भोपाल के पश्चिमी बायपास का ले आउट बदलने तैयार नहीं अफसर, निर्माण से होगा हजारों पेड़ों का सफाया
समझें पूरा मामला...
- 35.611 किमी बायपास के लिए 45 हेक्टेयर वनभूमि का होगा अधिगृहण।
- बाइपास बनाने में 3200 बड़े पेड़, दस हजार छोटे झाड़- झाड़ियों का होगा सफाया।
- फंदा कलां में वेटलैंड के नालों पर ब्रिज-कल्वर्ट बनेंगे से जैव विविधता को खतरा।
- अधिकारियों के इशारे पर बदला गया ले आउट अब पर्यावरण बचाने बदलाव की मांग।
- राजधानी में हरियाली को उजाड़ने वाले प्रोजेक्ट्स से बढ़ी पर्यावरणप्रेमियों में नाराजगी।
राजधानी भोपाल में सरकार की विकास परियोजनाएं पर्यावरण उजाड़ रही हैं। नए बाइपास, फोरलेन हाईवे के लिए बीते महीनों में दो- तीन दशक पुराने पांच से छह हजार पेड़ काटे जा चुके हैं। इसको लेकर प्रकृतिप्रेमियों की नाराजगी अभी दूर भी नहीं हुई कि भोपाल वेस्टर्न बायपास के लिए पेड़ों की कटाई ने विवाद खड़ा कर दिया है।
ढाई साल में दो बार अलाइनमेंट और ले आउट में बदलाव किया गया है। अंतिम ले आउट के आधार पर बाइपास बनाने पर हजारों पेड़ों की कटाई होना तय माना जा रहा है।
इसको लेकर पर्यावरणप्रेमियों के संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। अब एक ओर लोग इससे नाराज हैं तो दूसरी ओर अधिकारी ले आउट में किसी भी नए बदलाव से सहमत नहीं हैं।
35 किमी में कटेंगे 13 हजार पेड़ और झाड़
पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट भानपुर केकड़िया से शुरू होकर भोपाल-देवास मार्ग स्टेट हाईवे 28 पर फंदा कलां पर जुड़ेगा। लगभग 35.611 किमी फोरलेन पेव्ड शोल्डर बाइपास के लिए 13 गांवों की निजी और सरकारी जमीन ली जाएगी।
वहीं कुछ स्थानों पर वन क्षेत्र की जमीन का अधिगृहण करना होगा। बाइपास के लेआउट के आधार पर सर्वे एजेंसी ने निर्माण के बीच आने वाले पेड़ों को चिन्हित किया है। बाइपास के निर्माण में 3000 हजार से ज्यादा बड़े पेड़ और 10 हजार से ज्यादा झाड़ और झाड़ियां काटी जा सकती हैं।
पेड़ काटने की 40 से ज्यादा शिकायतें
वेस्टर्न बाइपास के निर्माण में पेड़ों की कटाई की खबर पर्यावरणप्रेमी संगठनों तक फैल गई है। बाइपास निर्माण के सर्वे के साथ ही लोगों और संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है।
अब तक अलग-अलग संगठन और लोगों ने निजी तौर पर 40 से ज्यादा शिकायतें सरकार तक पहुंचाई हैं। इसमें वेस्टर्न बाइपास के निर्माण के लिए इतने ज्यादा पेड़ों की कटाई पर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
वहीं संगठनों ने सरकार से इस लेआउट पर पुर्नविचार और कम से कम या पेड़ों की कटाई की स्थिति के आधार पर जगह का चयन करने की मांग की है।
बाइपास का ले आउट बदलने का दबाव
राजधानी में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन वेस्टर्न बाइपास का ले आउट बदलने की मांग कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि अधिकारियों के इशारे पर पहले दो बार अलाइनमेंट और ले आउट बदला जा चुका है।
सरकार को पर्यावरण संरक्षण की स्थिति पर गंभीरता दिखाते हुए पुर्नविचार करने की जरूरत है। वेस्टर्न बाइपास के निर्माण से कनेक्टिविटी बढ़ेगी और भारी वाहनों का दबाव घटेगा, लेकिन इसके लिए इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई विकल्प नहीं है। बाइपास के लिए जो ले आउट स्वीकृत किया गया है उससे बड़े तालाब का वेटलैंड क्षेत्र भी प्रभावित होगा।
ग्रामवार जमीन अधिगृहण व पेड़ों की कटाई की स्थिति...
- भानपुर केकड़िया: 8.45 हेक्टेयर निजी व 8.38 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर असर
- झागरिया खुर्द: 19.30 हेक्टेयर निजी, 2.11 हेक्टेयर सरकारी भूमि। आठ भवन व 40 पेड़ कटेंगे।
- फंदा कलां: बड़ा तालाब वेटलैंड में पानी पहुंचाने वाले नालों पर बनानें होंगे पुल- कल्वर्ट
- फंदाखुर्द: 1.75 हेक्टेयर निजी व 0.20 हेक्टेयर सरकारी भूमि। 20 पेड़ प्रभावित।
- सरवर: 2.04 हेक्टेयर निजी व 0.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि। एक भवन हटेगा।
- समसपुरा: 7.02 हेक्टेयर निजी व 3.43 हेक्टेयर सरकारी भूमि। तीन भवन व 54 पेड़ कटेंगे।
- पिपलिया धाकड़: 6.62 हेक्टेयर निजी व 1.01 हेक्टेयर सरकारी भूमि। एक भवन व 23 पेड़ कटेंगे।
- धुआखेड़ा: 12.1284 हेक्टेयर जमीन का करना होगा अधिगृहण
- नरेला: 12.89 हेक्टेयर निजी व 0.65 हेक्टेयर सरकारी जमीन। दो भवन व 150 पेड़ कटेंगे।
- मूंडला: 12.40 हेक्टेयर निजी व 0.75 हेक्टेयर सरकारी जमीन। दो भवन व 70 पेड़ कटेंगे।
- आंवला: 15.28 हेक्टेयर निजी व 0.34 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित।
- हथाईखेड़ी: 3.85 हेक्टेयर निजी व 0.22 हेक्टेयर सरकारी जमीन। 50 पेड़ काटना होगा।
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