इंदौर बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में पूर्व विधायक बोले- नोटिस देने से पहले ही शेंडगे को क्यों हटाया

Sanjay Gupta | Jun 13, 2026, 19:42 IST
BJP कोर कमेटी में शेंडगे का मुद्दा
इंदौर विधानसभा चार का विवाद बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में भी उठा। हालांकि, यह मुद्दा विधायक मालिनी गौड़ ने नहीं उठाया। लेकिन उनके पास बैठे हुए पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा ने इस पर सवाल किया।

Indore. इंदौर में 6 व 7 जून को इंदौर विधानसभा 4 में विधायक मालिनी गौड़ के करीबी नेताओं का संघ के पदाधिकारी के साथ हुआ विवाद थमा नहीं है। इस मुद्दे के बाद गौड़ के करीबी वीरेंद्र शेंडगे को विधानसभा प्रभारी पद से हटा दिया गया।



साथ ही पार्टी से निष्कासन का नोटिस भी बीजेपी नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा ने भेज दिया। अब इसी नोटिस पर पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा ने कोर कमेटी की बैठक में सवाल खड़े किए।



नोटिस देने से पहले क्यों हटाया गया

बीजेपी कोर कमेटी की बैठक मे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ ही संभागीय प्रभारी, प्रदेश मंत्री गौरव रणदिवे, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा के साथ ही विधायकगण मौजूद थे। विधायक मालिनी गौड़ भी थी। इसी दौरान उनके पास बैठे हुए पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा ने कहा- मैं उत्सकुता वश एक सवाल पूछना चाहता हूं।



किसी को पहले नोटिस दिया जाता है और फिर जवाब के बाद हटाया जाता है। लेकिन वीरेंद्र शेंडगे को विधानसभा प्रभारी पद से हटाया गया और साथ ही पार्टी निष्कासन का नोटिस दिया गया। लेकिन इस पर जवाब नहीं मिला, पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा अलग है और इसे लेकर आप नगराध्यक्ष से अलग से व्यक्तिगत तौर पर चर्चा कर लीजिए।



Virendra Shendge


क्या जानबूझकर मुद्दा उठवाया गया

वहीं माना जा रहा है कि इस मामले को जानबूझकर कोर कमेटी की बैठक में उठवाया गया। क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम में विधायक गौड़ के करीबी एक-दो नहीं पूरे सात लोगों पर एफआईआर हुई। जिसमें विधानसभा प्रभारी शेंडगे के साथ ही पीए प्रणय चित्तौड़ा व अन्य पांच समर्थक थे।



वहीं इसमें शेंडगे व सौरभ उर्फ शानू दिघे के घर पर भी रविवार को अज्ञात लोगों ने हमला किया। इसमें दिघे की पत्नी ने भी पुलिस को आवेदन दिया और परमवीर राठौर, सुयश आगर, धीरज वर्मा, कृष्णाराव, नितेश व सौरभ मराठा पर गंभीर आरोप लगाए। लेकिन इस पर केस दर्ज नहीं हुआ। हिंदरक्षक संगठन के संयोजक और विधायक पुत्र एकलव्य गौड़ की क्रास एफआईआर कराने की कोशिश भी धरी रह गईं।



गौड़-खेमा खुद को पीड़ित बताने में जुटा

बैकफुट पर आया गौड़-खेमा लगातार इस मामले में खुद को पीड़ित बता रहा है। समर्थक व एफआईआर में आरोपी बने दिघे ने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर पुलिस पर मिलीभगत के आरोप लगाए साथ ही कहा कि राजनीतिक दबाव में यह केस उन पर किया गया है। उन्हें राज्य सरकार के अधीन काम करने वाली पुलिस पर भरोसा नहीं है।



पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाला

उधर पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। सूत्रों के अनुसार पुलिस इसमें दर्ज हुई एफआईआर में गिरफ्तारी नहीं ले रही है। हालांकि मामला गंभीर धाराओं (हत्या के प्रयास) में है। लेकिन केस विवेचना में होने की बात कहकर गिरफ्तारी से बच रही है। वहीं गौड़ समर्थकों के आवेदन को भी ठंडे बस्ते में डाला हुआ है और इसमें भी जांच की बात कह रही है।



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