सात लाख महिलाएं होंगी निराश! खाते में नहीं आएगी लाड़ली बहना योजना की 39वीं किस्त
Aman Vaishnav | Aug 01, 2026, 08:00 IST
लाड़ली बहना योजना, लाड़ली बहना योजना की 39वीं किश्त
लाड़ली बहना योजना की 39 वीं किस्त आने से पहले सात लाख से ज्यादा महिलाओं के नाम कट गए हैं। अकेले इंदौर जिले में ही हजारों महिलाएं इस योजना से बाहर हुई हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- लाड़ली बहना योजना में ढाई साल में सात लाख से ज्यादा लाख से ज्यादा नाम कटे हैं।
- अब पात्र महिलाओं की संख्या घटकर एक करोड़ 25 लाख रह गई है।
- पहले महिलाओं को 1250 रुपए मिलते थे, अब 1500 रुपए मिल रहे हैं।
- नए पंजीयन बीते तीन सालों से बंद पड़े हैं।
वहीं इस बार लगभग सात लाख से ज्यादा महिलाओं को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने इन महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए हैं।
इसका सीधा मतलब यह है कि अब इनके बैंक खाते में योजना का पैसा नहीं आएगा। बता दें कि सीएम मोहन यादव (cm mohan yadav) ने योजना की 38वीं किस्त 12 जून को जारी की थी।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर इस बार इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम क्यों काटे गए हैं।
किन कारणों से कटे नाम
बता दें कि जब योजना शुरू हुई थी, तब कुल एक करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 आवेदन आए थे। इसके बाद आपत्तियों के आधार पर 2 लाख 18 हजार 858 नाम काटे गए थे। तब संख्या घटकर एक करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। अब यह आंकड़ा एक करोड़ 25 लाख के करीब पहुंच गया है।
इंदौर का हाल सबसे अलग
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा का कहना है कि, तय मापदंडों के तहत पात्र महिलाओं को लगातार लाभ दिया जा रहा है। जो महिलाएं शर्तों से बाहर हो रही हैं, सिर्फ उन्हीं के नाम हटाए जा रहे हैं।
60 साल की उम्र बनी सबसे बड़ी वजह
इसके अलावा जांच में 452 महिलाएं अपात्र पाई गईं। 973 महिलाओं ने खुद लाभ छोड़ा। 763 महिलाओं का निधन हो गया। समग्र आईडी से जुड़ी समस्या के कारण दो हजार 406 नाम हटे। वहीं आधार और समग्र डाटा न मिलने से 903 महिलाओं के नाम कटे।
पिछड़ी जनजातियों की महिलाएं भी योजना से बाहर
d51f2d4d-3ea
विवाद की वजह क्या है
इसी वजह से साल 2017 में जनजातीय कार्य विभाग ने आहार अनुदान योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने पैसा दिया जाता है। शुरुआत में यह राशि 1000 रुपए थी। बाद में इसे बढ़ाकर 1500 रुपए प्रति माह कर दिया गया।
कैसे बनीं अपात्र
इस शर्त के मुताबिक यदि परिवार के किसी भी सदस्य को किसी सरकारी योजना से 1500 रुपए या उससे ज्यादा मिल रहे हैं, तो वह महिला इस योजना के लिए अपात्र होगी।
आहार अनुदान योजना की राशि भी इसी दायरे में आ गई। यही तकनीकी पेंच सहरिया, बैगा और भारिया महिलाओं पर भारी पड़ गया।
मंत्री ने क्या कहा
कौन सी शर्तें लागू नहीं
- पहली शर्त है कि परिवार की सालाना आय दो लाख 50 हजार रुपए से ज्यादा हो।
- दूसरी शर्त में परिवार का कोई सदस्य आयकर देता हो।
- तीसरी शर्त सरकारी नौकरी, निगम या मंडल में काम करने या पेंशन लेने से जुड़ी है।
- चौथी शर्त के तहत परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम या मंडल का सदस्य होना चाहिए।
कितना पैसा बंटा अब तक
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने इस योजना (Ladli bahna yojna) पर 23 हजार 882.81 करोड़ रुपए खर्च करने का बजट रखा है। अक्टूबर 2025 तक हर महीने करीब 1500 करोड़ रुपए ट्रांसफर होते थे। दिसंबर 2025 में यह राशि बढ़कर 1800 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई।
राशि बढ़ी, पर नए नाम नहीं जुड़े
राशि बढ़ने से मौजूदा लाभार्थियों को फायदा तो मिल रहा है। वहीं पेंशन और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं की तरह इसमें नए रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं हुए हैं। इस वजह से हजारों पात्र महिलाएं अब भी इंतजार में हैं।
योजना की शुरुआत कैसे हुई
शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि सुबह चार बजे उन्होंने अपनी पत्नी को जगाकर यह विचार बताया। साल में एक बार पैसा देने से बात नहीं बनेगी, इसलिए हर महीने राशि देने का फैसला लिया गया। यही सोच लाड़ली बहना योजना की नींव बनी।
ये खबरें भी पढ़िए।
लाड़ली बहना योजना: हर महीने घट रहीं लाड़ली बहना, तीन साल से नई एंट्री बंद
लाड़ली बहना को 1500 की जगह 3000, इस मैसेज पर भूलकर भी न करें भरोसा, नहीं तो...
भाजपा विधायक मीना सिंह के बोल-लाड़ली बहना योजना बंद कर दें क्या?
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj
वेदांता ग्रुप को जल्द नया और युवा नेतृत्व मिलेगा: प्रिया अग्रवाल हेब्बर हो सकती हैं उत्तराधिकारी, कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी?
By Arohi Raj
हाईकोर्ट की फटकार से जागा स्वास्थ्य विभाग: सचिव अमित कटारिया पर लगा जुर्माना, लापरवाही में कांकेर CMHO सस्पेंड
By Umeshwari Baghel