भारत में फेमिनिस्ट मूवमेंट की नई शुरुआत: क्या सीजेपी प्रोटेस्ट जैसा बन पाएगा दिल्ली में छात्राओं का प्रदर्शन
Arohi Raj | Sootr Creatives | Oct 01, 2026, 18:42 IST
वुमंस सेफ्टी के बैनर तले स्मैश द पैट्रियार्की मार्च हुआ।
दिल्ली में छात्राओं का प्रदर्शन लगातार जारी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सीजेपी प्रोटेस्ट की तरह यह फेमिनिस्ट मूवमेंट की लहर बन पाएगी। बता दें LSR, गार्गी और कमला नेहरू कॉलेज के बाद अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज की छात्राएं सड़क पर उतरी हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या CJP के बाद यह भी बड़ा जन आंदोलन बन जाएगा।
क्या यह फेमिनिस्ट मूवमेंट भारत की शुरुआत है
एक रिसर्च के अनुसार, 2012 के निर्भया आंदोलन के बाद दुष्कर्म कानूनों में बदलाव हुए थे। साइबर फेमिनिज्म अक्सर किसी घटना की प्रतिक्रिया में उठता है और जल्दी ठंडा भी पड़ सकता है। इसलिए सवाल बना रहता है कि क्या ये प्रदर्शन एक घटना के बाद का उबाल है या स्थायी मांगों का आंदोलन है।
अब नजर तीन बातों पर रहेगी। पहली, क्या अलग-अलग कॉलेज एक मंच पर आते हैं। दूसरी, कॉलेज प्रशासन और सरकार मांगों पर क्या कदम उठाते हैं। तीसरी, 16 दिसंबर की हाईकोर्ट सुनवाई में क्या सामने आता है।
आस्था कुंज पार्क मामला क्यों बना वजह
छात्राओं की मांगें क्या हैं
ज्ञापन में क्या रखा गया
HC ने कैब ऐप कंपनियों से मांगा जवाब
रात में कैब बुक करने वाली महिला की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? अगर ऐप पर बुक कैब में ड्राइवर की जगह कोई और चला रहा हो, तो निगरानी कौन करेगा
By: दिल्ली हाईकोर्ट
CJP आंदोलन जैसा रूप ले सकता है मार्च
CJP का प्रदर्शन कितना बड़ा हुआ
एक रिपोर्ट के मुताबिक 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए और करीब 70 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए थे। मामला संसद में भी उठा और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने CJP प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया था। यानी CJP के आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक समर्थन मिला और संसद तक असर दिखा था।
छात्राओं के प्रदर्शन में क्या अलग है
लेकिन इन दोनों आंदोलन में एक और फर्क है। CJP ने कहा है कि वह फिलहाल चुनावी राजनीति में नहीं उतरेगी और दबाव समूह की तरह काम करेगी। वहीं, छात्राओं के प्रदर्शन में ऐसी रणनीति अभी सामने नहीं आई है।
यह खबर क्यों जरूरी है
FAQs
- क्या महिलाओं का प्रदर्शन एक स्थायी आंदोलन बन सकता है?
महिलाओं के प्रदर्शन को लेकर सवाल है कि क्या ये सिर्फ एक घटना की प्रतिक्रिया हैं या स्थायी मांगों का आंदोलन बन सकता है। आकलन किया जा रहा है कि यह प्रदर्शन आगे चलकर एक स्थायी आंदोलन का रूप ले सकता है। - आस्था कुंज पार्क मामले में क्या हुआ था?
आस्था कुंज पार्क मामले में 21 सितंबर को एक 17 साल की युवती से गैंगरेप के आरोप लगे थे। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र 23 सितंबर को सड़कों पर उतरे और प्रदर्शन किया। पुलिस ने इसकी जांच शुरू की और मामले में कार्रवाई जारी है। - हाईकोर्ट में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर क्या कार्रवाई हुई है?
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर उबर, ओला और रैपिडो कैब कंपनियों से जवाब मांगा है। इसके तहत 24x7 कमांड और कंट्रोल सेंटर, SOS पर मदद, और ड्राइवर की लाइव लोकेशन के लिए मांगे की गई हैं। अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।
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