शादी के 2 साल बाद पता चला पत्नी में हैं पुरुषों वाले जींस, डिफेंस अधिकारी पति बोला- अंतिम सांस तक रहेंगे साथ
News In Short
- भोपाल में एक महिला की जांच में XY यानी पुरुष गुणसूत्र मिले हैं।
- उसके शरीर में अंडाशय (ovaries) और वृषण (testes) दोनों मौजूद थे।
- यह DSD यानी लिंग विकास में अंतर की दुर्लभ स्थिति है।
- दुनियाभर में अब तक ऐसे 500 से भी कम मामले सामने आए हैं।
- डॉक्टरों ने इसे मेडिकल साइंस का एक चौंकाने वाला मामला बताया है।
News In Detail
भोपाल में हैरान करने वाला मेडिकल केस
भोपाल से एक ऐसी खबर आई है जो मेडिकल साइंस को भी चौंका देती है। एक महिला की जांच में कुछ ऐसा मिला जो किसी को उम्मीद नहीं थी। उसके शरीर में पुरुष जैसे XY गुणसूत्र यानी क्रोमोसोम पाए गए।
इतना ही नहीं, उसके शरीर में अंडाशय और वृषण दोनों एक साथ मौजूद थे। डॉक्टरों ने इस स्थिति को DSD यानी Differences of Sex Development कहा। यह एक बेहद दुर्लभ जन्मजात स्थिति है।
आखिर क्या होते हैं गुणसूत्र?
हर इंसान के शरीर की हर कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं। इनमें से दो गुणसूत्र लिंग तय करते हैं। सामान्य महिला में XX और पुरुष में XY गुणसूत्र होते हैं।
इस महिला में XY पैटर्न था, जो आमतौर पर पुरुषों में पाया जाता है। लेकिन बाहर से वह पूरी तरह महिला दिखती थीं। यही बात इस केस को बेहद खास बनाती है।
शरीर में दोनों अंग एक साथ कैसे?
मेडिकल भाषा में इस स्थिति को Ovotesticular DSD कहते हैं। इसमें एक ही शरीर में अंडाशय और वृषण दोनों बन जाते हैं। कभी-कभी दोनों मिलकर एक ही अंग बना लेते हैं जिसे ovotestis कहते हैं।
दुनियाभर में अब तक इस स्थिति के 500 से कम मामले दर्ज हुए हैं। यह इंसानी शरीर में लिंग विकास की सबसे दुर्लभ स्थिति मानी जाती है।
बचपन से ही था शरीर में ये अंतर
यह स्थिति जन्म से होती है। यह किसी बीमारी या बाहरी कारण से नहीं होती। गर्भ में जब शरीर बन रहा होता है, तभी यह अंतर आ जाता है।
शुरुआत में हर भ्रूण एक जैसा होता है। छठे से आठवें हफ्ते में जींस तय करते हैं कि अंडाशय बनेंगे या वृषण। इस प्रक्रिया में कभी-कभी गड़बड़ी हो जाती है।
डॉक्टरों को कैसे पता चला?
आमतौर पर ऐसे केस तब सामने आते हैं जब महिला को पीरियड न आए। या फिर बच्चा न हो पाने की शिकायत लेकर वह डॉक्टर के पास जाए।
जांच में पहले अल्ट्रासाउंड और फिर Karyotyping Test कराई जाती है। इस टेस्ट से गुणसूत्रों की पूरी तस्वीर मिल जाती है। तभी असली स्थिति का पता लगता है।
यह खतरनाक है या नहीं?
यह स्थिति खुद में जानलेवा नहीं है। लेकिन इसमें कुछ जोखिम जरूर होते हैं। वृषण अगर शरीर के अंदर हों तो उनमें कैंसर की आशंका रहती है।
इसलिए डॉक्टर समय पर सर्जरी की सलाह देते हैं। साथ ही हार्मोन थेरेपी भी दी जाती है। सही इलाज से ऐसे मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
भारत में ऐसे मामले और भी आए हैं
यह पहली बार नहीं है जब भारत में ऐसा मामला सामने आया हो। साल 2024 में कोलकाता में एक महिला के शरीर में XY गुणसूत्र और वृषण मिले थे। वह 30 साल से महिला के रूप में जी रही थी।
उदयपुर में एक पुरुष के शरीर में गर्भाशय और अंडाशय मिले थे। ऐसे मामले बताते हैं कि प्रकृति में लिंग का विकास हमेशा एक जैसा नहीं होता।
समाज और परिवार को क्या करना चाहिए?
डॉक्टर कहते हैं कि ऐसे लोगों को इलाज की जरूरत है, दया या शर्म की नहीं। यह एक जन्मजात मेडिकल स्थिति है। इसमें कोई गलती किसी की नहीं होती।
परिवार को घबराने की बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलना चाहिए। सही जांच और इलाज से ऐसे बच्चे या बड़े खुशहाल जीवन जी सकते हैं।
मेडिकल साइंस के लिए क्यों अहम है यह केस?
मध्यप्रदेश के भोपाल का यह मामला डॉक्टरों और वैज्ञानिकों दोनों के लिए अहम है। इससे DSD पर और शोध को बल मिलेगा। भारत में ऐसे मामलों पर खुलकर बात होना जरूरी है।
अक्सर सामाजिक डर की वजह से ऐसे लोग इलाज नहीं लेते। इससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। खुलकर सामने आने से दूसरों को भी राह मिलती है।
FAQ
- महिला के शरीर में पुरुष XY गुणसूत्र और वृषण कैसे होते हैं?
यह एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति है जिसे Ovotesticular DSD कहते हैं। गर्भ में शरीर बनते समय लिंग तय करने वाली जींस की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है। इससे शरीर में XY गुणसूत्र होने के बावजूद बाहरी अंग महिला जैसे बने रहते हैं और अंदर अंडाशय व वृषण दोनों बन सकते हैं। दुनियाभर में अब तक ऐसे 500 से कम मामले दर्ज हैं। - DSD यानी Differences of Sex Development क्या होता है?
DSD एक समूह है जिसमें कई दुर्लभ जन्मजात स्थितियां आती हैं। इनमें व्यक्ति के गुणसूत्र, अंदरूनी अंग और बाहरी दिखावट एक जैसी नहीं होती। महिला दिखने वाले व्यक्ति में XY गुणसूत्र हो सकते हैं या उसके अंदर वृषण हो सकते हैं। पहले इसे intersex कहते थे, अब डॉक्टर DSD शब्द इस्तेमाल करते हैं। इसका इलाज सर्जरी और हार्मोन थेरेपी से होता है। - Ovotesticular DSD में कैंसर का खतरा क्यों होता है?
जब वृषण शरीर के अंदर यानी सही जगह पर नहीं होते, तो उनमें ट्यूमर या कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। इसे gonadoblastoma या dysgerminoma कहते हैं। इसीलिए डॉक्टर ऐसे मामलों में जल्द से जल्द सर्जरी की सलाह देते हैं। सही समय पर इलाज से कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।
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