क्रिकेट स्टेडियम के लिए काटे 700 पेड़, अब लगाने होंगे सात हजार, NGT का सख्त आदेश

Sanjay Dhiman | Sept 15, 2026, 22:44 IST
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भोपाल के नाथू बरखेड़ा नीलबड़ में क्रिकेट स्टेडियम बनाने के लिए काटे गए 700 पेड़ों की भरपाई अब जरूरी होगी। एनजीटी ने 30 सितंबर तक 7000 पौधे लगाने का सख्त आदेश दिया है, वरना अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।

भोपाल के नाथू बरखेड़ा नीलबड़ में बने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को लेकर एक बड़ा फैसला आया है। स्टेडियम बनाते समय करीब 700 पेड़ काटे गए थे। इन पेड़ों की जगह अब तक नए पौधे नहीं लगाए गए थे।



इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी (NGT – National Green Tribunal) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने साफ आदेश दिया है कि 700 पेड़ों के बदले 7000 पौधे लगाए जाएं। यह आदेश केवल 15 दिन में पूरा करना होगा।



समझें क्या है पूरा मामला

भोपाल में क्रिकेट स्टेडियम बनाते समय 700 पेड़ काटे गए थे। इसके बदले पौधरोपण नहीं हुआ था। इस पर एनजीटी में याचिका दायर हुई। एनजीटी ने अब 7000 पौधे लगाने का आदेश दिया है। डेडलाइन 30 सितंबर 2026 तय की गई है।



किसने दायर की थी याचिका

यह मामला नितिन सक्सेना बनाम मप्र रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड(mprdc) व अन्य के नाम से दर्ज हुआ था। आवेदक नितिन सक्सेना ने याचिका में कहा था कि स्टेडियम और सड़क निर्माण के दौरान पेड़ काटे गए। लेकिन उनकी भरपाई नहीं की गई।



इस याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। पीठ ने माना कि पेड़ों की कटाई हुई। पर समय पर पौधरोपण नहीं हुआ।



NGT ने क्या आदेश दिया

एनजीटी की पीठ ने वन विभाग और सामाजिक वानिकी को निर्देश दिए। दोनों विभागों को चालू वर्षा सत्र में ही पौधरोपण पूरा करना होगा। कटे गए हर एक पेड़ के बदले दस पौधे लगाने होंगे। यानी कुल 7000 पौधे लगाना अनिवार्य है।



एनजीटी ने यह भी कहा कि यह काम 30 सितंबर 2026 से पहले पूरा करना होगा। इसके अलावा वन विभाग को एक बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।



100 प्रतिशत पौधे जिंदा रहने की शर्त

एनजीटी ने वन विभाग से कहा है कि सिर्फ पौधे लगाना काफी नहीं है। लगाए गए पौधों की जीवित रहने की दर 100 प्रतिशत रहनी चाहिए। इसके बाद पौधरोपण की तस्वीरों के साथ रिपोर्ट भी कोर्ट में देनी होगी। यह रिपोर्ट अनुपालन और कार्रवाई दोनों को दिखाएगी।



देरी की वजह क्या बताई गई

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से अधिवक्ता प्रशांत एम. हर्णे पेश हुए। वन विभाग की ओर से एसडीओ श्वेता सिंह और प्रीति ने भी अपनी बात रखी। दोनों ने बताया कि बजट आवंटन में देरी हुई थी। साथ ही जमीन भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाई थी।



अब अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि बजट मिल चुका है। पौधरोपण की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। इसी वजह से चालू वर्षा ऋतु में काम शुरू हो सकेगा।



अगली सुनवाई कब होगी

मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता उपस्थित हुए। एनजीटी ने अगली सुनवाई की तारीख 16 अक्टूबर 2026 तय की है। इस दिन राज्य शासन और वन विभाग को अपनी अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी। यह रिपोर्ट बताएगी कि पौधरोपण कितना पूरा हुआ।



यह मामला दिखाता है कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। एनजीटी का यह आदेश आने वाले समय में अन्य निर्माण परियोजनाओं के लिए भी एक नजीर बन सकता है।



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