भोपाल-विदिशा हाईवे प्रोजेक्ट फाइलों में कैद, 8 महीने से कैबिनेट मुहर का इंतजार

Anjali Dwivedi | Jul 05, 2026, 12:01 IST
भोपाल-विदिशा हाईवे
भोपाल-विदिशा फोरलेन हाईवे को एसएलईसी से मंजूरी मिले आठ महीने बीत चुके हैं, पर कैबिनेट की अंतिम स्वीकृति अभी भी बाकी है। इससे सांची जाने वाले यात्रियों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।

भोपाल-विदिशा हाईवे परियोजना आठ महीने से कैबिनेट मंजूरी का इंतजार कर रही है। एसएलईसी से मंजूरी मिलने के बाद भी सरकार ने अंतिम स्वीकृति नहीं दी है। 45 किलोमीटर की यह सड़क भोपाल को विदिशा और सांची से जोड़ती है। सड़क की खराब हालत के कारण यात्री लंबा चक्कर लगाने को मजबूर हैं। अधिकारी कहते हैं प्रोजेक्ट उचित समय पर मंजूर होगा, तारीख तय नहीं है।



भोपाल और विदिशा को जोड़ने वाला फोरलेन हाईवे फिलहाल कागजों में ही सिमटा हुआ है। यह प्रोजेक्ट राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (SLEC) से मंजूर हो चुका है। लेकिन कैबिनेट की अंतिम मुहर अब भी बाकी है। आठ महीने बीत जाने के बाद भी कोई तारीख तय नहीं हुई है।



प्रोजेक्ट की लागत और स्केल

यह हाईवे परियोजना कुल 1 हजार 618 करोड़ रुपए की है। इसमें 45 किलोमीटर लंबी सड़क को फोर लेन में बदला जाना है। यह अपग्रेड राज्य हाईवे-18 पर होगा, जो भोपाल को विदिशा से जोड़ता है। इतनी बड़ी लागत के बावजूद प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो सका है।



भोपाल-विदिशा हाईवे


सड़क की हालत खराब क्यों है?

मौजूदा टू-लेन सड़क बरसों से जर्जर है। इसी वजह से मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी की सड़क) ने इसे चौड़ा करने का प्रस्ताव रखा है। यह विस्तार हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल (HAM) के तहत प्रस्तावित है। सड़क खराब होने से यात्रियों को अब भोपाल-रायसेन मार्ग से घूमकर जाना पड़ता है।



दस किलोमीटर का अतिरिक्त सफर

यह वैकल्पिक रास्ता यात्रा में करीब दस किलोमीटर जोड़ देता है। इससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ जाती है। पहले से व्यस्त भोपाल-रायसेन कॉरिडोर पर भीड़ और बढ़ जाती है। रोज सफर करने वाले लोग इस देरी से परेशान हैं।



सांची के लिए क्यों जरूरी

यह सड़क यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट सांची तक जाने का मुख्य रास्ता है। पर्यटक, व्यापारी और स्थानीय निवासी सभी इसी मार्ग पर निर्भर हैं। सड़क की खराब हालत से पर्यटन और व्यापार दोनों प्रभावित हो रहे हैं। बेहतर सड़क सांची आने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ा सकती है।



रोजाना सफर करने वाले लोग खराब सड़क से परेशान हैं। कई बार गड्ढों की वजह से हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। व्यापारी माल ढुलाई में ज्यादा समय और खर्च होने की शिकायत करते हैं। पर्यटक भी असुविधा के कारण सांची जाने से बचने लगे हैं।



कैबिनेट में देरी की वजह

अधिकारियों के मुताबिक प्रोजेक्ट ने हर प्रक्रिया पूरी कर ली है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होने के बाद हर स्तर पर मंजूरी मिली। दिसंबर 2025 में एसएलईसी की मंजूरी भी मिल गई थी। इसके बावजूद फाइल राजनीतिक कारणों से कैबिनेट में अटकी बताई जा रही है।



अधिकारी बार-बार कहते हैं कि प्रोजेक्ट उचित समय पर मंजूर होगा। लेकिन अब तक कोई फिक्स तारीख सामने नहीं आई है। प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जा चुका है। फिर भी अंतिम मंजूरी के बिना काम शुरू नहीं हो सकता है।



आगे क्या हो सकता है

जब तक कैबिनेट मंजूरी नहीं देती, पुरानी सड़क ही इस्तेमाल होती रहेगी। निवासी, पर्यटक और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर लंबे रास्ते पर निर्भर रहेंगे। यह प्रोजेक्ट क्षेत्र के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर कामों में गिना जाता है। इसके बावजूद यह फिलहाल अटका हुआ है।



FAQ

  1. भोपाल-विदिशा हाईवे कितना लंबा और कितनी लागत का है?
    यह हाईवे 45 किलोमीटर लंबा है। इसकी अनुमानित लागत 1 हजार 618 करोड़ रुपए है। यह भोपाल को विदिशा और सांची से जोड़ता है।

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