भोपाल पटवारी रिश्वत केस में पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल पर मंजूरी, लोकायुक्त 295 मामले कब निपटेंगे?

Ramanand Tiwari | Oct 07, 2026, 23:59 IST
पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल की फाइल को केस चलाने की मंजूरी मिल गई है।
पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मिल गई है। उन पर आठ हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। इस फैसले से दूसरी लंबित फाइलों पर सवाल उठता है। लोकायुक्त के 295 मामलों में जून तक मंजूरी नहीं मिली थी। अब सवाल है कि इन प्रस्तावों पर निर्णय कब होगा?

पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल पर क्या आरोप?

₹8 हजार की कथित रिश्वत के आरोपी पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल की फाइल को केस चलाने की मंजूरी मिल गई। लेकिन इस एक मंजूरी ने लोकायुक्त की सैकड़ों दूसरी फाइलों का बड़ा सवाल सामने ला दिया है। 21 जून 2026 तक 1,302 मामलों में अभियोजन के प्रस्ताव भेजे गए थे। वहीं 295 मामलों में स्वीकृति नहीं मिली थी। यानी असली मुद्दा अब एक पटवारी नहीं, मंजूरी की रफ्तार है।



एक केस से बड़ी कहानी क्यों निकल रही है?

कोलार क्षेत्र में पदस्थ रहे पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल (Manglesh Khandelwal) पर मकान के कथित फर्जी नामांतरण और लीज रिन्यू के एवज में ₹8 हजार रिश्वत लेने का आरोप है। विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त, भोपाल ने उन्हें कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था।



मामले के रिकॉर्ड और एसडीएम स्तर की जांच रिपोर्ट के बाद भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ( Priyank Mishra)ने केस चलाने की स्वीकृति दे दी। जांच रिपोर्ट में शासकीय दायित्वों में कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार संबंधी कृत्य में प्रथम दृष्टया संलिप्तता का उल्लेख बताया गया है।



यहां यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि रिश्वत लेने का आरोप अभी न्यायिक परीक्षण का विषय है। अभियोजन स्वीकृति दोषसिद्धि नहीं होती, बल्कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा मुकदमा आगे बढ़ाने की वैधानिक अनुमति है।



295 फाइलों का फैसला कब?

इस एक प्रकरण की मंजूरी से ज्यादा महत्वपूर्ण आंकड़ा उन मामलों का है, जिनमें लोकायुक्त अपनी विवेचना पूरी कर चुका है। लेकिन अभियोजन की प्रक्रिया स्वीकृति के स्तर पर लंबित रही। 21 जून 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2020 से लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना ने 1,318 मामलों की विवेचना पूरी की थी।



इनमें 1,302 मामलों में अभियोजन स्वीकृति के प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारियों को भेजे गए। उपलब्ध आंकड़ों में 985 मामलों को स्वीकृति मिलने और 295 मामलों में मंजूरी लंबित होने की जानकारी सामने आई। यही आंकड़ा इस खबर का बड़ा सवाल बनता है। जब जांच एजेंसी अपना काम पूरा कर प्रस्ताव भेज चुकी है, तो अभियोजन पर अंतिम प्रशासनिक फैसला कितनी जल्दी होना चाहिए?



विभागों में भी लंबित फाइलों का दबाव

विभागवार आंकड़े तस्वीर को और स्पष्ट करते हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के 36 मामले अभियोजन स्वीकृति के लिए लंबित बताए गए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास के 15, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के 12, सामान्य प्रशासन विभाग के 11 और लोक निर्माण विभाग के 10 मामले भी इस सूची में थे।



राजस्व विभाग के छह और जल संसाधन विभाग के पांच मामलों में भी स्वीकृति का इंतजार बताया गया था। इन आंकड़ों का अर्थ किसी आरोपी की दोषसिद्धि नहीं है। ये केवल उन प्रकरणों की प्रशासनिक स्थिति बताते हैं जिनमें अभियोजन की अनुमति का प्रश्न लंबित था।



फरवरी में 134, जून तक 295 आंकड़े क्यों अलग?

यहां दो आंकड़ों को मिलाकर देखना गलत होगा। फरवरी 2026 में विधानसभा में मध्य प्रदेश सरकार ने बताया था कि वर्ष 2022-23 से उस समय तक लोकायुक्त संगठन में 1,884 शिकायतें और विशेष पुलिस स्थापना में 1,063 आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए। उसी जवाब में शिकायत एवं जांच शाखा के 1,291 और तकनीकी शाखा के 88, यानी कुल 1,379 मामले जांचाधीन बताए गए थे। उस समय 1,063 आपराधिक प्रकरणों में 393 की विवेचना पूरी हो चुकी थी और 134 मामले अभियोजन स्वीकृति में लंबित थे।



इसके विपरीत 295 का आंकड़ा 1 जनवरी 2020 से 21 जून 2026 तक की व्यापक अवधि से संबंधित है। इसलिए दोनों आंकड़े अलग अवधि और डेटा-सेट की स्थिति बताते हैं।



भ्रष्टाचार की जांच का आखिरी दरवाजा

लोकायुक्त द्वारा आरोपी को पकड़ना या विवेचना पूरी करना पूरी प्रक्रिया का अंत नहीं है। जहां कानून के तहत अभियोजन स्वीकृति आवश्यक होती है, वहां सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद ही आगे की न्यायिक कार्रवाई का रास्ता खुलता है।



इसीलिए पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल का मामला केवल एक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की खबर नहीं रह जाता। यह उस प्रशासनिक चरण की तरफ ध्यान खींचता है जहां जांच पूरी होने के बाद भी फाइल को अगले कानूनी पड़ाव तक पहुंचने के लिए अनुमति चाहिए।



अभियोजन स्वीकृति में लंबित मामलों की बड़ी संख्या।

किसी व्यक्ति को पहले से भ्रष्ट घोषित करना नहीं, बल्कि जांच पूरी होने के बाद निर्णय की प्रतीक्षा है। 295 मामलों का आंकड़ा बताता है कि भ्रष्टाचार विरोधी व्यवस्था की प्रभावशीलता केवल ट्रैप और जांच से नहीं, समय पर अभियोजन संबंधी निर्णय से भी मापी जानी चाहिए। भोपाल में एक पटवारी की फाइल आगे बढ़ गई। अब बड़ा प्रशासनिक सवाल उन सैकड़ों फाइलों का है जांच पूरी है तो अभियोजन पर फैसला कब?

Tags:
  • पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल
  • Patwari Manglesh Khandelwal
  • भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा
  • मध्य प्रदेश सरकार
  • भोपाल पटवारी रिश्वत
  • विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त
  • 295 फाइलों का फैसला कब?
  • लोक निर्माण विभाग
  • सामान्य प्रशासन विभाग