दुकान सीलिंग पर फूटा व्यापारियों का गुस्सा, भोपाल बंद और सीएम हाउस घराव की दी चेतावनी
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल में रहवासी इलाकोंमेंदुकानों पर सीलिंग की कार्रवाई शुरू हुईहै।
- नगर निगमअब तक साढ़े सात हजार से ज्यादा नोटिस देचुका है।
- गुस्साए व्यापारियों ने रोशनपुरा चौराहेपर बड़ाप्रदर्शन किया है।
- व्यापारियों ने भोपालबंद और सीएम हाउसघेराव की चेतावनी दी है।
- भोपाल में 2005से मास्टर प्लान लागू नहीं हो पाया है।
भोपाल में दुकानों की सीलिंग को लेकर व्यापारी सड़क पर उतर आए हैं। रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार पर भोपाल नगर निगम लगातार नोटिस भेज रहा है। इससे नाराज व्यापारियों ने मंगलवार, 18 अगस्त को रोशनपुरा चौराहे पर बड़ा प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार को सीधी चेतावनी दे दी है।
व्यापारियों ने रखे तीन विकल्प
10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने सरकार के सामने तीन ऑप्शन रखे हैं। पहला विकल्प है मास्टर प्लान लागू करना। दूसरा विकल्प गुजरात की तरह मिक्स लैंड यूज सिस्टम लागू करना है। तीसरा विकल्प है नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई तुरंत रोकना।
अध्यक्ष आनंद सोनी ने कहा कि यदि सरकार ने इन पर अमल नहीं किया तो भोपाल को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने सड़कें जाम करने और सीएम हाउस के घेराव की भी चेतावनी दी। अध्यक्ष सोनी ने कहा कि व्यापारियों को चैन से सोने दिया जाए और उनके पेट पर लात न मारी जाए।
आनंद सोनी के मुताबिक यदि कार्रवाई जारी रही तो लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान साल 2005 से पेंडिंग पड़ा है। अगर यह समय पर आ जाता तो आज ऐसे हालात नहीं बनते। सोनी का दावा है कि भोपाल में अगर कार्रवाई जारी रही तो करीब 90 फीसदी कारोबार बंद हो जाएगा। इसका सीधा असर आम जनता की जिंदगी पर भी पड़ेगा।
व्यापारियों की आपबीती
हाउसिंग बोर्ड के कारोबारी राहुल जैन ने अपनी परेशानी बताई। उनके मुताबिक नगर निगम के नोटिस लगातार आ रहे हैं। इससे दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। जैन ने कहा कि ज्यादातर दुकानदार पहले से ही कर्ज में डूबे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने ही कमर्शियल बिजली मीटर लगवाए थे। दुकान की रजिस्ट्री भी सरकारी दफ्तर में हुई थी। निगम को हर महीने पूरा टैक्स भी दिया जा रहा है। ऐसे में अचानक यह कार्रवाई समझ से परे है। जैन ने कहा कि अगर दुकान बंद हुई तो बच्चों की स्कूल फीस भरना मुश्किल होगा। उनका कहना है कि परिवार सीधे बेरोजगारी की चपेट में आ जाएगा।
पहली बार सड़क पर उतरीं ब्यूटिशियन
निगम के नोटिस सिर्फ बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं हैं। रहवासी इलाकों में चल रहे ब्यूटी पार्लर और सैलून को भी नोटिस मिले हैं। इसी वजह से पहली बार ब्यूटिशियन भी प्रदर्शन में शामिल हुईं। ब्यूटिशियन नित्या ने बताया कि अगर कमर्शियल गतिविधियां बंद हुईं तो छोटे कारोबार खत्म हो जाएंगे। उनके मुताबिक इससे जुड़े कई लोगों का रोजगार सीधे प्रभावित होगा।
