन श्रेणियों में होगा वंदे मातरम् का गायन या वादन
जहां बजाने के साथ सामूहिक गायन होगा: यह तिरंगा फहराने के मौके, सांस्कृतिक और औपचारिक समारोहों और राष्ट्रपति के सार्वजनिक कार्यक्रमों में होगा।
जहां गाया जा सकता है: यह स्कूलों के कार्यक्रमों और उन आयोजनों में होगा, जहां मंत्री या अन्य गणमान्य लोग मौजूद होते हैं।
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