भोपाल में महिलाओं का Smash the Patriarchy के चलते हुआ जोरदार मार्च, गर्ल्स कॉलेजों के बाहर पिंक बूथ, सीसीटीवी लगाने की मांग
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल में शुक्रवार शाम महिलाओं ने सुरक्षा के मुद्दे पर पैदल मार्च निकाला।
- मार्च कमला पार्क से शुरू हुआ और गैमन मॉल तक गया।
- उन्होंने गर्ल्स कॉलेजों के बाहर पिंक बूथ बनाने की मांग रखी।
- उन्होंने अंधेरे इलाकों में स्ट्रीट लाइट की जरूरत बताई।
- प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बंदिशें नहीं, सुरक्षित माहौल चाहिए।
हाथों में पोस्टर, लबों पर नारे
महिलाएं पोस्टर और तख्तियां लेकर रास्तेभर नारे लगाती हुई आगे चलीं। हर पोस्टर पर अलग संदेश लिखा था। कहीं “हम लेकर रहेंगे आजादी” लिखा था। कहीं “डरना नहीं, रुकना नहीं” का नारा था।
एक और पोस्टर पर सीधा सवाल था: शर्म नहीं है मर्दों में, महिलाएं क्यों हैं पर्दों में। नारों में अपील थी कि महिलाएं डर से सार्वजनिक जगहों पर पीछे न हटें। सोचिए, अगर हर महिला डर से रुक जाए, तो शहर किसका रहेगा?
महिला सुरक्षा पैदल मार्च की मांगें
भोपाल में महिलाओं का प्रदर्शन कई मांगों के साथ हुआ। महिला सुरक्षा पैदल मार्च में मांगें साफ थीं। गर्ल्स कॉलेजों के बाहर पिंक बूथ बनाए जाएं। पुलिस पेट्रोलिंग नियमित और ज्यादा हो। जहां सीसीटीवी (Closed Circuit Television) कैमरे नहीं हैं, वहां कैमरे लगें।
अंधेरे इलाकों में स्ट्रीट लाइट की जरूरत
महिलाओं ने शहर के अंधेरे और सुनसान इलाकों का भी जिक्र किया। वहां स्ट्रीट लाइट लगाने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक कई जगह रात में महिलाओं और बेटियों का निकलना असुरक्षित लगता है।
सवाल सीधा है: क्या सुरक्षा का मतलब घर में बंद रहना है?
6 बजे के बाद पार्क क्यों नहीं?
प्रदर्शन में शामिल विदुषी ने बंदिशों पर सवाल उठाया। शाम 6 या 7 बजे के बाद पार्क न जाने को कहा जाता है। उनके मुताबिक यह समस्या का समाधान नहीं है।
परवरिश पर सवाल, बेटों को सीख
प्रदर्शन करने वाली महिलाओं के मुताबिक कमेंटबाजी रोकने के लिए परिवारों को भी ध्यान देना होगा। बेटों के व्यवहार और परवरिश पर नजर जरूरी है।
उनके मुताबिक महिलाओं को यह न बताएं कि कब और कहां जाएं। बेटों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाया जाए। अगर बेटियों पर पाबंदी लगे, तो क्या बेटों का व्यवहार अपने आप सुधर जाएगा? प्रदर्शनकारियों का संदेश इसी सवाल पर टिका था।
किसी एक पुरुष के खिलाफ नहीं, समाज से
यह patriarchy (पितृसत्ता) के खिलाफ संदेश था। पोस्टर में हिंसा का कोई संदेश नहीं है। यह पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ प्रदर्शन था, किसी एक पुरुष के खिलाफ नहीं।
दिल्ली और जयपुर का जिक्र क्यों?
अब जरा पीछे चलते हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाएं पहले भी कई मुद्दों पर प्रदर्शन कर चुकी हैं। महिला सुरक्षा भी उनमें शामिल रही। लेकिन उनकी आवाज प्रभावी तरीके से सरकार तक नहीं पहुंच रही।
विदुषी ने दिल्ली और जयपुर में हो रहे महिला सुरक्षा प्रदर्शनों का जिक्र किया। उनके मुताबिक आंदोलन को अब व्यापक स्तर पर ले जाना जरूरी है।
दिल्ली में Smash the Patriarchy के चलते हुए थे प्रदर्शन
दिल्ली में महिला सुरक्षा और पितृसत्ता के खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए। ये प्रदर्शन साउथ दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न के विरोध में हुए।
छात्राओं ने सुरक्षित सार्वजनिक स्थान, बेहतर स्ट्रीट लाइट और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं की आवाजाही और आजादी पर पाबंदियां लगाने के बजाय अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
इस दौरान Smash the Patriarchy और “It's a dress not a yes” जैसे नारे भी लगाए गए।