कोर्ट का आदेश और वकील की राय
सीनियर एडवोकेट एहतेशाम कुरैशी ने इस मामले की कानूनी पृष्ठभूमि समझाई। उनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधि को लेकर सख्त आदेश दिए हैं। यह जजमेंट साल 2024 और 2025 में आया था। इसके बाद तमिलनाडु में एक याचिका दायर हुई, जिसमें मध्य प्रदेश भी पार्टी है। कुरैशी के मुताबिक नगर निगम ने खुद इस याचिका में तथ्य पेश किए हैं। शपथ पत्र में साफ लिखा है कि 2005 के बाद भोपाल का मास्टर प्लान नहीं आया।
कुरैशी ने कहा कि मास्टर प्लान लाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। उनके मुताबिक चीफ सेक्रेटरी को हाईकोर्ट में मजबूती से पक्ष रखना चाहिए था। मुख्यमंत्री को भी सही समय पर सलाह दी जानी चाहिए थी। कुरैशी का मानना है कि अगर सरकार का पक्ष मजबूत होता तो यह नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो मौजूदा गतिविधियों को नियमित कर सकती है। इसके लिए मास्टर प्लान या मिक्स लैंड यूज सिस्टम लागू करना होगा।
अब तक कितने नोटिस
नगर निगम ने अब तक शहरभर में साढ़े 7 हजार से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं। इनमें सबसे ज्यादा नोटिस नरेला और गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में दिए गए हैं। निगम के मुताबिक करीब एक हजार नोटिस ऐसे हैं, जिनकी अवधि 3 दिन में खत्म हो रही है।
उपायुक्त भुवन गुप्ता ने बताया कि इसके बाद अगला कदम उठाया जाएगा। हर मामले की गुण-दोष के आधार पर जांच होगी। इसके बाद अंतिम आदेश जारी किया जाएगा। संबंधित दुकानदारों को अंतिम सूचना पत्र भी भेजे जाएंगे। सुनवाई पूरी होने के बाद फाइनल ऑर्डर पास होगा। इसके बाद जरूरत पड़ने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी।
निगम के मुताबिक शहर में 62 हजार से ज्यादा ऐसी प्रॉपर्टी चिन्हित हुई हैं। यहां रहवासी इलाके में कारोबार चल रहा है। पांच अगस्त से पहले तक सिर्फ 1018 नोटिस दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम ने सर्वे का दायरा तेजी से बढ़ाया। पांच से 12 अगस्त के बीच 1163 नए नोटिस जारी हुए। 13 अगस्त को 1135 और 14 अगस्त को 1478 नोटिस और भेजे गए।
किस इलाके में कितने नोटिस
16 अगस्त तक नरेला विधानसभा में सबसे ज्यादा 1470 नोटिस दिए गए। हुजूर विधानसभा में यह संख्या 1032 रही। गोविंदपुरा में 1250 और मध्य विधानसभा में 1093 नोटिस जारी हुए। उत्तर विधानसभा में 371 और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में 652 नोटिस दिए गए। सोमवार तक कुल 6589 नोटिस दिए जा चुके थे। मंगलवार को इसमें 569 नए नोटिस और जुड़ गए।
अर्बन प्लानिंग विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मास्टर प्लान आता तो यह स्थिति नहीं बनती। रहवासी और व्यावसायिक इलाके पहले से अलग चिन्हित हो जाते। अभी अवधपुरी, अयोध्या बायपास, गौतम नगर, अशोका गार्डन और लालघाटी जैसे इलाकों में दहशत है। यहां के कई दुकानदार अब कमर्शियल इलाकों में नई जगह तलाश रहे हैं।
निगम अब मुख्य मार्गों के साथ गलियों में भी सर्वे कर रहा है। नदी-तालाब किनारे, ग्रीन बेल्ट और बफर जोन के भवन प्राथमिकता से जांचे जा रहे हैं। अवैध मैरिज गार्डन को भी नोटिस भेजे जाएंगे।
