भोपाल की हरियाली पर फिर खतरा: 500 एकड़ में 60 हजार पेड़ों पर मंडराया संकट; शिवाजी नगर से चार इमली तक री-डेंसिफिकेशन की तैयारी
इसमें शिवाजी नगर, तुलसी नगर, 74 बंगला और चार इमली शामिल हैं। बता दें राज्य स्तरीय साधिकार समिति में इस प्रस्ताव पर फैसला होना है। मंजूरी मिलने पर शहर के बड़े ग्रीन एरिया पर असर पड़ सकता है। इस इलाके में 50 साल से ज्यादा पुराने पेड़ मौजूद हैं। पेड़ों की कटाई से भोपाल की हरियाली को बड़ा नुकसान हो सकता है।
भोपाल का हरियाली से भरा इलाका संकट में
भोपाल के शिवाजी नगर से चार इमली तक लंबे समय से हरियाली बनी हुई है। टीटी नगर के विकास के समय यहां सड़क नेटवर्क तैयार किया गया था। इसमें मेन रोड-1, मेन रोड-2 और मेन रोड-3 शामिल हैं। इन सड़कों के आसपास सरकारी आवास बनाए गए थे।
एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और हबीबगंज का क्षेत्र आसपास के इलाकों को जोड़ता है। यह क्षेत्र न्यू मार्केट और टीटी नगर को भी जोड़ता है। समय के साथ यहां पेड़-पौधे बढ़े और हरियाली विकसित हुई। यहां चिनार पार्क, एकांत पार्क और गुलाब उद्यान जैसे पार्क मौजूद हैं। इस क्षेत्र में करीब 12 पार्क बताए गए हैं। सड़कों और सरकारी आवासों के आसपास बड़ी संख्या में पेड़ हैं। इस वजह से यह शहर के प्रमुख ग्रीन जोन में शामिल है।
पेड़ कटे तो हरियाली लौटने में लगेंगे कई साल
इस इलाके में कई पेड़ 50 साल से ज्यादा पुराने हैं। निर्माण के लिए पेड़ कटे तो हरियाली को नुकसान पहुंचेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे दोबारा विकसित करने में 70 साल लग सकते हैं। भोपाल में पहले भी पेड़ों की कटाई को लेकर विरोध हुआ है। टीटी नगर के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी पेड़ काटे गए थे। उनकी भरपाई नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है।
पेड़ सिर्फ इलाके की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि छाया भी देते हैं। वे शहर के वातावरण को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। बड़ी संख्या में पेड़ हटने से पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।
टाउन प्लानर ने योजना पर उठाए सवाल
टाउन प्लानर शीतल शर्मा ने इस योजना पर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, शहर के मुख्य हिस्से में ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित है। इसकी चौड़ाई 75 मीटर और लंबाई 52 किलोमीटर बताई गई है। ऐसे में शहर के बीच हरियाली खत्म करना कितना सही है?
उनका कहना है कि यहां ऊंची इमारतें बनाने की जरूरत पर विचार होना चाहिए। शहर के बीच हाईराइज बिल्डिंग बनने से दूसरे प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं। इससे रियल एस्टेट मार्केट पर भी असर पड़ने की आशंका है।
एक्सपर्ट्स ने शिवाजी नगर, तुलसी नगर और स्वामी दयानंद नगर की हरियाली बचाने का सुझाव दिया है। उनके मुताबिक, यहां नए निर्माण की जगह पुराने भवन सुधारे जा सकते हैं। इससे हरियाली बचाने में मदद मिल सकती है।
इस क्षेत्र को स्मार्ट सिटी और महाराणा प्रताप नगर के बीच ग्रीन बफर बनाया जा सकता है। इससे शहर के बीच हरियाली बनाए रखने में मदद मिलेगी।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के समय भी हुआ था विरोध
शिवाजी नगर और तुलसी नगर में पेड़ों की कटाई का मुद्दा पहले भी उठा था। साल 2015-16 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पेड़ काटने का प्रस्ताव आया था। इसका लोगों ने भारी विरोध किया था। विरोध के बाद प्रस्ताव रिजेक्ट करना पड़ा था।अब दोबारा ऐसी योजना सामने आने से पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ी है। बड़े पैमाने पर पेड़ कटने से तापमान बढ़ने की आशंका है। इससे हवा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
शिवाजी नगर और तुलसी नगर के क्वार्टर 1966 में बने थे
तुलसी नगर और शिवाजी नगर में सरकारी क्वार्टर साल 1966 में बनाए गए थे। उस समय देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां आकर बसे थे। वे अपने मूल स्थानों से कुछ पौधे भी साथ लाए थे। इसी वजह से यहां अलग-अलग प्रकार के पेड़-पौधे देखने को मिलते हैं। पर्यावरण के लिहाज से यह क्षेत्र भोपाल के लिए महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट के मुताबिक,स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के बाद अब दूसरी जमीन पर भी नजर है। शिवाजी नगर और तुलसी नगर की करीब 350 एकड़ जमीन इसमें शामिल है। वहीं, व्यापक प्रस्ताव में 500 एकड़ क्षेत्र का उल्लेख किया गया है। यह क्षेत्र शिवाजी नगर से चार इमली तक फैला है। अब राज्य स्तरीय साधिकार समिति के फैसले पर नजर रहेगी। प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो विकास और हरियाली में संतुलन बनाना चुनौती होगा।
FAQs
- भोपाल में कितने पेड़ों पर संकट बताया जा रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, शिवाजी नगर से चार इमली तक के करीब 500 एकड़ क्षेत्र में लगभग 60 हजार पेड़ों पर संकट बताया गया है। - पेड़ों की कटाई का विरोध क्यों हो रहा है?
इस इलाके में कई पेड़ 50 साल से ज्यादा पुराने हैं। आशंका है कि पेड़ों की कटाई से शहर की हरियाली, तापमान और हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। - किन इलाकों में री-डेंसिफिकेशन की योजना है?
इस योजना में शिवाजी नगर, तुलसी नगर, 74 बंगला और चार इमली जैसे इलाके शामिल हैं।