अफसरों के बंगले चमकाने में जुटा PWD, बंगलों पर करोड़ों खर्च, कर्मचारियों के घर बेहाल

Sourabh Bhatnagar | Aug 04, 2026, 13:55 IST
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भोपाल के चार इमली में अफसरों के बंगलों पर PWD चार करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। वहीं आम कर्मचारियों के दस हजार घरों पर एक करोड़ रुपए भी नहीं दिए गए। दीवारों में सीलन और छज्जे जर्जर हालत में हैं।

    भोपाल के पॉश इलाके चार इमली में अफसरों के बंगलों की चमक बढ़ाने में PWD कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। बड़े अधिकारियों के घरों की मरम्मत और वाटर प्रूफिंग पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारियों के आवास बदहाली की कहानी कह रहे हैं।



    चार इमली की चमक

    चार इमली में बड़े अफसरों के बंगले हैं। यहां रहने वालों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। पीडब्ल्यूडी ने मरम्मत और वाटर प्रूफिंग के लिए चार करोड़ रुपए का बजट रखा है। बीते एक साल में विभाग इन बंगलों पर दस करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर चुका है। यह रकम आम आवासों पर हुए खर्च से कई गुना ज्यादा है।



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    कर्मचारियों के घर फिर मरम्मत को तरसे

    दूसरी तरफ आम कर्मचारियों के हालात अलग हैं। तुलसी नगर और अंबेडकर नगर में करीब 1100 फ्लैट हैं। इन आवासों पर सिर्फ 30 लाख रुपए ही खर्च किए गए। शहर में करीब दस हजार सरकारी घर ऐसे हैं। इन घरों पर बीते साल एक करोड़ रुपए भी खर्च नहीं हुए। यह आंकड़ा सुविधाओं में साफ भेदभाव दिखाता है।



    दीवारों में सीलन, टूटे छज्जे

    इन आम आवासों में रहने वालों की परेशानी बढ़ती जा रही है। कई घरों की दीवारों में नमी और सीलन आ गई है। बिजली की लाइनों में भी गड़बड़ी की शिकायतें हैं। कई घरों के छज्जे जर्जर हालत में लटके हुए हैं। बारिश में इन घरों में पानी टपकने की समस्या आम है। निवासी लंबे समय से मरम्मत की मांग कर रहे हैं।



    एजेंसी का ठेका भी बंद हुआ

    पहले पीडब्ल्यूडी ने दस हजार आवासों (मध्यप्रदेश में सरकारी आवास) की मरम्मत के लिए एक व्यवस्था बनाई थी। इसके तहत निजी ठेकेदार एजेंसी को सालाना करीब 12 करोड़ रुपए का काम दिया गया था। अब यह व्यवस्था भी बंद कर दी गई है। इससे मरम्मत का काम पूरी तरह ठप पड़ गया है। कई रहवासियों ने मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी संपदा शाखा में आवेदन दे रखे हैं। इसके बावजूद उन आवेदनों पर अब तक सुनवाई नहीं हुई है। आरोप है कि विभाग में सिर्फ खास लोगों के काम को प्राथमिकता मिलती है।



    कहां खर्च होंगे 3.89 करोड़

    एमपी पीडब्ल्यूडी विभाग ने वाटर प्रूफिंग के लिए 3.89 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। डी-16 से डी-30 तक के उपांत टाइप आवासों में 60 लाख रुपए का काम होगा। सेक्शन क्रमांक एक के डी और ई टाइप आवासों में 40 लाख रुपए खर्च होंगे। चार इमली सेक्शन क्रमांक दो के कुछ चुनिंदा ब्लॉक में विशेष मरम्मत पर 90 लाख रुपए लगेंगे।



    इसी सेक्शन के बी टाइप आवासों की मरम्मत पर 85 लाख रुपए खर्च होंगे। सेक्शन क्रमांक तीन के बंगलों की विशेष मरम्मत पर भी 90 लाख रुपए तय हुए हैं। वहीं सेक्शन क्रमांक एक के कुछ बंगलों पर 24 लाख 17 हजार रुपए खर्च होंगे। इन सभी बंगलों में बड़े प्रशासनिक अफसर, मंत्री और नेता रहते हैं।



    विभाग की सफाई

    पीडब्ल्यूडी (pwd department mp) के मुख्य अभियंता पीसी वर्मा ने विभाग का पक्ष रखा है। उनके मुताबिक जहां जरूरत होती है, वहीं मेंटेनेंस कराया जाता है। उन्होंने कहा कि कहीं ज्यादा राशि और कहीं कम खर्च होने जैसी बात सही नहीं है। उनके मुताबिक जिन रहवासियों के आवेदन लंबित हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही यह काम पूरा कराया जाएगा।



    आगे क्या होगा

    इस पूरे मामले ने विभाग के खर्च के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम रहवासियों की मांग है कि उनके घरों की मरम्मत भी जल्द शुरू हो। रुके हुए आवेदनों पर तेजी से फैसला लेने की जरूरत बताई जा रही है। देखना होगा कि पीडब्ल्यूडी आम आवासों के लिए नई एजेंसी कब तय करता है। तब तक हजारों परिवार जर्जर घरों में रहने को मजबूर रहेंगे।



    रहवासियों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। कई सालों से मरम्मत की मांग की जा रही है। इसके बावजूद हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा है। कुछ परिवारों ने खुद अपने खर्च पर छोटी-मोटी मरम्मत करा ली है। लेकिन बड़े स्तर की मरम्मत के लिए उनके पास साधन नहीं हैं। ऐसे में वे पूरी तरह विभाग पर निर्भर हैं।



    स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर भी जवाब नहीं मिलता। कई बार आवेदन जमा करने के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। इससे आम कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कुछ रहवासी संघों ने अब उच्च अधिकारियों से मिलने की योजना बनाई है। वे चाहते हैं कि उनकी समस्या जल्द सुनी जाए। वहीं विभाग के अधिकारी बजट सीमित होने की बात कहते हैं। लेकिन बंगलों पर हो रहे भारी खर्च से यह तर्क कमजोर पड़ता दिख रहा है।



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