बिजली कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन का पूरा हक, हाईकोर्ट के आदेश के बाद बकाया-ब्याज की मांग
सालों पुरानी है यह कहानी
दरअसल 1989 से 1998 के बीच कई लोगों को कार्यालय सहायक श्रेणी तीन के पद पर रखा गया था। उन्हें मूल वेतन 1090 रुपए तय किया गया था। वहीं उससे पहले नियुक्त लोगों का मूल 1250 रुपए था। यह अंतर कर्मचारियों को सालों तक परेशान करता रहा।
पत्र लिखे-आवेदन दिए, फिर भी कार्रवाई नहीं
इस मामले में कर्मचारियों (Electricity Employees) ने पुराने बिजली मंडल और नई कंपनियों से बार बार बात की। सरकार और ऊर्जा विभाग को भी पत्र लिखे गए।
आंतरिक शिकायत समिति में आवेदन भी दिए गए। फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 2012 में बिजली मंडल पांच अलग कंपनियों में बंट गया। कर्मचारी भी इन कंपनियों में बंट गए लेकिन वेतन का अंतर बना रहा।
अदालत का दरवाजा खटखटाया
मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारियों ने 2014 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की गई। याचिका खारिज होने के बाद अपील की गई।
इस मामले में हाईकोर्ट ने क्या कहा
बता दें कि इस मामले में 07 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने पहले वाले आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि श्रेणी तीन के कर्मचारियों को भी वही लाभ मिलना चाहिए। जो श्रेणी एक दो और चार के कर्मचारियों को मिला था।
यह लाभ पात्रता की तारीख से मिलना चाहिए। बकाया राशि पर छह प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। वेतनमान भी उसी हिसाब से सुधारा जाए।
कर्मचारी अब क्या मांग रहे
फैसले के बाद कर्मचारियों ने कंपनी के पास नया आवेदन दिया है। वे चाहते हैं कि अदालत के आदेश का पालन हो। उनका वेतन फिर से तय किया जाए। साथ ही पात्रता की तारीख से बकाया राशि मिले। छह प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान हो। आवेदन पर ग्यारह कर्मचारियों के नाम और हस्ताक्षर हैं। ये कर्मचारी जबलपुर और आसपास के इलाकों से हैं।
सैकड़ों कर्मचारी जिन्हें नहीं मिला लाभ
बता दें कि यह सिर्फ कुछ नामों की बात नहीं है। ऐसे सैकड़ों कर्मचारी हैं जिन्हें यह लाभ नहीं मिला। उनके परिवार सालों से कम वेतन पर गुजारा कर रहे हैं। अब अदालत का आदेश आने के बाद उम्मीद जगी है। कर्मचारी चाहते हैं कि कंपनी जल्दी फैसला लागू करे। देरी से उनका नुकसान और बढ़ रहा है।
जल्द ही वेतन सुधार की उम्मीद
बिजली कंपनियां पुराने मंडल की उत्तराधिकारी हैं। अदालत ने साफ कहा है कि वे लाभ दें। कर्मचारी अब इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि कंपनी जल्द ही वेतन सुधार करेगी। बकाया राशि भी समय पर मिलेगी। यह मामला समान काम के लिए समान वेतन की याद दिलाता है।
कर्मचारियों की लंबी लड़ाई
कर्मचारियों के लिए तीस साल की यह लड़ाई आसान नहीं थी। बार बार पत्र लिखे गए। आवेदन दिए गए। अदालत में सालों तक सुनवाई चली। आखिरकार हाईकोर्ट ने कर्मचारियों का पक्ष माना। अब देखना है कि कंपनी कितनी जल्दी आदेश का पालन करती है। सैकड़ों परिवार इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं।