भोपाल मास्टर प्लान पर बीजेपी में घमासान, अफसरों की कॉलोनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप, प्लान रद्द करने की मांग
वहीं, परिसीमन को लेकर सांसद आलोक शर्मा का बयान भी चर्चा में रहा। बैठक में गोविंदपुरा और नरेला विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल भोपाल के मास्टर प्लान (Bhopal master plan) पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
मास्टर प्लान पर क्यों घिरी बैठक
भाजपा कोर कमेटी की बैठक भोपाल में शनिवार, 17 अक्टूबर को हुई। इसमें प्रस्तावित भोपाल के मास्टर प्लान का मुद्दा उठाया गया। यह भाजपा की महानगर इकाई की बैठक थी। संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी भी इसमें शामिल थे।
मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी हो चुका है। उसी पर नेताओं ने सवाल उठाए हैं। भोपाल की बीजेपी कोर कमेटी (BJP core committee Bhopal) में परिसीमन पर भी चर्चा हुई।
कौन-कौन मौजूद रहा
बैठक में मंत्री विश्वास सारंग और कृष्णा गौर मौजूद थे। सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा और भगवानदास सबनानी भी थे। जिलाध्यक्ष रविंद्र यति और प्रदेश मंत्री राहुल कोठारी भी पहुंचे।
प्रदेश मंत्री राजेंद्र सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष सुमित पचौरी और विकास वीरानी भी मौजूद रहे। महापौर मालती राय भी बैठक में थीं।
अफसरों की कॉलोनियों का एफएआर बढ़ाने का आरोप
पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने कहा कि मास्टर प्लान रद्द होना चाहिए। यही भोपाल मास्टर प्लान रद्द करने की मांग का आधार बना है।
उनका आरोप है कि अफसरों की कॉलोनियों का एफएआर बढ़ा दिया गया है। एफएआर (FAR - Floor Area Ratio) तय करता है कि कितना निर्माण हो सकता है। उन्होंने आईएएस अफसरों की कॉलोनियां गिनाईं। इनमें व्हिस्परिंग पाम शामिल है।
खानूगांव और इज्तिमा स्थल पर सवाल
पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह का आरोप है कि खानूगांव को बस्ती बता दिया गया है। उन्होंने कहा कि भोपाल से 25 किलोमीटर दूर ईटखेड़ी में इज्तिमा होता है। यह 100 एकड़ से ज्यादा जगह पर होता है। उनके मुताबिक मास्टर प्लान में इसे आवासीय और कमर्शियल कर दिया गया है।
पूर्व जिलाध्यक्ष विकास वीरानी ने कहा कि एक लाख व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान में इनका ध्यान रखकर हल निकाला जाए। बाकी नेताओं ने भी अपने सुझाव दिए हैं।
परिसीमन पर क्या बोले आलोक शर्मा
भोपाल विधानसभा परिसीमन पर भी बैठक में बात हुई। सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि पिछले परिसीमन की गलती 25 साल से भुगत रहे हैं। आलोक शर्मा का परिसीमन पर कहा कि उस समय आबादी का बंटवारा गलत था।
उनके मुताबिक तब पूरी मुस्लिम आबादी उत्तर में रख दी गई थी। उन्होंने कहा कि नए परिसीमन में ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए। उस समय लक्ष्मीनारायण, बाबूलाल गौर, उमाशंकर गुप्ता, आरिफ अकील और सुरेश पचौरी सक्रिय थे।
मंत्री और विधायक की राय
मंत्री विश्वास सारंग और विधायक रमेश्वर शर्मा ने भी बात रखी। उनका कहना था कि हर सीट पर मुस्लिम आबादी होनी चाहिए।
सारंग ने डेमोग्राफिक बदलाव का जिक्र किया।
सारंग के मुताबिक एसआईआर (SIR - Special Intensive Revision) में उनकी विधानसभा को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
ध्रुवनारायण ने रखा अलग सुझाव
पूर्व विधायक ध्रुवनारायण ने कहा कि एक वर्ग को एक ही विधानसभा में रख सकते हैं। फिर इस सीट को आरक्षित करें, तो बैरसिया मुक्त हो जाएगा।
इस पर आधे नेता सहमत नहीं हुए। यानी परिसीमन के तरीके पर बैठक में एक राय नहीं बनी।
गोविंदपुरा और नरेला की सीमाओं पर सवाल
ध्रुवनारायण सिंह ने कहा कि गोविंदपुरा सीट नेशनल हाईवे के एक तरफ होनी चाहिए थी। लेकिन वह रेलवे लाइन पार कर मध्य तक पहुंच गई।
मंत्री सारंग ने कहा कि उनकी नरेला विधानसभा में नरेला शंकरी नहीं है। वह गोविंदपुरा में है। कृष्णा गौर ने कहा कि गोविंदपुरा का गौतम नगर नरेला में है।
संगठन महामंत्री ने पूछा, आपमें समन्वय है या नहीं
संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी ने सबसे पहले सभी का परिचय लिया। फिर पूछा कि क्या नेताओं में समन्वय है।
जिले के नेताओं ने जवाब दिया कि समन्वय है। हर महीने बैठक भी होती है। संगठन महामंत्री ने कहा कि भोपाल से पूरे प्रदेश में संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि अगले एक साल में क्या नया करें, इस पर ध्यान दें।
FAQs
- भोपाल में भाजपा कोर कमेटी की बैठक में कौन-कौन से मुद्दे उठाए गए?
भोपाल में भाजपा कोर कमेटी की बैठक में मास्टर प्लान और परिसीमन जैसे मुद्दे उठाए गए। पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने भोपाल के मास्टर प्लान को रद्द करने की मांग की और सांसद आलोक शर्मा ने परिसीमन पर अपना बयान दिया। - भोपाल मास्टर प्लान रद्द करने की मांग किसके द्वारा की गई और क्यों?
मास्टर प्लान रद्द करने की मांग पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने की, जिन्होंने आरोप लगाया कि अफसरों की कॉलोनियों में निर्माण की अनुमति बढ़ाने के लिए एफएआर (Floor Area Ratio) बढ़ाया गया है। - परिसीमन पर सांसद आलोक शर्मा का क्या कहना था?
सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि पिछले परिसीमन की गलती 25 साल से भोगी जा रही है और नए परिसीमन में ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पिछले परिसीमन में आबादी के बंटवारे की समस्या को रेखांकित किया।