बिना पर्यावरण मंजूरी बन रहे आशियाने, निगम के 17 हाउसिंग प्रोजेक्ट पर उठे सवाल

Amresh Kushwaha | Jul 26, 2026, 09:50 IST
भोपाल नगर निगम के 17 हाउसिंग प्रोजेक्ट बिना पर्यावरण मंजूरी
भोपाल नगर निगम के हाउसिंग फॉर ऑल के 18 प्रोजेक्ट में से सिर्फ एक को पर्यावरण मंजूरी मिली है। आरटीआई से खुलासा हुआ कि 10 प्रोजेक्ट के लिए आवेदन तक नहीं किया गया, जबकि 7 आवेदन लंबित हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोपाल नगर निगम के हाउसिंग फॉर ऑल के 18 प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
  • इनमें से सिर्फ एक प्रोजेक्ट को पर्यावरण मंजूरी मिली है।
  • 7 प्रोजेक्ट के आवेदन अभी लंबित पड़े हैं।
  • 10 प्रोजेक्ट के लिए आवेदन तक नहीं किया गया।
  • आरटीआई से यह बड़ा खुलासा सामने आया है।

18 में से सिर्फ 1 मंजूर

भोपाल नगर निगम के हाउसिंग फॉर ऑल स्कीम पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। निगम के कुल 18 प्रोजेक्ट राजधानी में चल रहे हैं। इनमें से सिर्फ राहुल नगर प्रोजेक्ट को ही पर्यावरण मंजूरी मिली है। इसे एनवायरमेंट क्लीयरेंस-ईसी (Environment Clearance) कहा जाता है। बाकी 17 प्रोजेक्ट अभी भी बिना मंजूरी के चल रहे हैं। यह जानकारी आरटीआई (Right to Information) के जरिए सामने आई है।



सात प्रोजेक्ट के आवेदन फिलहाल लंबित हैं। इनकी मंजूरी की प्रक्रिया अभी चल रही है। वहीं, 10 प्रोजेक्ट के लिए तो आवेदन ही नहीं किया गया। यानी इन प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले नियमों का पालन नहीं हुआ। इससे निगम के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं।



आरटीआई से खुलासा

सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सक्सेना ने यह जानकारी आरटीआई के जरिए निकाली। उन्हें मिले जवाब में कई प्रोजेक्ट के नाम सामने आए। राहुल नगर के अलावा कोकता, मालीखेड़ी और भानपुर प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। इनके साथ गंगा नगर, हिनोतिया आलम, बाग मुगलिया और 12 नंबर बस स्टॉप प्रोजेक्ट भी हैं। इन सभी के लिए ईसी का आवेदन किया गया था।



इनमें से 12 नंबर बस स्टॉप प्रोजेक्ट का आवेदन अभी सबमिट होने की प्रक्रिया में है। बाकी सात आवेदन अभी भी अटके हुए हैं। इनकी मंजूरी कब मिलेगी, यह साफ नहीं है। सबसे चिंता की बात यह है कि 10 प्रोजेक्ट के लिए आवेदन ही नहीं किया गया।



गौर करने वाली बात यह भी है कि राहुल नगर, कोकता और भानपुर प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। इन प्रोजेक्ट में लोग रहने भी लगे हैं। वहीं, इनमें से सिर्फ राहुल नगर को ही पर्यावरण मंजूरी मिली है। बाकी दो प्रोजेक्ट में लोग बिना मंजूरी के रह रहे हैं।



पर्यावरण मंजूरी क्यों जरूरी

नेशनल सेंटर फॉर ह्यूमन सेटलमेंट एंड एनवायरमेंट के डायरेक्टर प्रदीप नंदी ने इस पर अपनी राय दी। वे पर्यावरण मामलों के जानकार हैं। उनके अनुसार पर्यावरण मंजूरी सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं है। यह एक कानूनी और सामाजिक प्रक्रिया है। इसका मकसद निर्माण से प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना है। साथ ही आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होती है।



