देश में 6 साल में 54 लाख साइबर ठगी की शिकायतें, केस दर्ज सिर्फ सवा लाख, संसद की रिपोर्ट में खुलासा
Aman Vaishnav | Sept 19, 2026, 10:12 IST
भारत में साइबर फ्रॉड के केस
देश में साल 2019 से 2024 के बीच साइबर अपराध की लगभग 54 लाख शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन पुलिस ने सिर्फ एक लाख 30 हजार मामलों में ही FIR दर्ज की। साल 2024 में हर दिन औसतन 6,124 शिकायतें सामने आईं, जबकि रोजाना सिर्फ 149 मुकदमों की ही एफआईआर लिखी गई।
समझें क्या है पूरा मामला...
- देश में साइबर क्राइम की शिकायतें छह साल में 78 गुना बढ़ गई हैं।
- इसके बावजूद एफआईआर दर्ज होने की दर बेहद कम है।
- संसदीय समिति की रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा हुआ है।
- रिपोर्ट के मुताबिक एनसीआरबी का डेटा जमा करने का तरीका ही खामियों से भरा है।
- इससे असली अपराधों का बड़ा हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रह जाता है।
यह जानकारी राज्यसभा की गृह मामलों से जुड़ी स्थायी समिति की रिपोर्ट में सामने आई है। समिति ने सरकार से इस पर तुरंत कदम उठाने को कहा है।
शिकायतें 78 गुना बढ़ीं
समिति के 31 सदस्यीय पैनल के अध्यक्ष डॉ. राधामोहन दास आग्रवाल ने इस पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक पुलिस प्रणाली की ढिलाई और डेटा जुटाने के गलत तरीकों की वजह से असली अपराध रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो पाते। समिति ने सरकार के उन दावों पर भी सवाल उठाए हैं जो अपराध कम होने का दावा करते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साइबर हेल्पलाइन 1930 और cybercrime.gov.in पर शिकायत करने के बाद भी लोगों को फॉलो-अप में देरी झेलनी पड़ती है। अलग-अलग राज्यों में अधिकार क्षेत्र का झगड़ा, तकनीकी जांच की कमी और शिकायत निपटाने की जटिल प्रक्रिया लोगों का भरोसा कमजोर कर रही है। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और युवाओं पर पड़ रहा है।
क्यों छूट जाते अपराध
समिति ने राज्यों की एक और गड़बड़ी की तरफ इशारा किया है। क्राइम रेट कम दिखाने के लिए कई थानों में एफआईआर की जगह नॉन-कॉग्निजेबल यानी गैर-संज्ञेय रिपोर्ट बना दी जाती है। अफसरों के दबाव में यह खेल थानों में आम हो गया है। इससे पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है।
रिपोर्ट के मुताबिक राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो केंद्र को डेटा भेजने में भी दो साल तक की देरी करते हैं। पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, असम और राजस्थान जैसे राज्यों में यह देरी सबसे ज्यादा पाई गई है। इसका नतीजा यह होता है कि संसद में सुरक्षा बजट या पुलिस सुधार पर फैसले पुराने आंकड़ों के आधार पर लिए जाते हैं।
क्या हैं सिफारिशें
समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि हर राज्य में शिकायत दर्ज करने और निपटाने की एक जैसी व्यवस्था हो। शिकायत मिलने के बाद तय समय-सीमा में कार्रवाई हो। साथ ही पुलिस भर्ती के शुरुआती स्तर पर ही साइबर सुरक्षा कोर्स अनिवार्य किया जाए।
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