24 घंटे डिजिटल अरेस्ट रहे प्रिंसिपल पति और पत्नी, जानें कैसे किया बचाव

Ravi Singh | Nov 18, 2024, 17:30 IST
Bhopal Principal Digital arrested
मध्‍य प्रदेश में भोपाल में एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल और उनकी पत्नी को डिजिटल तरीके से गिरफ्तार कर ठगी करने की कोशिश की गई। जालसाजों ने फारूक के बैंक खाते की जानकारी मांगी, फिर ऐसा हुआ...

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल और उनकी पत्नी को डिजिटल तरीके से गिरफ्तार कर ठगी की कोशिश का मामला सामने आया है। जालसाज ने खुद को कोरियर कंपनी का प्रतिनिधि बताकर प्रिंसिपल को कॉल किया और पार्सल में नशीली दवाएं रखे होने की शिकायत की।



24 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट किया

जब प्रिंसिपल ने कहा कि उन्हें पार्सल के बारे में कोई जानकारी नहीं है तो जालसाज ने उन्हें झांसे में लेकर कहा कि कॉल दिल्ली साइबर क्राइम सेल के अफसरों से कनेक्ट हो जाएगी। इसके बाद फर्जी पुलिस अफसरों ने उन्हें 24 घंटे तक डिजिटल तरीके से गिरफ्तार करके रखा। 59 वर्षीय फारुख खान और उनकी पत्नी मारिया खान अपने परिवार के साथ कोहेफिजा में रहते हैं। फारुख कोहेफिजा स्थित एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल हैं। उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को डीएचएल कोरियर कंपनी का प्रतिनिधि बताया।



गलत जानकारी देकर ठगी से बचे

आरोपियों ने कहा था कि भेजे गए पार्सल में नशीला पदार्थ है। साथ ही फारूक की बात को समझते हुए उन्होंने कहा कि आपके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल किया गया होगा, इसकी शिकायत दिल्ली साइबर सेल में करें और सीधे पुलिस अधिकारियों को फोन करने को कहा। यहां ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर स्काइप पर वीडियो कॉल की और फारूक व उसकी पत्नी को घर से बाहर न निकलने का आदेश दिया। शाम को इन ठगों ने फारूक के बैंक खाते की डिटेल मांगी, लेकिन फारूक ने उन्हें गलत जानकारी दे दी। जिसके चलते ठग बैंक खातों से पैसे नहीं निकाल पाए। उन्होंने रविवार शाम 4 बजे तक ठगी करने का प्रयास किया। जब फारूक को शक हुआ तो उसने शौचालय जाने के बहाने अपनी पत्नी के मोबाइल पर डिजिटल गिरफ्तारी की खबर पढ़ी, जिसके बाद वापस लौटने पर उसने अपना इंटरनेट बंद कर दिया और साइबर क्राइम सेल पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।



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सवधान रहे...

सावधान रहें, कोई भी सरकारी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती, डिजिटल गिरफ्तारी पूरी तरह से धोखाधड़ी है। अनजान नंबर से फोन या वीडियो कॉल पर कोई भी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करें। दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। सरकारी एजेंसियां ​​कभी भी ऑनलाइन जुर्माना तुरंत भरने का दबाव नहीं बनाती हैं। बिना किसी डर के स्थानीय पुलिस स्टेशन, कंट्रोल रूम या साइबर पुलिस से संपर्क करें और उन्हें इस बारे में सूचित करें।



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