भोपाल निगम में करोड़ों का बिल घोटाला: हार्ड डिस्क खोलेगी फर्जीवाड़े के राज!
भोपाल नगर निगम (BMC) में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा लोकायुक्त की हालिया कार्रवाई से हो रहा है। बिना काम किए कागजों पर करोड़ों के वारे-न्यारे करने का यह खेल अब डिजिटल सबूतों के घेरे में है। हाल ही में हुई छापेमारी के बाद अब सबकी नजरें जब्त की गई हार्ड डिस्क पर टिकी हैं, जो इस पूरे सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा खोल सकती है।
सर्वर रूम से निकलेगा फर्जीवाड़े का सच
लोकायुक्त (Lokayukta) की टीम ने कार्रवाई के दौरान नगर निगम के सर्वर रूम को खंगाला और वहां से अहम हार्ड डिस्क जब्त की है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि इस डेटा का विश्लेषण (Data Analysis) करने पर यह साफ हो जाएगा कि अपर आयुक्त (वित्त) गुणवंत सेवतकर के साथ इस खेल में और कौन-कौन से चेहरे शामिल थे।
यह डिस्क बताएगी कि आखिर किस तरह सिस्टम में सेंध लगाकर फर्जी बिलिंग (Fake Billing) को अंजाम दिया जाता था।
सेंट्रल वर्कशॉप भी जांच के दायरे में
इस घोटाले की आंच अब नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप तक पहुंच गई है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि वर्कशॉप के जरिए भी बड़े पैमाने पर फर्जी बिल पास कराए गए।
इसी कड़ी में रविवार, 15 मार्च की सुबह मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित वर्कशॉप कार्यालय पर छापा मारकर अहम दस्तावेज कब्जे में लिए गए हैं।
लोकायुक्त अब यहां के जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब करने की तैयारी में है।
सॉफ्टवेयर बना भ्रष्टाचार का हथियार
लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के मुताबिक, आरोप है कि SAP सॉफ्टवेयर की मदद ली गई ताकि सिस्टम में ऐसे ई-बिल तैयार किए जा सकें जिनका हकीकत में कोई वजूद ही नहीं था।
बिना किसी वास्तविक काम के, केवल कागजों और डिजिटल एंट्री के जरिए करोड़ों रुपए अपने परिचितों और रिश्तेदारों की फर्मों के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए।
10 साल का काला चिट्ठा हुआ जब्त
शुक्रवार, 14 मार्च की सुबह करीब 10:30 बजे लोकायुक्त की टीम ने एक साथ नगर निगम के तीन प्रमुख ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसमें लिंक रोड-2 स्थित मुख्य कार्यालय, कंप्यूटर शाखा, डाटा सेंटर और फतेहगढ़ स्थित पुराना कार्यालय शामिल है।
टीम ने पिछले 10 साल के दस्तावेज और सर्वर का पूरा डाटा जब्त कर लिया है। जांच का दायरा इतना बड़ा है कि इसमें कई और बड़े अधिकारियों और फर्मों के चेहरे बेनकाब होने की उम्मीद है।
ऐसे हुआ करोड़ों का हेर फेर
जांच में चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप जैसे विभागों के नाम पर वाहनों की मरम्मत और पेंटिंग के फर्जी बिल बनाए गए। मजेदार (या कहें दुखद) बात यह है कि जिन विभागों के नाम पर ये बिल फटे, उनके अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं थी। सिस्टम में ई-बिल जेनरेट हुए और पैसा सीधे ठेकेदारों की जेब में चला गया, जबकि जमीन पर एक ईंट भी नहीं रखी गई थी।
नवंबर 2025 से शुरू हुई जांच, मार्च में दर्ज हुई FIR
नगर निगम में चल रहे इस फर्जीवाड़े की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। महीनों चली गोपनीय जांच और सबूतों को जुटाने के बाद, जब तथ्य सही पाए गए तो 9 मार्च 2026 को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई। कोर्ट से सर्च वारंट मिलते ही शुक्रवार को एक्शन लिया गया।
कमिश्नर की सहमति से हुआ भुगतान- अपर आयुक्त
कार्रवाई के बीच अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लेखा शाखा (Accounts Branch) सीधे बिल पास नहीं करती। उन्होंने तर्क दिया कि बिल संबंधित विभागों से वेरिफिकेशन के बाद आते हैं। फंड की उपलब्धता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त से चर्चा के बाद ही अंतिम भुगतान किया जाता है।
ये खबर भी पढ़िए...
आरकेडीएफ कॉलेज भोपाल पर एक करोड़ का जुर्माना, एनएमसी का एक्शन
भोपाल न्यूज. भोपाल नगर निगम घोटाला: अपर आयुक्त पर FIR, पद से हटाया
भोपाल नगर निगम में लोकायुक्त का छापा, फर्जी बिलों से भुगतान मामले में जांच
MP News: भोपाल में EOW की कार्रवाई : स्कूल की जमीन हड़पने वाले जिशान अली सहित कई पर FIR