भोपाल मेट्रो की रफ्तार जुलाई से बढ़ेगी, अब दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी

Sandeep Kumar | Jun 17, 2026, 16:15 IST
भोपाल मेट्रो की रफ्तार जुलाई से बढ़ेगी
भोपाल मेट्रो का सिग्नलिंग सिस्टम तैयार कर लिया गया है। जुलाई से दोनों ट्रैक पर ट्रेन चलेगी। इससे मेट्रो के 75 मिनट का इंतजार घटेगा और यात्रियों को जल्दी-जल्दी मेट्रो मिलेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सुभाष नगर से एम्स तक सिग्नलिंग सिस्टम पूरा हुआ।
  • अभी तक मेट्रो एक ही ट्रैक पर चल रही थी।
  • ट्रेन 75 मिनट के अंतराल पर चल रही थी।
  • जुलाई से दोनों ट्रैक पर संचालन शुरू होगा।
  • यात्रियों का समय बचेगा और फेरे बढ़ेंगे।

भोपाल मेट्रो की सुस्त रफ्तार

भोपाल मेट्रो इन दिनों काफी सुर्खियों में है। वजह है इसकी धीमी रफ्तार। हाल में यह बात सामने आई कि मेट्रो साइकिल से भी धीमी दौड़ रही है। यात्री नाराज हैं। सवाल उठ रहे हैं। असल में दिक्कत तकनीकी है। शहर में अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं है। इस वजह से एक ही ट्रैक पर आना-जाना हो रहा है।



एक ट्रैक पर दोनों दिशाएं

सुभाष नगर से एम्स के बीच 7 किलोमीटर का ट्रैक है। अभी ट्रेन डाउन ट्रैक पर जाती है और उसी ट्रैक से वापस लौटती है। अप ट्रैक पूरी तरह खाली पड़ा है। इससे फ्रिक्वेंसी 75 मिनट पर आ गई है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बाद ही सेवा मिलती है।



800 करोड़ का सिग्नलिंग प्रोजेक्ट

भोपाल और इंदौर में करीब 30 किलोमीटर के नेटवर्क के लिए सिग्नलिंग सिस्टम का टेंडर हुआ था। यह टेंडर करीब 800 करोड़ रुपए का है। सुभाष नगर से एम्स तक का काम इसका पहला चरण था। यह हिस्सा अब पूरा हो गया है। बाकी काम भी जारी है।



कमिश्नर की टीम देगी मंजूरी

काम पूरा होने के बाद अब सुरक्षा जांच की बारी है। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी यानी सीएमआरएस (CMRS – Commissioner of Metro Rail Safety) की टीम अगले हफ्ते निरीक्षण के लिए आ सकती है। असिस्टेंट सीएमआरएस की टीम पहले ही एक बार देख चुकी है। अब मुख्य टीम की रिपोर्ट के बाद ही सिस्टम चालू होगा।



मेट्रो की रीढ़ है सिग्नलिंग सिस्टम

किसी भी मेट्रो नेटवर्क में सिग्नलिंग सिस्टम सबसे जरूरी हिस्सा होता है। यह तय करता है कि ट्रेन कितनी दूरी पर चलेगी। दो ट्रेनों के बीच सुरक्षित फासला बनाए रखता है। इसी के दम पर अलग-अलग ट्रैक पर एक साथ ट्रेन चलाई जा सकती है। बिना इसके पूरी क्षमता से संचालन संभव नहीं।



दिल्ली वाली तकनीक आएगी भोपाल

भोपाल में वही तकनीक लागू होगी जो दिल्ली मेट्रो में काम करती है। इस तकनीक के आने से दोनों ट्रैक एक साथ चलेंगे। ट्रेनों के बीच का अंतर यानी हेडवे कम होगा। इसका मतलब है कि जल्दी-जल्दी ट्रेन मिलेगी।



शहर की बड़ी उम्मीद

भोपाल मेट्रो (Bhopal Metro) शहर की बड़ी परियोजना है। यह लगभग 30 किलोमीटर नेटवर्क का हिस्सा है। धीरे-धीरे पूरा नेटवर्क तैयार हो रहा है। सिग्नलिंग सिस्टम इसकी बड़ी उपलब्धि है। इससे परियोजना को नई दिशा मिलेगी। भविष्य में यात्री संख्या बढ़ने की उम्मीद है। यह शहर का मुख्य परिवहन साधन बन सकता है। इससे यातायात व्यवस्था मजबूत होगी।



जुलाई से क्या बदलेगा

नया सिस्टम शुरू होते ही मेट्रो दोनों दिशाओं से चलेगी। 75 मिनट का इंतजार कम होगा। सुबह और शाम ऑफिस के समय भी मेट्रो मिलेगी। यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।



FAQ

  1. भोपाल मेट्रो अभी इतनी धीमी क्यों है?
    भोपाल मेट्रो में अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं है। इस वजह से ट्रेन एक ही ट्रैक पर आती-जाती है। इससे फ्रिक्वेंसी 75 मिनट तक बढ़ गई है।
  2. जुलाई के बाद मेट्रो में क्या बदलाव होगा?
    जुलाई में सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद दोनों ट्रैक पर ट्रेन चलेगी। फेरे बढ़ेंगे और इंतजार का समय कम होगा। नया शेड्यूल भी जारी होगा।

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