ब्यूटी पार्लर से कोचिंग तक जांच के दायरे में, क्या बंद होंगी भोपाल के घरों में चल रही दुकानें?

Sourabh Bhatnagar | Aug 08, 2026, 12:50 IST
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भोपाल में करीब एक लाख रिहायशी प्रॉपर्टी पर सीलिंग का खतरा है, जहां पार्लर, दुकान या कोचिंग जैसे कारोबार चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर निगम बड़ा सर्वे शुरू कर रहा है।

घर-घर पहुंचेगा निगम का सर्वे



भोपाल में रिहायशी मकानों से चल रहे कारोबार पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। शहर में करीब 1 लाख प्रॉपर्टी में घर का कमर्शियल इस्तेमाल हो रहा है। इनमें ब्यूटी पार्लर, किराना दुकान, कोचिंग सेंटर, बुटीक और क्लिनिक तक शामिल हैं।



भोपाल नगर निगम अब ऐसे सभी मकानों का बड़ा सर्वे कराने जा रहा है। जांच में नियम टूटते मिलने पर मौके पर ही नोटिस दिया जाएगा। कार्रवाई नहीं करने वाली प्रॉपर्टी को सील तक किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है।



पूरे शहर में होगा सर्वे

नगर निगम को 15 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट देनी है। इसके लिए भोपाल को 21 जोन में बांटा गया है।



हर जोन के लिए अलग सर्वे दल बनाए गए हैं। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने सर्वे टीमों का गठन कर दिया है। ये टीमें गली-मोहल्लों से लेकर बड़ी कॉलोनियों तक जांच करेंगी।



डिप्टी कमिश्नर और कॉलोनी सेल प्रभारी भुवन गुप्ता ने अहम जानकारी दी है। उनके मुताबिक प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट पहले ही कोर्ट में पेश की जा चुकी है। अब पूरे शहर में सर्वे के लिए टीमें तैयार कर दी गई हैं। वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट एरिया में भी सर्वे किया जाएगा। निगम प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड और भवन के उपयोग का मिलान करेगा।



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10 से 15 दिन में सर्वे

निगम ने 10 से 15 दिनों में सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा है। जहां नियम टूटते मिलेंगे, वहां मौके पर ही नोटिस दिया जाएगा।



Bhopal Municipal Corporationका अनुमान है कि करीब 1 लाख नोटिस जारी हो सकते हैं। निगम के रिकॉर्ड में फिलहाल करीब 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां पंजीकृत हैं। इसके अलावा हजारों ऐसे मकान हैं, जहां बिना अनुमति व्यवसाय चल रहा है। इन मकानों का व्यावसायिक कर भी जमा नहीं किया जा रहा है।



सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

5 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कार्रवाई जारी रखने के साफ निर्देश दिए।



साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court) से मिले सभी स्टे आदेश रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा कि कोई भी दूसरी जांच कार्रवाई में बाधा नहीं बन सकती। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष पर नाराजगी भी जताई।



कोर्ट ने अवैध निर्माण के मामलों में सख्ती से कानून लागू करने को कहा। इसके तुरंत बाद निगम ने शहर में व्यापक सर्वे की तैयारी शुरू कर दी।



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दो चरणों में होगी कार्रवाई

पहले चरण में अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां और रोहित नगर को शामिल किया गया। यहां 429 व्यावसायिक प्रॉपर्टियों को नोटिस दिए जा चुके हैं।



दूसरे चरण में बैरागढ़, कोलार, चुनाभट्टी, इंद्रपुरी, अशोका गार्डन और कोहेफिजा शामिल किए गए। इन इलाकों में 1250 से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब अगले चरण में पूरे भोपाल में यह कार्रवाई फैलाई जाएगी।



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सर्वे में तीन अहम पहलुओं की जांच होगी

पहला, रिहायशी भवन में व्यावसायिक गतिविधि हो रही है या नहीं।



दूसरा, भवन निर्माण की वैध अनुमति ली गई है या नहीं। तीसरा, अनुमति होने पर उपयोग स्वीकृत नियमों के मुताबिक हो रहा है या नहीं।



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सीलिंग तय, पर राहत की उम्मीद

जानकारों का कहना है कि सर्वे के बाद सीलिंग तय मानी जा रही है। हालांकि तीन कदम उठाने पर व्यापारियों को राहत भी मिल सकती है।



