300 करोड़ दें उमंग सिंघार तो चली जाऊंगी साथ- बीना विधायक निर्मला सप्रे
नीलेश कुमार @ सागर
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- बीना विधायक निर्मला सप्रे ने 300 करोड़ रुपए का जिक्र कर एक बयान दिया है।
- उन्होंने कहा, जो बीना को जिला बनाए उस पार्टी को समर्थन दूंगी।
- निर्मला कांग्रेस की टिकट पर जीती थीं, भाजपा कार्यक्रमों में दिखती हैं।
- दल-बदल कानून के तहत उनके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लंबित है।
- कांग्रेस ने बयान को सौदेबाजी बताया, भाजपा ने अभी चुप्पी साधी है।
300 करोड़ वाले बयान ने मचाई सियासी हलचल
मध्यप्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उमंग सिंघार (मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता) 300 करोड़ रुपए दे दें, तो वह उनके साथ कांग्रेस में चली जाएंगी।
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि जो पार्टी बीना को जिला बनाएगी, वे उसी पार्टी के साथ जुड़ जाएंगी। दरअसल गुरुवार को सागर में कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची सप्रे से जब उनकी सदस्यता को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने यह बात कही।
कांग्रेस या भाजपा में से किस पार्टी के साथ
बता दें कि जब उनसे पूछा गया कि आप कांग्रेस या भाजपा में से किस पार्टी के साथ हैं, तब उन्होंने कहा कि जनता अपना फैसला दे चुकी है। अब कोर्ट जो तय करेगा, वही मंजूर होगा। कोर्ट जहां बोलेगा, मैं उसी पार्टी में चली जाऊंगी। मैं जनता के काम कर रही हूं। मैं मुख्यमंत्री और हमारे प्रभारी मंत्री को धन्यवाद देना चाहती हूं कि 300 करोड़ के विकास कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि जो बीना को जिला बनाएगा मैं उनके साथ हूं। मैं तो चाहती हूं कि उमंग सिंघार बीना को जिला बना दें...300 करोड़ के काम दे दें।
कांग्रेस की टिकट से जीतीं, भाजपा के मंच पर दिखीं
निर्मला सप्रे कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बनी थीं। लेकिन चुनाव के बाद से ही वे लगातार भाजपा के कार्यक्रमों और मंचों पर नजर आने लगीं। कई बार उन्हें भाजपा नेताओं के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में देखा गया।
इसके बाद से उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि अब तक उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता लेने की कोई पुष्टि नहीं की है।
हाईकोर्ट में दल-बदल का मामला लंबित
निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल कानून यानी एंटी-डिफेक्शन लॉ (Anti-Defection Law) के तहत जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि कांग्रेस से जीतने के बाद उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर भाजपा का समर्थन किया और भाजपा गतिविधियों में सक्रिय रहीं। यह मामला अभी भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
ऐसे में उनका यह ताजा बयान उनकी कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें दोनों बढ़ा सकता है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि निर्मला सप्रे के बयान से साफ हो गया है कि पूरा मामला राजनीतिक दबाव और सौदेबाजी का है। उनका आरोप था कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करते हुए विपक्ष के विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
भाजपा की तरफ से इस बयान पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बीना को जिला बनाने की मांग पुरानी है
बीना को जिला बनाने की मांग कोई नई नहीं है। यह मुद्दा लंबे समय से स्थानीय स्तर पर उठता रहा है और इलाके की राजनीति में इसका खासा महत्व है। निर्मला सप्रे ने अपने बयान में इसी मुद्दे को केंद्र में रखा और कहा कि वे बीना के विकास को सबसे ऊपर रखती हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बयान से आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट के दल-बदल मामले (बीना न्यूज) में आगे क्या होता है।
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