दादी की जगह पोते को मिल सकती है अनुकंपा नियुक्ति: सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की याचिका खारिज की, एमपी हाईकोर्ट का फैसला बरकरार
Arohi Raj | Sootr Creatives | Oct 05, 2026, 15:04 IST
सुप्रीम कोर्ट ने पोते को अनुकंपा नियुक्ति देने के मामले में रेलवे की याचिका खारिज कर दी है।
अब दादा-दादी की मृत्यु पर पोता भी अनुकंपा नियुक्ति का हकदार हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले में दखल से इनकार कर दिया है। दरअसल, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन SC ने याचिका खारिज कर दी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और रेलवे की याचिका खारिज की।
- हाईकोर्ट का 25 फरवरी 2026 का फैसला बरकरार रहा।
- HC ने पोते को अनुकंपा नियुक्ति पर विचार करने का आदेश दिया था।
- मामला पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल से जुड़ा है।
- फैसला 28 सितंबर को सुनाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
बेंच ने कहा कि उसे हाईकोर्ट के फैसले में दखल का कोई उचित आधार नहीं दिखता है। इसी वजह से हाईकोर्ट का फैसला कायम है। उस फैसले में पोते की नियुक्ति पर विचार करने का आदेश था। उसमें नियम-कानून का विस्तार से जिक्र किया गया है।
क्या था पूरा मामला
पोते के पक्ष में क्या डॉक्यूमेंट थे
रेलवे ने क्यों खारिज किया दावा
हाईकोर्ट ने क्या तर्क दिया
कोर्ट ने कहा कि जितेन्द्र को एडोपडेट चाइल्ड न माना जाए, तब भी वह क्लोज रिलेटिव हैं। इसलिए वह मृत कर्मचारी के पोते होने के कारण इस कैटेगरी में आते हैं।
बार-बार दावा खारिज होने पर आपत्ति
रेलवे मृत के पोते को कब नियुक्त करता है?
यह खबर क्यों जरूरी है
कई परिवारों में दादा-दादी ही बच्चों को पालते हैं। कमाने वाले की मौत के बाद ऐसे परिवार आर्थिक संकट में आ जाते हैं। अनुकंपा नियुक्ति इसी संकट में राहत के लिए होती है। फैसला बताता है कि निकट संबंधी की श्रेणी में पोता भी आ सकता है। साथ ही यह साफ है कि नियुक्ति नीति की शर्तों के अनुसार ही मिलेगी। सरकारी कर्मचारियों के परिवारों के लिए यह जानकारी उपयोगी है।
FAQs
- सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का मुख्य विषय क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और रेलवे की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी, और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का 25 फरवरी 2026 का फैसला बरकरार रखा, जिसमें पोते जितेन्द्र वर्मा को दादी की अनुकंपा नियुक्ति पर विचार करने का आदेश दिया गया था। - जितेन्द्र वर्मा का अनुकंपा नियुक्ति का दावा क्यों खारिज किया गया था?
रेलवे ने जितेन्द्र वर्मा का अनुकंपा नियुक्ति का दावा इसलिए खारिज किया क्योंकि उसने उत्तराधिकार प्रमाणपत्र को केवल रिटायर्ड कर्मचारी के भुगतान के लिए सीमित माना और गोद लेने की वैधता पर भी सवाल उठाया। - मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति नीति के संदर्भ में क्या कहा?
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे की अनुकंपा नियुक्ति नीति के क्लॉज-तीन का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया कि निकट संबंधियों, जैसे पोते, को भी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने का प्रावधान है, और उसने 30 दिन में नियुक्ति देने का निर्देश दिया।
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