साइबर ठग निशाने पर रेलकर्मी, OTP-पिन मांगकर कर रहे फ्रॉड, रेलवे ने जारी की एडवाइजरी

Amresh Kushwaha | Mar 30, 2026, 13:57 IST
bhopal railway cyber fraud advisory 1930
पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने साइबर ठगी को लेकर एडवाइजरी जारी की है। ठग खुद को रेलवे अधिकारी बताकर रिटायर कर्मचारियों से OTP और पिन मांग रहे हैं। रेलवे ने कहा है कि ऐसे सभी कॉल फर्जी हैं। शिकायत के लिए 1930 पर कॉल करें।

पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने साइबर ठगी को लेकर अलर्ट जारी किया है। ठग खुद को रेलवे अधिकारी बताकर कर्मचारियों को फोन कर रहे हैं। रिटायर और रिटायरमेंट के करीब कर्मचारी इनके मुख्य निशाने पर हैं। ये लोग OTP (One Time Password), पिन और बैंक खाते की जानकारी मांगते हैं। रेलवे ने साफ कहा है कि उसका कोई अधिकारी फोन पर ऐसी जानकारी नहीं मांगता।



रेलकर्मियों को क्यों निशाना बना रहे ठग

भोपाल में इन दिनों एक नए किस्म की साइबर ठगी सामने आई है। साइबर ठग खुद को पश्चिम मध्य रेलवे (West Central Railway) का अधिकारी बताकर फोन करते हैं। उनका निशाना खासतौर पर वे कर्मचारी हैं जो या तो रिटायर हो चुके हैं या जल्द रिटायर होने वाले हैं। इन लोगों को पेंशन, पीएफ (Provident Fund) या अन्य सेवाओं का लालच देकर या डर दिखाकर फंसाया जाता है।



ये ठग बातों-बातों में बैंक खाता नंबर, एटीएम (Automated Teller Machine) पिन, OTP (One Time Password) और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। एक बार यह जानकारी मिल जाए तो खाते से पैसे उड़ाने में उन्हें देर नहीं लगती।



रेलवे ने खुद क्या कहा?

भोपाल मंडल के रेल प्रशासन ने इस पर सख्त बयान दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि रेलवे का कोई भी अधिकारी फोन पर किसी कर्मचारी या पेंशनर से OTP, पिन या पासवर्ड नहीं मांगता। यदि कोई ऐसा कर रहा है तो वह पूरी तरह फर्जी है और ठगी का प्रयास है। ऐसे किसी भी कॉल पर भरोसा न करें।



रेलवे ने यह एडवाइजरी (Advisory) इसलिए जारी की क्योंकि इस तरह के फर्जी कॉल की संख्या बढ़ रही है। रिटायर कर्मचारी और बुजुर्ग पेंशनर्स अक्सर डिजिटल धोखाधड़ी को लेकर कम जागरूक होते हैं, इसलिए वे आसान शिकार बन जाते हैं।



इन बातों का हमेशा रखें ध्यान

रेलवे ने एडवाइजरी में कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं। किसी भी हालत में OTP, पिन या पासवर्ड किसी को न बताएं, चाहे सामने वाला खुद को कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न बताए। अनजान नंबर से आए किसी भी लिंक पर क्लिक करने से बचें। ऐसे लिंक मोबाइल या बैंक खाते की जानकारी चुराने के लिए बनाए जाते हैं।



यदि कोई संदिग्ध कॉल या मैसेज आए तो खुद से फैसला करने की बजाय संबंधित कार्यालय या अपनी बैंक शाखा में जाकर पुष्टि करें। थोड़ी सी सावधानी बड़े नुकसान से बचा सकती है।



शिकायत कहां करें?

रेलवे ने कर्मचारियों और पेंशनर्स से अपील की है कि वे खुद सतर्क रहें। साथ ही अपने घर के बड़े-बुजुर्गों, परिजनों और सहकर्मियों को भी इस बारे में बताएं।



अगर किसी के साथ साइबर धोखाधड़ी हो या संदेह हो, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन (National Cyber Crime Helpline) नंबर 1930 पर कॉल करें। यह हेल्पलाइन 24 घंटे, सातों दिन उपलब्ध है और यहां शिकायत दर्ज करने से पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।



यह खबर क्यों जरूरी है

साइबर फ्रॉड आज देश की एक बड़ी सामाजिक समस्या बन चुकी है। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को निशाना बनाना खासतौर पर चिंताजनक है क्योंकि ये लोग अपनी जीवनभर की कमाई और पेंशन पर निर्भर होते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को सम्मान और सुरक्षा का अधिकार है।



साइबर ठगी इस अधिकार का सीधा उल्लंघन है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) 2000 के तहत ऐसी धोखाधड़ी दंडनीय अपराध है। रेलवे की यह एडवाइजरी न केवल जागरूकता फैलाती है बल्कि यह याद दिलाती है कि डिजिटल युग में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। यह खबर हर उस परिवार के लिए जरूरी है जिसमें रेलकर्मी या पेंशनर हैं।



FAQ

  1. रेलवे के नाम पर साइबर ठगी कैसे होती है?
    ठग खुद को रेलवे का वरिष्ठ अधिकारी बताकर फोन करते हैं। वे कर्मचारी या पेंशनर को पेंशन, पीएफ या सेवा संबंधी किसी समस्या का डर दिखाते हैं। फिर बातों-बातों में OTP (One Time Password), ATM (Automated Teller Machine) पिन, बैंक खाता नंबर या पासवर्ड मांगते हैं। यह जानकारी मिलते ही वे खाते से पैसे निकाल लेते हैं। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि असली रेलवे अधिकारी फोन पर कभी ऐसी जानकारी नहीं मांगते।
  2. साइबर ठगी होने पर क्या करें और कहां शिकायत करें?
    अगर आपके साथ साइबर धोखाधड़ी हुई है या संदेह है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध है। जितनी जल्दी शिकायत करें, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होती है। इसके अलावा नजदीकी पुलिस थाने में भी साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अपने बैंक को भी तुरंत सूचित करें ताकि खाता सुरक्षित किया जा सके।
  3. फर्जी रेलवे कॉल की पहचान कैसे करें?
    कोई भी असली रेलवे अधिकारी फोन पर OTP, पिन, पासवर्ड या बैंक खाते की जानकारी नहीं मांगता। अगर कोई ऐसा करे तो समझ जाइए कि वह फर्जी है। इसके अलावा अगर कॉल पर जल्दी फैसला करने का दबाव हो, कोई लिंक भेजा जाए या व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाए तो सतर्क हो जाइए। ऐसे किसी भी कॉल पर कुछ भी साझा न करें और सीधे संबंधित रेलवे कार्यालय में जाकर पुष्टि करें।

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