10 हजार के लालच में मजदूर बना 158 करोड़ का मालिक, आयकर नोटिस से उड़े होश
Amresh Kushwaha | Jul 25, 2026, 14:15 IST
झाबुआ का मजदूर बना 158 करोड़ का मालिक
थांदला के मजदूर परमेश डामोर के दस्तावेजों से कथित फर्जी कंपनी बनाई गई। कंपनी में 158 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। आयकर नोटिस आने पर मामला खुला है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- थांदला के मजदूर परमेश डामोर के नाम पर फर्जी कंपनी बनी।
- रिश्तेदार ने 10 हजार रुपए महीने का झांसा देकर दस्तावेज लिए।
- मुंबई ले जाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए और सिम भी रखी।
- कंपनी के जरिए 158 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ।
- आयकर विभाग का नोटिस आते ही परमेश के होश उड़ गए।
कैसे फंसा मजदूर
परमेश ने बताया कि उसका एक रिश्तेदार राजेंद्र डोडियार उसे मुंबई ले गया। राजेंद्र राजस्थान के ग्राम खारचिया का रहने वाला है। परमेश का भरोसा जीतने के लिए उसे हर महीने 10 हजार रुपए देने का लालच दिया गया। एक गरीब मजदूर के लिए यह रकम बड़ी थी, इसलिए उसने भरोसा कर लिया।
मुंबई ले जाकर लिए दस्तावेज
इन्हीं दस्तावेजों के सहारे परमेश के नाम पर एक कंपनी खड़ी कर दी गई। परमेश को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उसके नाम पर कोई कारोबार चल रहा है। उसे सिर्फ इतना बताया गया था कि उसे हर महीने पैसे मिलते रहेंगे।
158 करोड़ का खेल
यह पूरा मामला तब खुला जब आयकर विभाग की तरफ से परमेश के नाम नोटिस भेजा गया। नोटिस में 158 करोड़ रुपए के लेनदेन का जिक्र था। नोटिस मिलते ही परमेश के होश उड़ गए। उसे समझ ही नहीं आया कि आखिर यह मामला क्या है।
सिर्फ 5 हजार मिले
परमेश का कहना है कि उसे शुरू से ही अंधेरे में रखा गया। उसे न तो कंपनी की जानकारी दी गई और न ही लेनदेन के बारे में कुछ बताया गया। जब आयकर नोटिस आया, तब जाकर उसे पूरे मामले की गंभीरता समझ आई।
अब क्या कर रहा मजदूर
परमेश जैसे मामले आम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी हैं। दस्तावेजों और आधार कार्ड की जानकारी किसी को भी आसानी से नहीं देनी चाहिए। खासकर अनजान लोगों या दूर के रिश्तेदारों की बातों में आकर हस्ताक्षर करना खतरनाक हो सकता है। सिम कार्ड और बैंक खाते जैसी चीजें अपने नाम पर किसी और को चलाने देना भी जोखिम भरा है। ऐसे मामलों में पहचान की चोरी कर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया जाता है।
शिकायत के आधार पर मामले की जांच होगी
गांव के कई लोगों का कहना है कि परमेश बहुत सीधा-सादा इंसान है। उन्हें भी यकीन नहीं हो रहा कि उसके नाम पर इतनी बड़ी रकम का लेनदेन हुआ है। परमेश के परिवार वालों का कहना है कि वे शुरू से ही तनाव में हैं। आयकर नोटिस आने के बाद से परिवार की नींद उड़ गई है।
उन्हें डर है कि कहीं इस फर्जीवाड़े का खामियाजा उन्हें ही न भुगतना पड़े। परमेश ने साफ कहा है कि वह हर जांच में सहयोग करने को तैयार है। उसका कहना है कि वह सिर्फ यही चाहता है कि असली गुनहगार पकड़े जाएं।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर लोगों को सतर्क करती है कि अपने दस्तावेज किसी के साथ साझा न करें। पीड़ित को न्याय मिलना और असली दोषियों की पहचान होना जरूरी है। यह मामला वित्तीय अपराध और पहचान की चोरी रोकने के लिए भी सबक है। इसलिए यह खबर हर आम नागरिक के लिए जागरूकता की दृष्टि से जरूरी है।
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