एमपी से उड़ा गिद्ध पाकिस्तान पहुंचा, तूफान में फंसकर हुआ था घायल, पड़ोसी मुल्क ने दी नई जिंदगी

Kaushiki | Apr 13, 2026, 09:55 IST
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भोपाल के वन विहार से छोड़ा गया एक सिनेरियस गिद्ध राजस्थान होते हुए पाकिस्तान के खानेवाल जिले पहुंच गया। GPS सिग्नल बंद होने पर WWF-India ने पाकिस्तान से संपर्क किया। तूफान में घायल गिद्ध को रेस्क्यू कर इलाज दिया गया।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • भोपाल के से 30 मार्च को एक गिद्ध छोड़ा गया था।
  • यह गिद्ध राजस्थान पार कर 6 अप्रैल को पाकिस्तान पहुंच गया।
  • 7 अप्रैल को GPS सिग्नल बंद हुआ तो WWF-India को सूचना दी गई।
  • पाकिस्तान के खानेवाल जिले में तूफान में गिद्ध घायल मिला।
  • WWF-पाकिस्तान और वन विभाग ने गिद्ध को रेस्क्यू कर इलाज दिया।


भोपाल से उड़ा, पाकिस्तान में उतरा

Vulture in MP: मध्य प्रदेश के भोपाल से छोड़ा गया एक गिद्ध अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार करके पाकिस्तान जा पहुंचा। ये खबर उस वक्त सामने आई जब उसके जीपीएस (GPS - Global Positioning System) का सिग्नल अचानक बंद हो गया।



भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क के अधिकारी चिंता में पड़ गए और तुरंत जांच शुरू की। इस गिद्ध को भोपाल के पास हलाली डैम से 30 मार्च 2026 को छोड़ा गया था।



हलाली डैम को वैज्ञानिक तरीके से चुना गया स्थल माना जाता है जहां से गिद्धों को उनके प्राकृतिक प्रवास पर भेजा जाता है। यह गिद्ध राजस्थान से होता हुआ 6 अप्रैल तक पाकिस्तान पहुंच चुका था।



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GPS बंद हुआ तो खुला राज

बता देंकि, 7 अप्रैल को जब इस गिद्ध के मूवमेंट का कोई सिग्नल नहीं मिला, तब वन विहार के अधिकारियों ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया (World Wide Fund for Nature) को तत्काल सूचित किया।



WWF-India ने फौरन अपने पाकिस्तानी समकक्ष संगठन WWF-पाकिस्तान से संपर्क साधा। इसके बाद पाकिस्तान वन विभाग और WWF-पाकिस्तान की टीम हरकत में आई। खानेवाल जिले में स्थानीय निवासियों की मदद से गिद्ध को ढूंढा गया और उसे सफलतापूर्वक बरामद किया गया।



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तूफान ने किया बेहाल

WWF-पाकिस्तान के मुताबिक 7 अप्रैल को खानेवाल और मुल्तान जिलों में जबरदस्त ओलावृष्टि और आंधी आई। इस तूफान की चपेट में एक सिनेरियस गिद्ध और एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध दोनों आ गए। दोनों अस्थायी रूप से उड़ने में असमर्थ हो गए और जमीन पर पाए गए। स्थानीय लोगों ने वन्यजीव अधिकारियों को सूचना दी।



अधिकारियों ने दोनों गिद्धों को रेस्क्यू कर प्राथमिक उपचार दिया। फिर उन्हें चंगा मंगा वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में भेज दिया। सिनेरियस गिद्ध को हल्की चोटें आई थीं और वह अब ठीक हो रहा है। दोनों गिद्ध सामान्य रूप से खाना खा रहे हैं। हालांकि उसका ट्रैकिंग टैग नहीं मिल पाया है।



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यह पहली बार नहीं है

यह कोई पहला मौका नहीं है जब भोपाल से छोड़ा गया गिद्ध इतनी लंबी उड़ान भर चुका हो। साल 2025 में भी वन विहार ने ऐसी ही एक उपलब्धि दर्ज की थी। हलाली डैम से छोड़ा गया एक गिद्ध टेलीमेट्री की मदद से ट्रैक किया गया। यह गिद्ध (गिद्ध संरक्षण अभियान) 43 सौ किलोमीटर से भी ज्यादा की दूरी तय करके कजाकिस्तान में अपने प्रजनन क्षेत्र तक पहुंचा।



फिर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान होते हुए अक्टूबर में वापस भारत लौट आया। उस अध्ययन से गिद्धों के प्रवासी रास्तों, उनके रहने की जगहों और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण की चुनौतियों पर बेहद जरूरी जानकारी मिली।



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MP में गिद्ध संरक्षण की कोशिशें

मध्यप्रदेश सरकार गिद्धों (vultures) के संरक्षण को लेकर गंभीर है। 23 फरवरी 2026 को सीएम मोहन यादव की अगुवाई में कुल पांच गिद्धों को जंगल में छोड़ा गया। इनमें चार लंबी चोंच वाले गिद्ध और एक सिनेरियस गिद्ध शामिल थे। इन सभी की टैगिंग और पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से की गई।



गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद जरूरी पक्षी माने जाते हैं। ये मृत जानवरों को खाकर पर्यावरण को साफ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनकी घटती संख्या दुनिया भर में चिंता का विषय है। भोपाल का यह प्रयोग न सिर्फ वैज्ञानिक है बल्कि दो देशों के बीच वन्यजीव सहयोग की एक मिसाल भी बन गया है।



FAQ

  1. सिनेरियस गिद्ध क्या होता है और यह इतना खास क्यों है?
    सिनेरियस गिद्ध (Cinereous Vulture) दुनिया के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में से एक है। इसका पंख फैलाव करीब तीन मीटर तक होता है। यह प्रजाति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकटग्रस्त मानी जाती है। भारत में यह मुख्यतः सर्दियों में आता है और मध्य प्रदेश इसके प्रमुख प्रवास स्थलों में शामिल है। यह मृत जानवरों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाता है।
  2. GPS और टेलीमेट्री से गिद्धों को कैसे ट्रैक किया जाता है?
    गिद्धों को छोड़ने से पहले उनकी पीठ पर एक हल्का GPS (Global Positioning System) टैग लगाया जाता है। यह टैग सैटेलाइट के जरिए नियमित अंतराल पर गिद्ध की लोकेशन भेजता रहता है। टेलीमेट्री प्रणाली से वैज्ञानिक यह जान सकते हैं कि गिद्ध कहां है, कितनी दूरी तय की और किस रास्ते से गया। जब सिग्नल बंद हो जाए तो यह किसी मुश्किल का संकेत माना जाता है।
  3. भारत और पाकिस्तान के बीच वन्यजीव सहयोग कैसे काम करता है?
    दोनों देशों में WWF (World Wide Fund for Nature) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की शाखाएं काम करती हैं। जब किसी देश का वन्यजीव दूसरे देश में पहुंचता है तो ये संगठन आपस में समन्वय करते हैं। राजनीतिक संबंध चाहे जैसे हों, वन्यजीव संरक्षण के मामलों में दोनों देशों के वन विभाग और WWF शाखाएं सीधे संपर्क में रहती हैं। इस मामले में भी यही हुआ।

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