भोपाल मेट्रोपॉलिटन: 10 लाख की आबादी पर नया निकाय बनाने की तैयारी
News In Short
- भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन के तहत अब 10 लाख की आबादी पर एक अलग निकाय बनाने की योजना है।
- मेट्रोपॉलिटन रीजन बनने की वजह से भोपाल का मास्टर प्लान अभी रुका हुआ है।
- शहर का 40 फीसदी आवासीय क्षेत्र अब मिक्स लैंडयूज में बदल चुका है।
- भोपाल के आसपास चार जिलों की 20 लाख आबादी को भी इस रीजन से जोड़ा जाएगा।
- अप्रैल 2027 तक मास्टर प्लान तैयार होने का अनुमान है।
News In Detail
भोपाल में बनेगा नया उपनगर
भोपाल में बड़ा बदलाव होने वाला है। मेट्रोपॉलिटन रीजन के तहत अब 10 लाख की आबादी पर एक अलग निकाय बनेगा। यह निकाय एक उपनगर की तरह काम करेगा। यहां लोगों को सब कुछ पास में ही मिलेगा।
मेट्रोपॉलिटन रीजन क्यों रोक रहा है मास्टर प्लान?
भोपाल का मास्टर प्लान मेट्रोपॉलिटन रीजन की वजह से रुका है। विभागीय मंत्री खुद यह बात कह चुके हैं। मेट्रोपॉलिटन की योजना जाहिर होने के बाद ही मास्टर प्लान बनेगा। अभी मास्टर प्लान 2047 तय किया जा रहा है। भोपाल का मास्टर प्लान 21 साल से लेट है।
इंदौर से पीछे क्यों है भोपाल?
सरकार ने इंदौर और भोपाल दोनों को मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाया था। इंदौर का डीपीआर 80 फीसदी तैयार हो चुका है। भोपाल में अभी कंसल्टेंट नियुक्त हुई है। इंदौर भोपाल से करीब एक साल आगे चल रहा है।
40% आवासीय क्षेत्र मिक्स लैंडयूज में बदला
शहर का 40 फीसदी आवासीय क्षेत्र अब मिक्स लैंडयूज बन गया है। यह जानकारी टीडीसीपी के सर्वे में सामने आई है। कोलार से लेकर नेहरू नगर, आंबेडकरी, साकेतनगर, डीआरएम, एस, संतनगर और गांधी नगर सब इसमें शामिल हैं। 2005 के प्लान में 15 हजार हेक्टेयर आवासीय था। अब 6000 हेक्टेयर व्यावसायिक हो गया है।
2031 में था एक लाख हेक्टेयर का टारगेट
पिछले ड्राफ्ट 2031 में प्लानिंग क्षेत्र 1016 वर्ग किमी था। यानी करीब 1.01 लाख हेक्टेयर तय किया था। इसमें 10 हजार हेक्टेयर आवासीय क्षेत्र बढ़ाया गया था। अब नए प्लान में यह आंकड़ा और बदलेगा।
भोपाल को केंद्र में रखकर जुड़ेंगे चार जिले
BDA को नोडल एजेंसी बनाकर भोपाल को केंद्र में रखा गया है। आसपास के जिलों को गोलाई में जोड़ा गया है। लेकिन बैरसिया को मेट्रोपॉलिटन के बाहर रखा गया है। इस पर विरोध भी हो रहा है।
अप्रैल 2027 तक आएगा मास्टर प्लान
अभी BDA में कंसल्टेंसी एजेंसी प्रस्ताव तैयार कर रही है। अप्रैल 2027 तक डीपीआर तैयार होगी। इसके बाद जमीनी काम शुरू होगा। संभागायुक्त और प्रशासक BDA संजीव सिंह ने यह जानकारी दी।
BDA की प्लानिंग पर क्या बोले अधिकारी?
टीएंडसीपी के आयुक्त सह संचालक श्रीकांत बनोट ने कहा कि भोपाल मास्टर प्लान के लिए काम चल रहा है। शहर की मौजूदा स्थिति और जरूरत के अनुसार सर्वे कर काम तय होता है। इसे ही आधार बनाकर प्लान बनाया जाएगा।
FAQ
- भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन में कौन-कौन से जिले शामिल हैं?
भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन में भोपाल को केंद्र में रखकर आसपास के चार जिलों को गोलाई में जोड़ा गया है। कुल मिलाकर भोपाल जिले की 25 लाख और आसपास के जिलों की 20 लाख यानी करीब 45 लाख से ज्यादा आबादी इस रीजन में आती है। हालांकि बैरसिया को इस मेट्रोपॉलिटन रीजन से बाहर रखा गया है, जिसका विरोध हो रहा है। BDA को इस पूरे रीजन की नोडल एजेंसी बनाया गया है। - भोपाल मास्टर प्लान 2047 कब तक तैयार होगा?
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के लिए अभी BDA में कंसल्टेंसी एजेंसी काम कर रही है। अप्रैल 2027 तक डीपीआर तैयार होने का अनुमान है। इसके बाद जमीनी काम शुरू होगा। भोपाल का मास्टर प्लान पहले से ही करीब 21 साल लेट चल रहा है। मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना जाहिर होने के बाद ही मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा। - भोपाल में मिक्स लैंडयूज क्या है और यह क्यों बढ़ा?
मिक्स लैंडयूज का मतलब है कि जो इलाका पहले सिर्फ रहने के लिए था, वहां अब दुकानें, दफ्तर और व्यापारिक गतिविधियां भी होती हैं। टीडीसीपी के सर्वे के अनुसार भोपाल का 40 फीसदी आवासीय क्षेत्र अब मिक्स लैंडयूज में बदल गया है। 2005 के प्लान में 15 हजार हेक्टेयर आवासीय था, जिसमें से 6 हजार हेक्टेयर अब व्यावसायिक हो गया है। इसकी मुख्य वजह शहर का बेतरतीब विकास और मास्टर प्लान का लागू न होना है।
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