बागेश्वर धाम के आस-पास खेती की जमीन पर बिना प्लानिंग काट रहे प्लॉट
Sandeep Kumar | Feb 21, 2026, 23:47 IST
bageshwar dham
बागेश्वर धाम के पास गढ़ा गांव में अवैध प्लॉटिंग का मामला सामने आया है। कॉलोनाइजर खेतों की जमीन पर बिना प्लानिंग के प्लॉट बेच रहे हैं। यह काम बिना लैंड यूज चेंज के हो रहा है।
BHOPAL. मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा गांव में बागेश्वर धाम के आसपास अवैध प्लॉटिंग का बड़ा खेल चल रहा है। बागेश्वर धाम के नाम का फायदा उठाकर दर्जनों कॉलोनाइजर खेती की जमीन पर प्लॉट्स बेच रहे हैं। इन प्लॉट्स की कीमतें भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों से भी ज्यादा हो गई हैं। इन प्लॉट्स पर न तो कोई प्लानिंग है, न ही बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, पानी, नाली या बिजली का प्रबंध है।
गांव में स्थित बागेश्वर धाम के कारण जमीनों की कीमतें अचानक बढ़ गई हैं। इसका फायदा उठाने के लिए दर्जनभर कॉलोनाइजर यहां अवैध तरीके से कॉलोनियां काट रहे हैं। इन कॉलोनियों में न तो लैंड यूज चेंज की मंजूरी है और न ही इन पर सही तरह से प्लानिंग की गई है। इसके बावजूद ये प्लॉट्स किसी भी औपचारिक प्रक्रिया के बिना बेचे जा रहे हैं।
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कॉलोनाइजर द्वारा लगाए गए बैनरों और पोस्टरों में दावा किया जा रहा है कि ये प्लॉट्स बागेश्वर धाम से 6 महीने में 50-60% मुनाफा देंगे। लेकिन इनकी असलियत कुछ और ही है। प्लॉट्स खरीदने के लिए ग्राहकों को 25 से 30 लाख रुपये प्रति हजार स्क्वायर फीट खर्च करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इन कॉलोनियों में न तो सड़कें हैं, न स्ट्रीट लाइट और न ही कोई अन्य आधारभूत सुविधाएं।
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बताया जा रहा है कि गढ़ा गांव में जमीन एक बड़े नेटवर्क द्वारा बेची जा रही है। बागेश्वर धाम स्थित बागेश्वर बालाजी मंदिर के रास्ते पर एक बिल्डिंग पर "बागेश्वर धाम प्रॉपर्टीज" का पोस्टर लगा था। इस पोस्टर में राघवपुरम कॉलोनी और सनातन धाम के नाम से प्रोजेक्ट चलने की जानकारी दी गई थी। इन प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी दी गई कि इनका संबंध धीरेंद्र शास्त्री के बड़े पापा के बेटे से है, जो यहां प्रॉपर्टी का बड़ा काम कर रहे हैं।
विक्रेता दावा करते हैं कि इन प्रोजेक्ट्स में निवेश से 2027 तक जमीन की कीमत बढ़ेगी। उनका कहना है कि इस दौरान कैंसर हॉस्पिटल बनकर तैयार हो जाएगा। राघवपुरम प्रोजेक्ट की कीमतें 2500 से 4000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट तक हैं। ये कीमतें इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों के प्लॉट्स से कहीं अधिक हैं।
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इन प्रोजेक्ट्स में 3-4 महीने पहले ही काम शुरू हुआ था। अब तक अधिकांश प्लॉट बिक चुके हैं। यह स्थिति दिखाती है कि प्रचार-प्रसार तेजी से हो रहा है। हालांकि कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह पूरी तरह से अवैध है।
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इस खुलासे से यह भी पता चला है कि ये सारे प्रोजेक्ट्स बिना किसी कानूनी मंजूरी के चल रहे हैं। जबकि बागेश्वर धाम का नाम और धर्मिक आयोजनों का हवाला देकर इन प्लॉट्स को बेचा जा रहा है।
कैसे हो रही है अवैध प्लॉटिंग?
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कॉलोनाइजर का फर्जी दावा
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किसका है यह प्रोजेक्ट?
2027 तक जमीन की कीमत बढ़ेगी
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अधिकांश प्लॉट बिक चुके हैं
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सारे प्रोजेक्ट्स बिना किसी कानूनी मंजूरी के
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