एक साथ जुड़ेंगे ट्रेन, बस, मेट्रो: भोपाल से होगी शुरुआत, एक क्लिक में सफर आसान

Manya Jain | Jun 15, 2026, 19:05 IST
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mp multi model transport bus metro train
mp multi model transport bus metro train

देश में पहली बार मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन गाइडलाइन बन रही है। ट्रेन, बस, मेट्रो और एयरपोर्ट एक सिस्टम से जुड़ेंगे। भोपाल में 200 किमी सड़कों का डिजिटल सर्वे भी शुरू।

समझें क्या है पूरा मामला

  • देश में पहली बार एकीकृत ट्रांसपोर्ट सिस्टम बन रहा है।
  • ट्रेन बस मेट्रो एयरपोर्ट एक सिस्टम से जुड़ सकेंगे।
  • भारतीय सड़क कांग्रेस की जी-6 समिति इस पर काम कर रही है।
  • MANIT भोपाल के डॉ. राहुल तिवारी तकनीकी सुझाव दे रहे हैं।
  • ट्रेन लेट होने पर बस मेट्रो की जानकारी ऑटोमैटिक मिलेगी।

एक प्लेटफॉर्म काफी नहीं था

ट्रेन, बस या फ्लाइट टिकट एक जगह से बुक करना अब मुमकिन है। लेकिन यात्रा के दौरान एक साधन से दूसरे पर जाना अब भी बड़ी मुश्किल है। ट्रेन लेट हो जाए तो बस छूट जाती है। मेट्रो और बस स्टेशन के बीच कोई तालमेल नहीं होता। इसी समस्या को सुलझाने के लिए अब एक नई राष्ट्रीय नीति तैयार हो रही है।

देश की पहली ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन गाइडलाइन

भारत सरकार के लिए भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC – Indian Roads Congress) की जी-6 समिति यह काम कर रही है। इस नीति का उद्देश्य रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल, मेट्रो स्टेशन और एयरपोर्ट को एक साझा ढांचे से जोड़ना है।

MANIT (Maulana Azad National Institute of Technology) भोपाल के परिवहन विशेषज्ञ डॉ. राहुल तिवारी इस समिति में तकनीकी सुझाव देने, नीति का मसौदा तैयार करने और ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन मॉडल बनाने का काम कर रहे हैं।

ट्रेन लेट हुई तो बस खुद मिलेगी

डॉ. तिवारी के मुताबिक यह सिर्फ कोई नया टिकटिंग ऐप नहीं है। यह पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम के बीच असली तालमेल बनाने की कोशिश है।उदाहरण के लिए, अगर ट्रेन देर से पहुंचती है तो आगे की बस, मेट्रो या अन्य सेवा की जानकारी यात्री को अपने आप मिल जाएगी। यात्री को अलग-अलग सिस्टम में भटकना नहीं पड़ेगा।

शहरों की प्लानिंग बदलेगी

यह नीति सिर्फ मौजूदा व्यवस्था सुधारने तक सीमित नहीं है। भविष्य में बनने वाले ट्रांसपोर्ट हब, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और मेट्रो कॉरिडोर की डिजाइन और लोकेशन भी इसी मॉडल के अनुसार तय होगी।

इससे एक साधन से दूसरे पर जाने में लगने वाला समय कम होगा। यात्रा ज्यादा सुविधाजनक और भरोसेमंद बनेगी।

भोपाल में 200 किमी सड़कों का डिजिटल सर्वे

मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC – Madhya Pradesh Road Development Corporation) ने भोपाल में 200 किलोमीटर सड़कों के डिजिटल सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सर्वे वीकल तकनीक से सड़कों की मोटाई, गड्ढों की स्थिति, पुलों की मजबूती और ट्रैफिक के दबाव का लाइव डेटा तैयार होगा। यह डेटा सरकार के रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (Road Asset Management System) से जुड़ेगा।

नई बसाहटों को मिलेगी सड़क

करौंद से मिसरोद, रत्नागिरी से भदभदा और कोलार से गांधीनगर जैसे इलाकों के बीच दूरी घटेगी। पूरे शहर में लास्ट माइल कनेक्टिविटी यानी घर, बाजार, अस्पताल और दफ्तर तक पहुंचने लायक सड़क नेटवर्क बेहतर होगा।

नीलवड, कलखेड़ा, रातीबड़, श्यामपुर दोराहा और भौरी के आगे तक की नई बसाहटों में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग रह रहे हैं। उन्हें नई सड़कें मिलने की उम्मीद बनेगी।

MP के बाकी शहरों में भी लागू होगा

यह प्रोजेक्ट सिर्फ भोपाल तक नहीं रुकेगा। मध्यप्रदेश के बाकी शहरों में भी इसी मॉडल पर काम किया जाएगा। डिजिटल सर्वे के बाद सड़कों के री-डेवलपमेंट की नई योजना बनेगी। इसमें नए इलाकों और नई सड़कों पर खास ध्यान दिया जाएगा।

एक्सपर्ट कोट्स

डॉ. राहुल तिवारी, परिवहन विशेषज्ञ, MANIT भोपाल (IRC जी-6 समिति सदस्य):
"यह परियोजना किसी नए टिकटिंग ऐप तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रांसपोर्ट सिस्टम के बीच वास्तविक समन्वय स्थापित करना है। यात्री को अलग-अलग सिस्टम में जानकारी तलाशने की परेशानी नहीं होगी।"
(स्रोत: source copy में उद्धृत बयान, जून 2026)

FAQ

  1. मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन क्या होता है?
    इसका मतलब है ट्रेन, बस, मेट्रो, एयरपोर्ट और स्थानीय परिवहन को एक ही सिस्टम से जोड़ना। इससे यात्री एक साधन से दूसरे पर बिना किसी परेशानी के जा सकेंगे। ट्रेन लेट होने पर अगली बस या मेट्रो की जानकारी अपने आप मिलेगी।
  2. भोपाल में सड़कों का डिजिटल सर्वे क्यों हो रहा है?
    MPRDC 200 किलोमीटर सड़कों की असली स्थिति जानने के लिए यह सर्वे कर रहा है। सर्वे वीकल से सड़कों की मोटाई, गड्ढे और पुलों की मजबूती का लाइव डेटा तैयार होगा। इसी डेटा के आधार पर सड़कों का नए सिरे से विकास किया जाएगा।
  3. इस नीति से आम यात्री को क्या फायदा होगा?
    यात्री को अलग-अलग सिस्टम में भटकना नहीं पड़ेगा। एक साधन से दूसरे पर जाने का समय कम होगा। नई बसाहटों में रहने वाले लोगों को बेहतर सड़क और परिवहन सेवा मिलेगी।
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