भोपाल-विदिशा रोड बनेगा फोरलेन: 1757 करोड़ का प्रोजेक्ट कैबिनेट में होगा मंजूर!
समझें क्या है पूरा मामला...
- मंगलवार को कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा प्रस्ताव।
- भोपाल विदिशा मार्ग बनेगा फोरलेन, तीन बायपास।
- पांच साल में एमपी में बनेंगी 88 हजार करोड़ की सड़कें।
- सूखी सेवनिया बेरखेड़ी सलामतपुर में घटेगा ट्रैफिक।
- भोपाल बनेगा मेट्रोपोलिटन सिटी, बड़ा सड़क नेटवर्क तैयार।
मध्यप्रदेश मेंभोपाल-विदिशा मार्ग को दो लेन से चार लेन किया जाएगा। इस पर 1757 करोड़ रुपए खर्च होंगे। मार्ग पर तीन नए बायपास भी बनेंगे। इससे सूखी सेवनिया, बेरखेड़ी और सलामतपुर में ट्रैफिक कम होगा। अगले पांच साल में एमपी में 88634 करोड़ की सड़कें बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
राजधानी भोपाल अब मेट्रोपोलिटन सिटी बनने की दिशा में एक और कदम बढ़ा रहा है। भोपाल विदिशा दो लेन मार्ग को चार लेन में बदला जाएगा।
इस परियोजना पर करीब 1757 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस प्रस्ताव को मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। बैठक की अध्यक्षता सीएम मोहन यादव करेंगे।
भोपाल-विदिशा फोरलेन प्रोजेक्ट
इस मार्ग पर तीन नए बायपास भी बनाए जाएंगे। इनमें सूखी सेवनिया बायपास, बेरखेड़ी बायपास और सलामतपुर बायपास शामिल हैं। इससे इन इलाकों में गाड़ियों का दबाव कम होगा। सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी घटेगा और स्थानीय लोगों के लिए सफर सुरक्षित होगा।
यह मार्ग भोपाल में अयोध्या बायपास पर भानपुर टी जंक्शन से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग 46 पर सांची सलामतपुर जंक्शन तक जाएगा। यह रूट भोपाल, रायसेन और विदिशा जिलों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मार्ग है। साथ ही यह भोपाल कानपुर हाई स्पीड कॉरिडोर के लिए फीडर कॉरिडोर का काम भी करेगा।
हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर होगा निर्माण
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनेगी। चार लेन मार्ग में पक्के शोल्डर भी शामिल होंगे। इससे सड़क की गुणवत्ता और टिकाऊपन दोनों बेहतर रहेंगे।
धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से अहम रूट
भोपाल विदिशा मार्ग सिर्फ ट्रैफिक के लिए नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए भी अहम है। इसके आसपास सांची स्तूप, अशोक स्तंभ और उदयगिरि की गुफाएं जैसे मशहूर पुरातात्विक स्थल हैं। यह मार्ग कर्क रेखा को भी पार करता है, जिससे इसका भौगोलिक महत्व और बढ़ जाता है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई (NHAI – National Highways Authority of India) भी एक नया चार लेन राजमार्ग बना रहा है। यह रायसेन, सांची और विदिशा को बायपास करते हुए निकलेगा। इस प्रोजेक्ट से जुड़ने पर भोपाल, सागर, दमोह, छतरपुर और पन्ना में भी कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
एमपी सड़क नेटवर्क मास्टर प्लान
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बताया कि सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को जीआईएस आधारित विश्लेषण से समझा जा रहा है। इसी आधार पर प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं।
2026-27 से 2030-31 तक के मास्टर प्लान में कुल 29682 किलोमीटर लंबाई वाले 1226 मार्गों का विकास और अपग्रेडेशन शामिल है। इन कामों पर करीब 88634 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 विजन के अनुसार एमपी में आधुनिक और सुरक्षित सड़क ढांचा तैयार किया जा रहा है।
पिछले ढाई साल में प्रदेश में 29693 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और अपग्रेडेशन हो चुका है। इसके अलावा 18166 करोड़ की लागत से 444 किलोमीटर लंबी सात बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
इंदौर उज्जैन में भी मजबूत हो रहा नेटवर्क
प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी सड़क नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। उज्जैन इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में छह लेन और चार लेन ग्रीनफील्ड मार्गों पर काम चल रहा है। इंदौर बाहरी रिंग रोड का विकास भी एनएचएआई कर रहा है। उज्जैन को दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे से जोड़ने का काम भी जारी है।
भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के लिए भोपाल पश्चिमी बायपास, भोपाल पूर्वी बायपास और भोपाल इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। भोपाल पश्चिमी बायपास को मंजूरी मिल चुकी है जबकि पूर्वी बायपास के लिए प्रक्रिया जारी है।
41 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो रही
प्रदेश में 1700 किलोमीटर लंबाई की 41 परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर (DPR – Detailed Project Report) तैयार की जा रही है।
पहले चरण में सागर सतना एक्सप्रेस वे, भोपाल मंदसौर एक्सप्रेस वे और जबलपुर आशापुर एक्सप्रेस वे शामिल हैं। इन पर करीब 38456 करोड़ की लागत आएगी।
इन एक्सप्रेस वे के बनने से सागर और सतना के बीच सफर का समय छह सात घंटे से घटकर करीब तीन साढ़े तीन घंटे रह जाएगा। इसी तरह भोपाल मंदसौर और जबलपुर आशापुर मार्गों पर लगने वाला आठ नौ घंटे का समय भी घटकर पांच छह घंटे रह जाएगा।
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