भोपाल में पटवारियों का रसूख 24 घंटे में पलटा तबादला आदेश

Anjali Dwivedi | Jun 19, 2026, 12:46 IST
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भोपाल में 15 जून को 46 पटवारियों का तबादला हुआ। अगले ही दिन रात को संशोधित आदेश में 24 नाम हटा दिए गए। अब प्रशासन पर सिफारिश और राजनीतिक दबाव के आरोप लग रहे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भोपाल कलेक्टर कार्यालय ने 15 जून को 46 पटवारियों का तबादला किया।
  • अगले ही दिन रात को संशोधित सूची आई जिसमें 24 नाम हटा दिए गए।
  • राहत पाने वाले अधिकांश पटवारी हुजूर और कोलार तहसील के थे।
  • कुछ ऐसे पटवारियों को भी राहत मिली जो मीडिया स्टिंग में सामने आ चुके थे।
  • प्रशासनिक गलियारों में सिफारिश और राजनीतिक दखल की चर्चा तेज है।

भोपाल पटवारी तबादला विवाद क्या है?

पटवारी कोई छोटा किरदार नहीं होता है। जमीन के रिकॉर्ड से लेकर नामांतरण तक, हर काम उनके दफ्तर से होकर गुजरता है। इसीलिए जब कलेक्टर कार्यालय ने 15 जून को 46 पटवारियों की तबादला सूची जारी की, तो कई लोगों ने राहत की सांस ली। इन पटवारियों पर सालों से एक ही तहसील में जमे रहने का आरोप था। लेकिन यह राहत ज्यादा देर नहीं टिकी। अगले ही दिन देर रात एक संशोधित सूची आई। उसमें 46 में से 24 नाम गायब थे। यानी आधे से ज्यादा पटवारियों का तबादला रद्द हो गया।



Bhopal Patwari Transfer


24 घंटे में क्या बदला?

पहली सूची में वे पटवारी शामिल थे जो कई सालों से हुजूर और कोलार तहसील में पदस्थ थे। कुछ तो अपनी गृह तहसील में भी तैनात बताए गए थे, जो नियमों के खिलाफ माना जाता है।



रात को जो संशोधित सूची आई, उसमें केवल 30 नाम बचे, बाकी 24 पटवारियों को प्रभावी रूप से राहत मिल गई। सूत्रों के मुताबिक प्रभावशाली सिफारिशों और राजनीतिक संपर्कों के जरिए यह बदलाव हुआ है।



तबादले वाले 25 पटवारियों की पूरी सूची

पटवारी का नामवर्तमान पदस्थापनाट्रांसफर हुआ थाकब से पदस्थ
सदाशिव गौंडहुजूरबैरसिया2015
किशोर सिंह दांगीइमलिया, हुजूरकोलार2015
नरेन्द्र रैकवारमुगालिया छाप, हुजूरबैरसिया2015
केवल सिंह कीरखजूरी राताताल, हुजूरकोलार2015, 2023
रेनु पटेलहुजूरबैरसिया2016
बुजकिशोर नागरहुजूरकोलार2016
शाइमा खानकुरानाबैरसिया2017
रजनी सिंह राजपूतग्राम नादनी, हुजूरबैरसिया2017
दीप्ती सावलेहुजूरबैरसियामई 2018
प्रियंका अग्रवालनिपनिया जाट, हुजूरबैरसिया2018
ज्योति जोशीबड़झिरी, हुजूरबैरसिया2018
अभिप्रज्ञा चौहानजमुनिया कला, हुजूरबैरसिया2019
अजय सिंह बघेलहुजूरबैरसिया2019
अभिषेक शर्माहल्का रापड़िया, हुजूरहुजूर2019
मुकुल सराठेसमरधा, कोलारहुजूर2019
दीक्षा शर्माछान, कोलारबैरसिया2019
संदीप शर्मासेमरी कलां, कोलारबैरसिया2019
प्रियंका सिंहहुजूरकोलार2020
सौरभ सोलंकीहुजूरकोलार2020
प्रदीप कुमार पटेलकोलूखेड़ी, हुजूरकोलार2020
पूजा ठाकुरहुजूरबैरसिया2021
प्रियंका दुबेपिपलिया जाहिरपीर, हुजूरबैरसिया2021
निधि नेमापुरा छिंदवाड़ा, हुजूरबैरसिया2021
भंवर सोलंकीरातीबड़, हुजूरबैरसिया2022
ओमप्रकाश मालवीयबैरसियाकोलारउपलब्ध नहीं

