सेहत से खिलवाड़... भोपाल मंडल में रेल नीर का पानी असुरक्षित, फिर फेल हुआ सैंपल
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल मंडल के स्टेशनों पर रेल नीर सैंपल जांच में फेल हुआ।
- जुलाई में जांच के दौरान पानी असुरक्षित मिला, बेसन भी फेल।
- जून में भी रेल नीर के 13 सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल हुए थे।
- रोजाना करीब 5 हजार रेल नीर बोतलें भोपाल मंडल के स्टेशनों तक पहुंचती हैं।
- रेलवे पीआरओ ने कहा, दोषी स्टॉल संचालकों पर सख्त कार्रवाई होगी।
भोपाल मंडल के स्टेशनों पर रेल नीर की गुणवत्ता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जुलाई में लिए गए सैंपल की जांच में पानी असुरक्षित मिला। कैली-लैब ने रिपोर्ट में रेलनीर को अनसेफ फूड बताया है। इसी दौरान खुले बेसन का सैंपल भी मानकों पर खरा नहीं उतरा। हालांकि अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने जांच में सही पाए गए।
रेलवे के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग ने जुलाई में यह सैंपल लिए थे। स्टेशनों से खाने पीने की चीजों के साथ पानी के नमूने भी जुटाए गए। 16, 18 और 21 जुलाई को रेल नीर के सैंपल लिए गए। सात जुलाई को खुले बेसन का नमूना भी जांच के लिए भेजा गया। इन सभी सैंपल की जांच केमिकल लैब में कराई गई थी।
रेल नीर के बारे में जानें
रेल नीर आईआरसीटीसी (Indian Railway Catering and Tourism Corporation) का अपना पानी ब्रांड है। यह देशभर के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बेचा जाता है। लाखों यात्री रोज सफर के दौरान यही पानी खरीदकर पीते हैं। खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्री इसी पर भरोसा करते हैं। ऐसे में पानी की गुणवत्ता को लेकर लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता तय मानकों के आधार पर परखी जाती है। पानी या खाने की चीज असुरक्षित हो, तो उसकी बिक्री तुरंत रोकी जानी चाहिए। भोपाल मंडल के मामले में भी यही सवाल उठ रहा है। सैंपल फेल होने के बावजूद स्टॉलों पर सामग्री बिकती रही।
सेहत पर हो सकता असर
दूषित पानी पीने से पेट से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती हैं। इनमें दस्त, उल्टी और पेट दर्द जैसी परेशानियां शामिल हैं। कमजोर पाचन तंत्र वाले यात्रियों और बच्चों को ज्यादा खतरा रहता है। गर्मी के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है। इस मौसम में लोग ज्यादा पानी पीते हैं। यही वजह है कि रेलनीर जैसे भरोसेमंद ब्रांड की जांच जरूरी है। इसकी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
जून में भी थी गड़बड़ी
रेल नीर की गुणवत्ता को लेकर यह पहली शिकायत नहीं है। जून में भी जांच के दौरान रेलनीर के 13 सैंपल फेल हुए थे। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। इससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
नियमों के अनुसार पानी की गुणवत्ता में कमी मिलने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इसमें संबंधित कंपनी के साथ स्टॉल की जवाबदेही भी शामिल है। रेलवे में रेलनीर से जुड़ी व्यावसायिक जिम्मेदारी मंडीदीप डिस्ट्रीब्यूशन की होती है। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित संचालक पर जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में लाइसेंस रद्द करने तक का प्रावधान भी है।
रोज पहुंचती 5000 बोतलें
भोपाल जंक्शन पर मंडीदीप से रोजाना करीब 5 हजार रेल नीर की बोतल पहुंचती है। यह सप्लाई भोपाल मंडल के प्रमुख स्टेशनों तक भेजी जाती है। भोपाल के अलावा रानी कमलापति, होशंगाबाद और इटारसी भी शामिल हैं। विदिशा और गंजबासौदा समेत कई अन्य स्टेशनों पर भी रेल नीर जाता है। यात्रियों की मांग के हिसाब से रोज इसकी आपूर्ति की जाती है।
इतनी बड़ी सप्लाई में पानी का सैंपल फेल होना गंभीर बात है। यह सीधे यात्रियों की सेहत से जुड़ा मामला है। रोजाना हजारों यात्री सफर के दौरान यही पानी खरीदकर पीते हैं। ऐसे में गुणवत्ता में लापरवाही बड़े खतरे को जन्म दे सकती है।
यात्री बोले, रोक लगाएं
कैली-लैब ने जांच रिपोर्ट रेलवे के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेज दी है। यात्रियों का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ सैंपल लेने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। खराब सामग्री की बिक्री और सप्लाई पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। कई यात्रियों ने कहा कि यह उनकी सेहत से जुड़ा सीधा सवाल है।
रेलवे स्टेशन पर खाने पीने के स्टॉल वाणिज्य विभाग की निगरानी में चलते हैं। विभाग के अधिकारी समय समय पर स्टेशन पर लगे स्टॉलों की जांच करते हैं। इसमें खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और तय कीमत देखी जाती है। रेलवे के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। यह भी परखा जाता है।
रेलवे करेगा सख्त कार्रवाई
भोपाल रेल मंडल के पीआरओ (पब्लिक रिलेशन ऑफिसर) अखिल अग्रवाल ने जवाब दिया है। जिन पदार्थों के सैंपल फेल हुए हैं, उनकी जानकारी उन्हें दे दी गई है। इनसे जुड़े स्टॉल संचालकों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि स्टेशनों पर निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
फिलहाल यह जानकारी सिर्फ जांच रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है। दोष सिद्ध होना अभी बाकी है। नियमों के तहत ही अंतिम कार्रवाई तय होगी। रेलवे प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सेहत से कोई समझौता नहीं होगा।
जरूरी FAQ
भोपाल मंडल में रेल नीर सैंपल फेल होने की वजह क्या है?
जुलाई में हुई जांच में रेल नीर पानी के सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच लैब ने रिपोर्ट में इसे अनसेफ फूड बताया है। इससे पहले जून में भी 13 सैंपल फेल हो चुके थे। हालांकि दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।
भोपाल मंडल के किन स्टेशनों पर रेलनीर की सप्लाई होती है?
भोपाल मंडल में मंडीदीप से रोजाना करीब 5 हजार बोतल रेलनीर भेजा जाता है। यह सप्लाई भोपाल, रानी कमलापति, होशंगाबाद, इटारसी, विदिशा और गंजबासौदा स्टेशन तक पहुंचती है।
सैंपल फेल होने पर रेलवे क्या कार्रवाई करेगा?
भोपाल रेल मंडल के पीआरओ अखिल अग्रवाल के अनुसार जिन सैंपल में गड़बड़ी मिली है, उनसे जुड़े स्टॉल संचालकों पर कार्रवाई होगी। नियमों के अनुसार जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है।
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