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Photograph: (the sootr)
News in Short
- अवैध टोल वसूली: MPRDC ने नियमों को ताक पर रखकर अधिसूचना से पहले टोल वसूला।
- विधानसभा में खुलासा: विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर सरकार ने यह धांधली स्वीकार की।
- 7 टोल नाके: अधिसूचना जारी होने से 1 साल पहले ही वसूली शुरू कर दी।
- करोड़ों का खेल: 43 सड़कों से 1102 करोड़ वसूले, जबकि खर्च आधा ही हुआ।
- नियमों का उल्लंघन: इंडियन टोल एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाई गईं।
News in Detail
मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम यानी MPRDC का एक कारनामा चर्चा का केंद्र बन गया है। MPRDC ने सरकारी कागजों में टोल टैक्स वसूलने की अनुमति मिलने से पहले ही नाकों पर वसूली शुरू कर दी गई। यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि, खुद सरकार ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में किया है।
विधानसभा में खुला राज
नींदधार के विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में टोल वसूली को लेकर सवाल पूछे। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह को लिखित जवाब देना पड़ा। उनके जवाब के मुताबिक, मध्यप्रदेश की 43 सड़कों से दिसंबर 2025 तक कुल 1102.15 करोड़ रुपए का टोल वसूला गया। इसमें से रखरखाव पर सिर्फ 498.49 करोड़ खर्च हुए, जबकि शुद्ध मुनाफा 603.66 करोड़ रुपए कमाया गया।
अधिसूचना से पहले ही उगाही शुरू
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कम से कम 7 टोल नाके ऐसे पाए गए जहां सरकारी नोटिफिकेशन (अधिसूचना) जारी होने से एक साल पहले ही वसूली शुरू कर दी गई थी। इसे प्रशासन की भाषा में 'अवैध उगाही' कहा जा सकता है। नियम कहते हैं कि जब तक सरकार गजट नोटिफिकेशन जारी न कर दे, तब तक एक पैसा भी नहीं वसूला जा सकता। लेकिन यहां सालभर से हर रोज लाखों रुपए की वसूली की जा रही थी।
| रोड का नाम | आधिकारिक अधिसूचना तारीख | टोल वसूली शुरू होने की तारीख |
| भोपाल बायपास | 8 दिसंबर 2020 | 12 दिसंबर 2019 |
| इंदौर-उज्जैन | 30 दिसंबर 2022 | 21 जनवरी 2022 |
| गुना-ईसागढ़ | 10 अक्टूबर 2024 | 2 जून 2023 |
| बीना-खिमलासा | 8 दिसंबर 2021 | 19 मार्च 2021 |
क्या कहता है इंडियन टोल एक्ट?
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि इंडियन टोल एक्ट के तहत सरकार अपनी मर्जी से टोल नहीं ले सकती। सड़कें जनता की संपत्ति होती हैं और शासन सिर्फ उनका एक ट्रस्टी या रखवाला होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मंदसौर पुलिया मामले में ऐतिहासिक आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि कोई भी निवेशक लागत और ब्याज से ज्यादा पैसा नहीं वसूल सकता। लेकिन MPRDC ने इन सभी आदेशों को नजरअंदाज कर मुनाफाखोरी में लग गई।
जनता का पैसा, विभाग की मौज
अगर हम मुनाफे की बात करें, तो विभाग ने करोड़ों रुपए अपनी जेब में डाले हैं। अकेले भोपाल बायपास से 284.33 करोड़ रुपए की वसूली की गई है। इंदौर-उज्जैन रोड से 130.41 करोड़ और महू-घाटा बिल्लौद रोड से 122.90 करोड़ रुपए बटोरे गए हैं। जनता पूछ रही है कि जब रखरखाव का खर्च इतना कम है, तो फिर टोल की दरें इतनी ज्यादा क्यों हैं?
निष्कर्ष: जवाबदेही किसकी तय होगी?
यह सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं है, बल्कि यह करोड़ों रुपए का घोटाला नजर आता है। अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर फाइलें दबा दी जाएंगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि बिना ऊपर के संरक्षण के इतना बड़ा खेल मुमकिन नहीं है।
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