मास्टर प्लान की अटकी कहानी
वहीं दूसरी और भोपाल का पिछला मास्टर प्लान साल 1995 में लागू हुआ था। नियम के मुताबिक 2005 में नया प्लान आना था। इसमें आबादी और रोजगार के हिसाब से शहर के विस्तार की दिशा तय होनी थी। लेकिन नया प्लान अब तक नहीं आया। इस बीच शहर जरूरत के हिसाब से अपने आप फैलता चला गया।
नर्मदापुरम रोड, भोजपुर रोड, कोलार, नीलबड़-रातीबड़ और रायसेन रोड तक बसाहट बढ़ती गई। कई जगह पहले कॉलोनियां बस गईं। बाद में सड़क, पानी और सीवर जैसी सुविधाएं पहुंचाई गईं। यही अनियोजित विस्तार अब तीसरे भोपाल के रूप में सामने खड़ा है।
देश के दूसरे शहरों से तुलना
देश के बड़े शहरों में मास्टर प्लान समय पर लागू हो चुका है। मुंबई में यह 2021 में लागू हुआ। हैदराबाद में 2013 और कोलकाता में 2006 में मास्टर प्लान आया। बेंगलुरु में सबसे पहले 1985 में ही यह लागू हो गया था। चेन्नई में 2008 और अहमदाबाद में 2013 में प्लान लागू हुआ। पुणे में 2017 और नागपुर में 2016 में मास्टर प्लान आया। दिल्ली एनसीआर में भी 2005 में यह लागू हो चुका है। इन शहरों की तुलना में भोपाल अब भी पुराने प्लान पर ही चल रहा है।
भोपाल के इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट सुयश कुलश्रेष्ठ के मुताबिक मध्य प्रदेश के सभी बड़े शहरों में मास्टर प्लान लागू है। हर शहर की समयावधि अलग-अलग है। लेकिन भोपाल में 2005 के बाद से कोई नया प्लान लागू नहीं हुआ। यही वजह है कि शहर अब भी 21 साल पुराने प्लान के हिसाब से चल रहा है।
कुलश्रेष्ठ बताते हैं कि न्यू मार्केट और पुराने शहर जैसे कुछ इलाकों में मिक्स लैंड यूज सिस्टम पहले से लागू है। लेकिन 10 नंबर मार्केट और रोहित नगर की मुख्य सड़क जैसे इलाकों में यह लागू नहीं है। उनके मुताबिक अगर मास्टर प्लान समय पर आता तो ये इलाके भी मिक्स लैंड यूज के दायरे में आ जाते। पड़ोसी राज्य गुजरात में भी मिक्स लैंड यूज सिस्टम लागू है, लेकिन वहां का मॉडल अलग है। वहां सरकार ने घर के कंपाउंडिंग के जरिए दुकान खोलने की अनुमति दे रखी है। कुलश्रेष्ठ के मुताबिक बाकी राज्यों में भी मास्टर प्लान और मिक्स लैंड यूज जैसा सिस्टम पहले से लागू है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर लाखों छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी से सीधे जुड़ी है। रोजगार का अधिकार संविधान की मूल भावना का हिस्सा है। सरकारी योजना में देरी का असर आम नागरिकों पर पड़ना गंभीर विषय है। मास्टर प्लान जैसे शहरी नियोजन दस्तावेज पारदर्शी प्रशासन के लिए जरूरी हैं। नागरिकों को प्रशासनिक फैसलों की जानकारी रखने का अधिकार है।
FAQ
- भोपाल में दुकानों की सीलिंग की कार्रवाई क्यों हो रही है?
सुप्रीम कोर्ट ने रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधि को लेकर सख्त आदेश दिए हैं। इसके बाद भोपाल नगर निगम ने रहवासी इलाकों में चल रही दुकानों, ब्यूटी पार्लर और अन्य कारोबार पर नोटिस भेजना शुरू कर दिया। अब तक साढ़े 7 हजार से ज्यादा नोटिस जारी हो चुके हैं और आगे सीलिंग की कार्रवाई भी होगी।
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