भोपाल नगर निगम घोटाला: अपर आयुक्त पर FIR, पद से हटाया
News In Short
- भोपाल नगर निगम में SAP सॉफ्टवेयर से फर्जी ई-बिल बनाए गए।
- बिना काम कराए रिश्तेदारों की फर्मों को करोड़ों का भुगतान किया गया।
- लोकायुक्त ने 9 मार्च 2026 को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर पर FIR दर्ज की।
- 13 मार्च को लोकायुक्त ने निगम के पांच दफ्तरों में एक साथ छापे मारे।
- सेवतकर से वित्त विभाग का प्रभार छीनकर मुकेश शर्मा को सौंप दिया गया।
News In Detail
भोपाल नगर निगम में बड़ा घोटाला
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बड़ा मामला सामने आया है। नगर निगम में फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है। यह घोटाला पिछले 10 साल से चल रहा था।
लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर ने बताया कि नवंबर 2025 में शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया था कि सॉफ्टवेयर से फर्जी बिल बनाए जा रहे हैं। जांच में यह बात सच निकली।
FIR कब और किस पर दर्ज हुई?
9 मार्च 2026 को बड़ी कार्रवाई हुई थी। लोकायुक्त ने अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर पर FIR दर्ज की थी। उन पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगे। इसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट लिया गया। फिर 13 मार्च को छापेमारी की गई।
एक साथ पांच जगह छापे मारे
लोकायुक्त की टीम सुबह करीब 10:30 बजे पहुंची। उन्होंने एक साथ पांच जगह कार्रवाई की। इनमें लेखा शाखा, कंप्यूटर शाखा और डेटा सेंटर शामिल थे। लिंक रोड-2 का मुख्य कार्यालय और फतेहगढ़ का पुराना दफ्तर भी खंगाला गया। करीब 10 साल का सर्वर डेटा जब्त किया गया।
SAP सॉफ्टवेयर से कैसे हुई धोखाधड़ी?
आरोप है कि SAP सॉफ्टवेयर का गलत इस्तेमाल किया गया। इससे फर्जी ई-बिल तैयार किए गए। बिना काम कराए भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई।
जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप के नाम पर काम दिखाए गए। असल में ये काम हुए ही नहीं थे। पैसे परिचितों और रिश्तेदारों की फर्मों में भेजे गए।
10 साल से चल रहा था यह खेल
जांच में पता चला कि यह घोटाला बहुत पुराना है। यह किसी एक कार्यकाल की बात नहीं है। पिछले एक दशक से यह सिलसिला चल रहा था।
लोकायुक्त ने जब्त डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू की है। जांच के बाद और भी नाम सामने आ सकते हैं।
आरोपी का क्या कहना है?
सेवतकर ने खुद को अकेला दोषी मानने से इनकार किया। उनका कहना है कि बिल पहले संबंधित विभागों से पास होकर आते हैं। भुगतान आयुक्त से चर्चा के बाद ही होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में निगम आयुक्त भी जिम्मेदार हैं। यानी जांच का दायरा और बड़ा हो सकता है।
अब मुकेश शर्मा संभालेंगे वित्त
FIR के बाद नगर निगम ने तुरंत कदम उठाया। सेवतकर से वित्त विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया। अब यह जिम्मेदारी अपर आयुक्त मुकेश शर्मा को दी गई है।
नगर निगम बजट पेश होने से ठीक पहले यह फेरबदल हुआ है। इससे यह मामला और भी गंभीर हो गया है।
आगे क्या होगा?
लोकायुक्त की टीम डिजिटल डेटा की तकनीकी जांच कर रही है। SAP सॉफ्टवेयर की हार्ड डिस्क भी जांच में है। इस जांच से और भी कर्मचारियों और फर्मों के नाम सामने आ सकते हैं।
ठेकेदारों, इंजीनियरों और वित्त शाखा के कर्मचारियों पर भी नजर है। यह घोटाला जितना बड़ा दिख रहा है, आने वाले दिनों में और भी बड़ा हो सकता है।
FAQ
- भोपाल नगर निगम घोटाले में FIR किस पर और कब दर्ज हुई?
लोकायुक्त ने 9 मार्च 2026 को अपर आयुक्त (वित्त) गुणवंत सेवतकर के खिलाफ FIR दर्ज की। उन पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप हैं। यह कार्रवाई नवंबर 2025 में मिली शिकायत के बाद प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर की गई। - भोपाल नगर निगम में फर्जी बिल घोटाला कैसे हुआ?
SAP सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी ई-बिल तैयार किए गए। जलकार्य, सामान्य प्रशासन और वर्कशॉप के नाम पर काम दिखाए गए, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। इसके बावजूद करोड़ों रुपये आरोपी के परिचितों और रिश्तेदारों की फर्मों के खातों में भेजे गए। - भोपाल नगर निगम घोटाले में लोकायुक्त ने क्या जब्त किया?
13 मार्च 2026 को हुई छापेमारी में लोकायुक्त ने पिछले 10 साल का सर्वर डेटा जब्त किया। SAP सॉफ्टवेयर से जुड़ी हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड भी कब्जे में लिए गए। लेखा शाखा, कंप्यूटर शाखा, डेटा सेंटर और दो कार्यालयों में एक साथ छापे मारे गए।
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