पहला सुझाव है कि छोटे कारोबार जैसे पार्लर और किराना दुकान को छूट मिले। दूसरा सुझाव प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू करने का है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव अजय देवनानी ने इस पर अपनी राय रखी। उनका कहना है कि गुजरात की बड़ी सड़कों पर पहले से यह व्यवस्था है। उनके मुताबिक भोपाल में भी ऐसी ही नीति लागू होनी चाहिए।



तीसरा सुझाव है कि भोपाल का मास्टर प्लान जल्द से जल्द लागू हो। कांग्रेस विधायक भी लगातार यही मांग सरकार के सामने रख रहे हैं।



भोपाल मास्टर प्लान न होने का असर

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने इस पूरे मामले पर बयान दिया है। उनका कहना है कि भोपाल का विकास बिना मास्टर प्लान के हो रहा है।



उनके मुताबिक पिछले 20 साल से नया मास्टर प्लान लागू ही नहीं हुआ। उनका कहना है कि मास्टर प्लान होता तो यह हालात नहीं बनते। उन्होंने सरकार से तुरंत मास्टर प्लान लाने की मांग की है।



भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने भी अहम जानकारी दी। उनके मुताबिक भोपाल का आखिरी मास्टर प्लान साल 2005 में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद से शहर में कोई नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। इस वजह से कई इलाकों में कमर्शियल भूखंडों की भारी कमी है। यही वजह है कि हजारों व्यापारी वर्षों से घरों से कारोबार चला रहे हैं।



सरकार को मिलता है राजस्व

इन इलाकों में अस्पताल, बैंक, क्लीनिक और शोरूम वर्षों से चल रहे हैं। ये संस्थान नागरिकों को जरूरी सेवाएं भी लगातार दे रहे हैं।



सभी व्यापारी निगम को व्यावसायिक दर से संपत्ति कर चुका रहे हैं। वे बिजली कंपनी को भी कमर्शियल दर से शुल्क भर रहे हैं। इससे सरकार को हर साल करोड़ों रुपए का राजस्व मिल रहा है।



अजय देवनानी के मुताबिक इसी वजह से मिक्स लैंड यूज नीति जरूरी है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स भी लगातार व्यापारियों के समर्थन में खड़ा है।



5 लाख रोजगार पर खतरा

इन्हें बंद करने पर करीब 5 लाख लोगों का रोजगार छिन सकता है। यह आंकड़ा इस मामले को और भी गंभीर बना देता है।



रिकॉर्ड के मुताबिक नर्मदापुरम रोड पर करीब 2500 कमर्शियल प्रॉपर्टी (भोपाल प्रॉपर्टी न्यूज) दर्ज हैं। कोलार रोड पर भी लगभग 2000 कमर्शियल प्रॉपर्टी मौजूद हैं। नए मास्टर प्लान में प्रमुख सड़कों के लिए अलग नियम बनाए जा सकते हैं।



18 मीटर से चौड़ी सड़कों पर शर्तों के साथ कमर्शियल गतिविधि की मंजूरी मिलेगी। इसके लिए पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं की शर्तें जरूरी होंगी। इससे नर्मदापुरम रोड और कोलार रोड जैसे बाजारों को राहत मिल सकती है। फिलहाल पूरे शहर की नजर निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख इस मामले में अहम रहेगा।



FAQ

  1. सवाल 1: भोपाल में कितनी प्रॉपर्टी पर सीलिंग का खतरा है?
    जवाब: भोपाल नगर निगम के शुरुआती आकलन के मुताबिक शहर में करीब 1 लाख ऐसी प्रॉपर्टी हैं, जहां रिहायशी मकानों का व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है। इनमें ब्यूटी पार्लर, किराना दुकान, कोचिंग सेंटर, बुटीक और क्लिनिक जैसी गतिविधियां शामिल हैं। निगम का अनुमान है कि इनमें से करीब 1 लाख को नोटिस जारी किए जा सकते हैं।
  2. सवाल 2: सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल में प्रॉपर्टी सीलिंग मामले में क्या आदेश दिया है?
    जवाब: 5 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी स्टे आदेश रद्द कर दिए गए। कोर्ट ने यह भी कहा कि कोई भी दूसरी जांच प्रक्रिया इस कार्रवाई में बाधा नहीं बन सकती।
  3. सवाल 3: क्या भोपाल के व्यापारियों को राहत मिलने की कोई उम्मीद है?
    जवाब: जानकारों के मुताबिक अगर सरकार छोटे कारोबारियों को छूट दे, प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज नीति लागू करे और भोपाल का नया मास्टर प्लान जल्द लाए, तो व्यापारियों को राहत मिल सकती है। हालांकि सर्वे और कोर्ट रिपोर्ट के बाद सीलिंग की कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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