न तैरना आता था, ना सुरक्षा साधन थे, फिर भी बिट्टू ने साफ कर दी अजनार नदी
समझें क्या है पूरा मामला
- ब्यावरा के छात्र बिट्टू ने नदी सफाई शुरू की।
- 20 वर्षीय बिट्टू बीएससी के छात्र हैं।
- तैरना नहीं आने पर भी नदी में उतरे।
- सफाई अभियान में 30 हजार रुरुपए खर्च किए।
- वीडियो वायरल होने पर मिली मिश्रित प्रतिक्रिया।
मध्य प्रदेश के ब्यावरा में रहने वाले बिट्टू ने अजनार नदी ( River cleaning ) की सफाई शुरू की। बिट्टू बीएससी (BSc – Bachelor of Science) के 20 साल के छात्र हैं। उन्हें तैरना नहीं आता था, फिर भी वे नदी में उतर गए। सफाई के लिए उन्होंने अपनी जेब से 30 हजार रुपए खर्च किए। उनका वीडियो वायरल हुआ, कुछ लोगों ने तारीफ की तो कुछ ने सवाल उठाए।
कौन हैं बिट्टू
ब्यावरा शहर में एक साधारण परिवार का यह 20 साल का लड़का आजकल चर्चा में है। बिट्टू बीएससी की पढ़ाई कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने समाज के लिए कुछ अलग करने की ठानी।
उन्होंने प्रशासन या किसी संस्था का इंतजार नहीं किया। खुद ही अजनार नदी को साफ करने निकल पड़े। यह नदी शहर के एक मंदिर के पास से बहती है।
नदी में उतरने का फैसला
26 जनवरी 2026 को बिट्टू ने यह अभियान शुरू किया। मंदिर के पास बहने वाली अजनार नदी सालों से कचरे से भरी थी। पूजा सामग्री और प्लास्टिक कचरे ने नदी को कूड़ेदान बना दिया था।
सबसे बड़ी बात यह रही कि बिट्टू को तैरना नहीं आता था। इसके बावजूद वे बिना ग्लव्स और बिना सेफ्टी बूट्स के गंदे पानी में उतर गए। उन्होंने अपने हाथों से नदी से कचरा निकालना शुरू किया।
इन्फेक्शन और अपनी जेब से खर्च
बिट्टू यहीं नहीं रुके। उन्होंने नदी से निकले पूजा सामग्री के कचरे से खाद यानी कंपोस्ट बनाना शुरू किया। इससे कचरे का सही इस्तेमाल भी हो गया।
इस पूरे अभियान के लिए उन्होंने दोस्तों के साथ पैसे जोड़े। सफाई के उपकरण और डस्टबिन खरीदने में करीब 30 हजार रुपए खर्च हुए। लगातार गंदे पानी में काम करने से उनके हाथों में गंभीर इन्फेक्शन भी हो गया। इसके बावजूद उन्होंने काम बंद नहीं किया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
जब बिट्टू के इस काम का वीडियो सोशल मीडिया पर आया, तो हजारों लोगों ने उनकी तारीफ की। लोगों ने उनके जज्बे को सराहा और उन्हें प्रेरणा बताया।
हालांकि कुछ लोगों ने उन पर सवाल भी उठाए। कुछ का कहना था कि यह सब सिर्फ लाइक्स और पब्लिसिटी के लिए किया जा रहा है। इस तरह की आलोचना के बावजूद बिट्टू अपने काम में जुटे रहे।
सरनेम तबाही, लेकिन काम बना बदलाव
बिट्टू के उपनाम यानी सरनेम का मतलब है तबाही। लेकिन असल जिंदगी में वे अपनी मेहनत से जल प्रदूषण की तबाही खत्म करने में जुटे हैं।
एक आम छात्र होकर भी बिट्टू ने दिखा दिया कि बदलाव के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बस इरादे की जरूरत होती है। उनकी यह मुहिम आज भी जारी बताई जा रही है।
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