बिना मंजूरी के खतरे

बड़े प्रोजेक्ट में पानी की जरूरत काफी ज्यादा होती है। बिना पर्यावरणीय मूल्यांकन के भूजल का अंधाधुंध दोहन हो सकता है। इससे आसपास के इलाकों में जलस्तर नीचे गिर सकता है। यह भूजल संकट को और गहरा कर सकता है।



निर्माण के दौरान कई बार पेड़ भी काटे जाते हैं। बिना क्लीयरेंस के यह पता नहीं चलता कि कितने पेड़ कटे। यह भी साफ नहीं होता कि बदले में कितने नए पौधे लगे। इससे पेड़ों की सही निगरानी नहीं हो पाती।



निर्माण के दौरान अक्सर नेचुरल ड्रेनेज बंद या डायवर्ट कर दिया जाता है। इससे इलाके में जलभराव की आशंका बढ़ जाती है। बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।



सही एसटीपी (Sewage Treatment Plant) योजना न होने से भी नुकसान होता है। बिना शोधन का गंदा पानी सीधे नालों में बहाया जाता है। यह पानी जमीन और तालाबों को भी प्रदूषित करता है।



नियमों का पालन न करने पर आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। एनजीटी (National Green Tribunal) जुर्माना लगा सकती है। कई बार प्रोजेक्ट तोड़ने तक के आदेश भी दिए जाते हैं। इससे वहां रहने वाले लोगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।



निर्माण स्थलों पर धूल-मिट्टी और वायु प्रदूषण भी बड़ी समस्या है। सही वेंटीलेशन न होने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है। वहां रहने वाले लोगों को सांस से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं।



निगम अधिकारी का जवाब

नगर निगम के अपर आयुक्त आईएएस तन्मय वशिष्ठ शर्मा ने इस मामले पर सफाई दी। उनके अनुसार प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान यह जानकारी सामने आई। पहले कई प्रोजेक्ट के लिए एनवायरमेंट क्लीयरेंस नहीं ली गई थी। उन्होंने बताया कि इनमें से दो प्रोजेक्ट 20 हजार वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल के हैं। नियमों के अनुसार इतने छोटे प्रोजेक्ट के लिए ईसी की जरूरत नहीं होती। बाकी बचे प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगे से नियमों का पूरा पालन किया जाएगा।



इस पूरे मामले से साफ है कि हाउसिंग फॉर ऑल जैसी बड़ी योजना में भी लापरवाही हुई। जिन लोगों को घर मिले हैं, उनकी सुरक्षा भी जरूरी है। अब देखना होगा कि निगम कितनी जल्दी बाकी प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी लेता है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सीधे तौर पर आम नागरिकों की सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़ी है। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना भी लोकतंत्र की जिम्मेदारी है। जब सरकारी निकाय नियमों का पालन नहीं करते, तो जनता को इसकी जानकारी मिलनी चाहिए।



यह खबर आरटीआई के जरिए मिली सही और सत्यापित जानकारी पर आधारित है। यह सामाजिक जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा देती है। साथ ही यह भूजल संकट और पर्यावरण सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को भी उजागर करती है। यह खबर कानूनी और नैतिक दोनों पैमानों पर सही जानकारी देती है।



FAQ

  1. भोपाल के कितने हाउसिंग फॉर ऑल प्रोजेक्ट बिना पर्यावरण मंजूरी के चल रहे हैं?
    भोपाल नगर निगम के हाउसिंग फॉर ऑल स्कीम के कुल 18 प्रोजेक्ट में से सिर्फ राहुल नगर प्रोजेक्ट को पर्यावरण मंजूरी मिली है। बाकी 17 प्रोजेक्ट में से 7 के आवेदन लंबित हैं और 10 के लिए आवेदन तक नहीं किया गया है। यह जानकारी आरटीआई से सामने आई है।
  2. पर्यावरण मंजूरी यानी एनवायरमेंट क्लीयरेंस क्यों जरूरी होती है?
    विशेषज्ञ प्रदीप नंदी के अनुसार पर्यावरण मंजूरी सिर्फ कागजी प्रक्रिया नहीं है। यह भूजल स्तर, पेड़ों की सुरक्षा, जलभराव और प्रदूषण जैसे खतरों को रोकने के लिए जरूरी होती है। बिना मंजूरी के प्रोजेक्ट में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

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