सुप्रीम कोर्ट से केस जीतने वाले अथर्व चतुर्वेदी को डॉक्टर बनने से नहीं रोक सकता अटेंडेंस नियम- HC
Neel Tiwari | Jul 31, 2026, 09:19 IST
एमबीबीएस छात्र अथर्व चतुर्वेदी, जबलपुर का अथर्व चतुर्वेदी
जबलपुर के एमबीबीएस छात्र अथर्व चतुर्वेदी को ई-अटेंडेंस कम होने के कारण परीक्षा से रोका जा रहा था। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राहत देते हुए परीक्षा में शामिल होने, एडमिट कार्ड जारी करने और अतिरिक्त कक्षाएं चलाने के निर्देश दिए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- अथर्व चतुर्वेदी ने अपना प्रवेश पाने के लिए खुद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ा था।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें मार्च 2026 में एमबीबीएस में प्रवेश मिला।
- देर से प्रवेश मिलने के कारण उनकी ई-अटेंडेंस पूरी नहीं हो सकी।
- इसी आधार पर उन्हें प्रथम वर्ष की परीक्षा से रोका जा रहा था।
- हाई कोर्ट ने राहत देते हुए परीक्षा और अतिरिक्त कक्षाओं की अनुमति दे दी।
खुद लड़ी कानूनी लड़ाई, अब फिर आई नई परीक्षा
इस बार विवाद प्रवेश का नहीं, बल्कि ई-अटेंडेंस का था। एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा से पहले उपस्थिति कम होने के आधार पर उन्हें परीक्षा में बैठने से रोका जा रहा था।
ऐसे में अथर्व ने फिर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने उनकी दलीलें सुनने के बाद राहत देते हुए परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी।
पहले प्रवेश के लिए लड़ी लड़ाई
कई कानूनी प्रयासों के बाद आखिरकार शीर्ष अदालत ने 10 फरवरी 2026 को संविधान के अनुच्छेद 142 की शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
इसी आदेश के बाद उन्हें जबलपुर के सुख सागर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश मिला।
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देर से मिला प्रवेश, अब ई-अटेंडेंस बनी परेशानी
वहीं अगस्त 2026 की परीक्षा नजदीक आने पर कॉलेज और संबंधित संस्थाओं ने उपस्थिति का हवाला देते हुए परीक्षा में बैठाने से इनकार कर दिया। इसके बाद अथर्व ने फिर हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
हाई कोर्ट ने कहा, छात्र की कोई गलती नहीं
यह देरी संबंधित संस्थाओं की प्रक्रिया के कारण हुई। ऐसे में केवल उपस्थिति के आधार पर उसे परीक्षा से वंचित करना न्यायसंगत नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि छात्र को बिना गलती के एक और साल गंवाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना का रखा सम्मान
यदि अब उपस्थिति के आधार पर परीक्षा से रोका जाता है, तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत होगा। इसलिए छात्र को परीक्षा का अवसर मिलना चाहिए।
परीक्षा, एडमिट कार्ड और अतिरिक्त कक्षाओं के निर्देश
सुख सागर मेडिकल कॉलेज को अतिरिक्त कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए। अदालत ने कहा कि अथर्व नियमित रूप से इन कक्षाओं में भाग लेंगे और उनका परीक्षा परिणाम भी घोषित किया जाएगा।
कभी चीफ जस्टिस ने कहा था, वकील बन जाओ
इस पर अथर्व ने जवाब दिया था कि उनका सपना डॉक्टर बनने का है। यही सपना उन्हें सुप्रीम कोर्ट तक ले गया और अब उसी सपने को बचाने के लिए उन्हें फिर हाई कोर्ट आना पड़ा।
हार नहीं मानी, दूसरी बार भी मिला न्याय
अब उसी सफर में आई नई बाधा को भी अदालत के जरिए पार किया। यह फैसला बताता है कि जब किसी छात्र की गलती न हो, तब तकनीकी कारण उसके भविष्य पर भारी नहीं पड़ सकते।
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