मध्यप्रदेश में UCC नहीं थोप सकते, पूर्व डीजीपी ने बयान देकर मचाई सनसनी

Sandeep Kumar | Jul 12, 2026, 17:25 IST
मध्यप्रदेश में UCC नहीं थोप सकते
भोपाल में UCC के विरोध में मुस्लिम संगठनों की बैठक हुई। पूर्व डीजीपी एम.डब्ल्यू. अंसारी ने कहा कि UCC संविधान की भावना के अनुरूप नहीं और इसे जबरन नहीं थोपा जा सकता।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भोपाल में UCC विरोध को लेकर बड़ी बैठक हुई।
  • बैठक में मुस्लिम संगठन और उलेमा शामिल हुए।
  • एम.डब्ल्यू. अंसारी ने UCC थोपने का विरोध किया।
  • उन्होंने RSS और भाजपा पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाया।
  • जिला स्तर पर विरोध कार्यक्रम की रणनीति बनाई गई।

भोपाल में जुटे कई संगठन

रविवार को भोपाल के कोहेफिजा इलाके में एक शादी हॉल में बैठक आयोजित हुई। इसमें मुस्लिम संगठनों, उलेमा, अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में UCC के कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक पहलुओं पर चर्चा हुई।



इस दौरान पूर्व डीजीपी एम.डब्ल्यू. अंसारी, वरिष्ठ अधिवक्ता साजिद अली, पूर्व महापौर दीपचंद यादव और AIMIM मध्यप्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।



पूर्व डीजीपी बोले, सहमति जरूरी

पूर्व डीजीपी अंसारी ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक इसे किसी भी समुदाय पर जबरन नहीं थोपा जा सकता। उन्होंने कहा कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में इसका उल्लेख जरूर है, लेकिन यह बाध्यकारी प्रावधान नहीं है। किसी भी कानून को लागू करने से पहले सभी समुदायों की सहमति जरूरी है, यह उन्होंने कहा।



सिर्फ मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं मुद्दा

अंसारी के अनुसार UCC ( समान नागरिक संहिता ) का विषय केवल मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि ईसाई, आदिवासी और अन्य समुदायों के भी अपने व्यक्तिगत कानून और परंपराएं हैं। उनका दावा था कि विभिन्न राज्यों में समिति गठित कर चरणबद्ध तरीके से UCC लागू करने की तैयारी की जा रही है।



सामाजिक न्याय पर जोर

पूर्व डीजीपी ने कहा कि सरकार को समानता चाहिए तो सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश की बड़ी संपत्ति कुछ लोगों तक सीमित होती जा रही है, जबकि आम लोगों की समस्याएं बढ़ रही हैं।



RSS और भाजपा पर लगाए आरोप

अंसारी ने अपने संबोधन में दावा किया कि RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़े संगठन लंबे समय से ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहे हैं।



अंसारी ने बाबरी मस्जिद और ज्ञानवापी जैसे विवादों का जिक्र करते हुए दावा किया कि UCC को भी उसी क्रम में आगे बढ़ाया जा रहा है। यह भी आरोप लगाया गया कि भाजपा राजनीतिक उद्देश्य से यह मुद्दा उठा रही है। हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।



काजी अनस बोले, सिर्फ निकाह तलाक का मामला नहीं

काजी अनस ने कहा कि UCC का मुद्दा निकाह, तलाक या विरासत तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक यह शरीयत के तमाम मामलों में दखल का विषय है। उन्होंने कहा कि यह संविधान की धार्मिक स्वतंत्रता और देश की बहुलतावादी व्यवस्था से भी जुड़ा है।


काजी अनस ने भारत की गंगा-जमुनी तहजीब की बात करते हुए कहा कि मंदिरों की घंटियां और मस्जिदों की अजान साथ गूंजती हैं। उन्होंने कहा कि यही भारत की असली पहचान है।



लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा विरोध

काजी अनस ने अपील की कि विरोध सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित न रहे। उन्होंने कहा कि संविधान और कानून के दायरे में रहकर सरकार तक बात पहुंचाई जाए। उनके मुताबिक शरीयत या धार्मिक अधिकारों पर हस्तक्षेप होने पर समाज लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखेगा।



आगे की रणनीति पर चर्चा

बैठक में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी UCC के प्रस्तावित स्वरूप पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सभी समुदायों के साथ व्यापक संवाद होना चाहिए। आने वाले समय में जिला स्तर पर बैठकें, ज्ञापन और जनजागरण अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।



FAQ

  1. पूर्व डीजीपी अंसारी ने UCC पर क्या कहा?
    उन्होंने कहा कि UCC संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक इसे किसी समुदाय पर जबरन नहीं थोपा जा सकता। सभी समुदायों की सहमति के बिना इसे लागू नहीं करना चाहिए, यह उनका कहना था।
  2. बैठक में आगे की क्या रणनीति बनी?
    वक्ताओं ने जिला स्तर पर बैठकें और जनजागरण अभियान चलाने की बात कही। उन्होंने कहा कि विरोध लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। सभी समुदायों के साथ संवाद की मांग भी उठाई गई।


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