कागजों में सिमटा मास्टर प्लान: 78% सड़कें अधूरी, भोपाल झेल रहा जाम की मार
Amresh Kushwaha | Aug 10, 2026, 10:30 IST
कागजों में सिमटा भोपाल का मास्टर प्लान
भोपाल के 21 साल पुराने मास्टर प्लान में 241 किमी सड़कें प्रस्तावित थीं। इनमें से सिर्फ 53 किमी सड़कें ही बन पाईं। जमीन न मिलने और अतिक्रमण के कारण 78 प्रतिशत सड़कें अटकी हैं। इसी वजह से शहर में रोज ट्रैफिक जाम लगता है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल का 21 साल पुराना मास्टर प्लान अधूरा रह गया है।
- इसमें 241 किमी सड़कें बनाने की योजना थी।
- अभी तक सिर्फ 53 किमी सड़कें ही बन पाई हैं।
- यानी करीब 78 प्रतिशत सड़कें कागजों में ही रह गईं।
- इसी वजह से भोपाल में हर दिन भारी ट्रैफिक जाम लगता है।
नक्शे में अटकी 78 फीसदी सड़कें
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21 साल पुराना है मास्टर प्लान
इनमें से सिर्फ 53 किमी सड़कें ही बन सकी हैं। यानी 188 किमी सड़कें अब भी अधूरी हैं। यह करीब 78 प्रतिशत हिस्सा है। जिन इलाकों में यह सड़कें प्रस्तावित थीं वहां अब निर्माण और अतिक्रमण हो चुका है। इससे सड़क निकालना और भी मुश्किल हो गया है।
क्यों अटकी हैं सड़कें
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वाहन बढ़े, सड़कें नहीं बढ़ीं
इससे साफ है कि वाहनों की रफ्तार सड़कों से कहीं आगे निकल गई है। शहर में करीब 15 लाख वाहन सड़कों पर चल रहे हैं। इनमें से 14 लाख 82 हजार 859 वाहन ऑन रोड हैं। ऑटो रिक्शा भी 10 लाख 24 हजार 859 की संख्या में हैं। यह आंकड़ा 69.14 प्रतिशत दोगुना हो चुका है।
पार्किंग की कमी बड़ी समस्या
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चार मोर्चों पर फंसा ट्रैफिक
चौथी समस्या बाईपास और पेरिफेरल रोड का न बनना है। मास्टर प्लान में बाहरी ट्रैफिक के लिए अलग कॉरिडोर की योजना थी। लेकिन यह कॉरिडोर समय पर तैयार नहीं हो सका। इससे बाहरी वाहन भी शहर के अंदर की सड़कों पर आ जाते हैं। इससे शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव और बढ़ जाता है।
बसें घटीं, यात्री परेशान
वहीं, 2026 आते आते बसों का यह आंकड़ा 368 से घटकर 66 रह गया है। रोजाना यात्रियों की संख्या भी डेढ़ लाख से घटकर 40 हजार रह गई है। शहर में अभी सिर्फ 100 ई-बसें ही उपलब्ध हैं। सार्वजनिक परिवहन कमजोर होने से लोग निजी वाहनों पर निर्भर हो गए हैं। इससे भी सड़कों पर वाहनों का बोझ बढ़ा है।
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आगे क्या होगा
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