भोपाल में मकान में दुकानों पर नहीं रुकेगी कार्यवाही, HC से भी नहीं मिली राहत
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल में रहवासी मकानों में बिना अनुमति दुकानें चलाने पर कार्रवाई हो रही है।
- नगर निगम ने कई भवनों को मूल स्वरूप में लाने के आदेश दिए हैं।
- एक भवन मालिक ने राहत के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- हाई कोर्ट ने फिलहाल कार्रवाई पर रोक देने से इनकार कर दिया।
- कोर्ट ने कहा कि नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के तय नियमों का पालन करते हुए कार्रवाई करे।
भोपाल में रहवासी मकानों में चल रही अवैध दुकानों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई जारी रहेगी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शनिवार को ऐसे ही एक मामले में तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने साफ कहा कि नगर निगम वैधानिक प्रक्रिया अपनाकर आगे की कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, कार्रवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।
यह आदेश जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की एकलपीठ ने साजिद मोहम्मद और अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त 2026 को होगी।
पहले के आदेश को चुनौती ही नहीं दी गई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नगर निगम ने पुलिस बल मांग लिया है। जबकि भवन तोड़ने का अलग नोटिस नहीं दिया गया। इसलिए कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि 22 अप्रैल 2026 का विस्तृत स्पीकिंग ऑर्डर पहले ही पारित किया जा चुका है। उस आदेश में अवैध निर्माण हटाकर भवन को मूल स्थिति में लाने का निर्देश दिया गया था।
सबसे अहम बात यह रही कि याचिकाकर्ता ने उसी आदेश को कभी चुनौती नहीं दी। मौजूदा याचिका में भी उस आदेश को चुनौती नहीं दी गई। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने माना कि नगर निगम उस आदेश को लागू करने के लिए स्वतंत्र है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि मकान में दुकान परनगर निगम कोई भी कार्रवाई बिना प्रक्रिया अपनाए नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि कार्रवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 'लोगनाथन बनाम स्टेट ऑफ तमिलनाडु' और 'राजेंद्र कुमार बरजातिया' मामलों में तय दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। नगर निगम को इन्हीं नियमों के अनुसार आगे बढ़ना होगा।
स्पीकिंग ऑर्डर में सामने आई पूरी कहानी
नगर निगम के स्पीकिंग ऑर्डर से पूरे विवाद की तस्वीर साफ होती है। यह मामला भोपाल के बरखेड़ी रोड स्थित जवाबित लाइन में सारा गैस एजेंसी के सामने बने मकान क्रमांक 122/3 का है। यह भवन साजिद मोहम्मद के नाम पर है।
नगर निगम के अनुसार भवन का नक्शा 7 मई 2023 को स्वीकृत हुआ था। बाद में जांच में पाया गया कि स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण किया गया। ग्राउंड फ्लोर पर व्यावसायिक दुकानें बना दी गईं और भवन का उपयोग अनुमति से अलग तरीके से होने लगा। निरीक्षण के बाद नगर निगम ने कई बार नोटिस जारी किए। भवन मालिक ने जवाब भी दिया। इसके बाद भी कथित अवैध निर्माण नहीं हटाया गया।
ग्लोबल ऑटो पार्ट्स नाम से चल रही थी दुकान
स्पीकिंग ऑर्डर में यह भी दर्ज है कि रहवासी भवन में नगर निगम की अनुमति के बिना 'ग्लोबल ऑटो पार्ट्स' नाम से दुकान संचालित की जा रही थी।
लोकायुक्त कार्यालय में भी इस संबंध में शिकायत पहुंची थी। शिकायत मिलने के बाद नगर निगम ने पूरे मामले की जांच की। नगर निगम ने अपने अंतिम आदेश में साफ कहा कि सात दिन के भीतर भवन को स्वीकृत नक्शे के अनुसार मूल स्वरूप में लाया जाए। ऐसा नहीं होने पर दुकान सील करने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
भोपाल में तेज हुई अवैध दुकानों पर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद भोपाल में रहवासी मकानों में चल रही अवैध दुकानों के खिलाफ अभियान तेज हुआ है। नगर निगम लगातार ऐसे भवनों की जांच कर रहा है जहां रहवासी अनुमति लेकर व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं। कई स्थानों पर नोटिस जारी हुए हैं। कई मामलों में कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है।
अब हाई कोर्ट के इस आदेश को भी इसी अभियान की अहम कड़ी माना जा रहा है। अदालत ने यह जरूर कहा कि कार्रवाई कानून के मुताबिक होनी चाहिए, लेकिन फिलहाल नगर निगम की कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई।
द सूत्र लगातार उठा रहा है यह मुद्दा
भोपाल में रहवासी मकानों में चल रही अवैध दुकानों का मुद्दा लगातार चर्चा में है। द सूत्र भी इस विषय पर लगातार खबरें प्रकाशित कर रहा है। अभियान के जरिए ऐसे मामलों को सामने लाया जा रहा है।
जहां रहवासी भवनों का उपयोग नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। हाई कोर्ट का ताजा आदेश इस पूरी कार्रवाई को नया कानूनी आधार देता दिखाई दे रहा है।
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