स्टिंग वाले पटवारी भी बचे

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि जिन पटवारियों को राहत मिली है। उनमें कुछ के नाम पूर्व में हुए मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में भी सामने आ चुके हैं। निधि नेमा और किशोर सिंह दांगी का नाम उस स्टिंग से जोड़ा जाता है। इन दोनों को भी संशोधित आदेश में राहत मिल गई। इससे आरोपों की धार और तेज हो गई है।



नियम क्या कहता है?

भोपाल जिले में कुल 243 पटवारी पदस्थ हैं। स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) के मुताबिक किसी भी जिले में एक बार में अधिकतम 20 प्रतिशत यानी लगभग 47 कर्मचारियों के ही तबादले किए जा सकते हैं। पहली सूची में 46 तबादले हुए, जो इस सीमा के ठीक नीचे थे। लेकिन बाद में संशोधित आदेश जारी होने से पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठ गए।



राहत पाने वाले कई पटवारी 2015 से 2022 के बीच लगातार एक ही क्षेत्र में तैनात रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें अंतिम सूची से बाहर करना नियमों की अनदेखी माना जा रहा है।



तबादला आदेश जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल

यह विवाद सिर्फ नामों तक सीमित नहीं है। पहला ट्रांसफर ऑर्डर बकायदा कागज पर साइन करके निकाला गया था।लेकिन संशोधित सूची ई-ऑफिस प्रणाली के जरिए आई। इस नए ऑर्डर में कहीं भी साफ-साफ नहीं कहा गया था कि पहला वाला ऑर्डर रद्द कर दिया गया है।



इससे प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। दोनों आदेश अब एक साथ प्रभावी दिख रहे हैं, जिससे यह साफ नहीं है कि किस पटवारी का ट्रांसफर वैध है और किसका नहीं।



सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंच सकता है मामला

सूत्र बताते हैं कि अब यह मामला मध्य प्रदेशसामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंचने की संभावना है। जांच की मांग भी उठ रही है। जानकारों का कहना है कि जब एक आदेश को 24 घंटे में पलट दिया जाए और उसकी वजह स्पष्ट न हो, तो इससे पूरी स्थानांतरण नीति की साख को नुकसान पहुंचता है।



आम नागरिक जब यह देखता है कि सिफारिश और पहुंच के आधार पर आदेश बदलते हैं, तो प्रशासन में उसका भरोसा कमजोर होता है। अभी यह देखना बाकी है कि कलेक्टर कार्यालय इस विवाद पर क्या सफाई देता है और क्या कोई ठोस कार्रवाई होती है।



FAQ

  1. भोपाल पटवारी तबादला विवाद क्या है?
    भोपाल कलेक्टर कार्यालय ने 15 जून 2026 को 46 पटवारियों का तबादला किया था। अगले दिन रात को संशोधित सूची जारी हुई जिसमें 24 नाम हटा दिए गए। सिफारिश और राजनीतिक दबाव के आरोप लग रहे हैं।
  2. कितने पटवारियों को 24 घंटे में राहत मिली?
    46 में से 24 पटवारियों के नाम संशोधित आदेश से हटा दिए गए। इनमें से कुछ पटवारी 2015 से 2022 के बीच लगातार एक ही तहसील में तैनात रहे हैं। कुछ के नाम मीडिया स्टिंग ऑपरेशन से भी जोड़े जाते हैं।

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