जेंडर सर्जरी करा रहे एमपी के लड़के, अब मां भी बन सकेंगे
बदलते दौर में अब अपनी पहचान को स्वीकारना और उसे दुनिया के सामने रखना आसान होता जा रहा है। मध्यप्रदेश में इन दिनों जेंडर रीअसाइनमेंट सर्जरी (Gender Reassignment Surgery) को लेकर युवा आगे आरहे हैं।
खास बात यह है कि यह बदलाव केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कस्बों और गांवों के लड़के भी अब अपनी आंतरिक पहचान को पाने के लिए सर्जरी का सहारा ले रहे हैं। चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों का तो यहां तक मानना है कि आने वाले समय में ये युवक सर्जरी के बाद मां बनने का सुख भी प्राप्त कर सकेंगे।
सोम को थी लड़की बनने की चाहत
राजगढ़ के रहने वाले सोम (परिवर्तित नाम) की कहानी किसी फिल्म जैसी लगती है, लेकिन यह हकीकत है। जब सोमेश महज 10 साल के थे, तभी से उन्हें लड़कियों की तरह व्यवहार (Behavior) करना और उनके कपड़े पहनना पसंद आने लगा था।
परिवार को भी धीरे-धीरे समझ आने लगा कि सोमेश का शरीर भले ही पुरुष का है, लेकिन उसकी आत्मा एक स्त्री की है। 24 साल की उम्र में सोमेश ने एक बड़ा फैसला लिया और जेंडर चेंज सर्जरी करवाकर अपनी नई पहचान हासिल की।
22 से 28 वर्ष के युवक बन रहे लड़की
एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) में पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो जेंडर कंवर्जन सर्जरी (Gender Conversion Surgery) के मामलों में तेजी आई है। यहां अब तक 5 सफल सर्जरी की जा चुकी हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन सभी मामलों में लड़कों की उम्र 22 से 28 वर्ष के बीच है। डॉक्टरों के अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि युवाओं में अपनी जेंडर आइडेंटिटी (Gender Identity) को लेकर जागरूकता और साहस बढ़ा है।
बॉटम सर्जरी की प्रक्रिया सबसे जटिल
एम्स भोपाल के स्त्री रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार डोरा बताते हैं कि यह सर्जरी चिकित्सा विज्ञान की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में से एक है। बॉटम सर्जरी (Bottom Surgery) में पुरुष जननांगों को हटाकर महिला जननांगों का निर्माण किया जाता है।
डॉ. डोरा के अनुसार, हमारी पढ़ाई के समय इसका ज्यादा एक्सपोजर नहीं था, लेकिन हमने विशेष कॉन्फ्रेंस और स्किल डेवलपमेंट (Skill Development) कोर्स के जरिए इसकी ट्रेनिंग ली है। जहां प्राइवेट अस्पतालों में इस प्रक्रिया का खर्च 8 से 10 लाख रुपए तक आता है, वहीं एम्स में यह सुविधा फिलहाल नि:शुल्क उपलब्ध है।
इंदौर के युवक की हुई थी गलत सर्जरी
इंदौर के एक 28 वर्षीय युवक के लिए महिला बनने का सपना तब मुसीबत बन गया जब उसकी सर्जरी फेल हो गई। उसने कानपुर में सर्जरी कराई थी, जहां उसकी टॉप और बॉटम सर्जरी दोनों ही गलत हो गई। अहमदाबाद में भी निराशा हाथ लगने के बाद वह एम्स भोपाल पहुंचा।
वहां 24 अप्रैल को डॉक्टरों की टीम ने आठ घंटे तक जटिल ऑपरेशन कर उसके अंगों को नया रूप दिया। डॉक्टरों का कहना है कि गलत सर्जरी से संवेदना (Sensation) खोने और अंदरूनी अंगों में चोट लगने का गंभीर खतरा रहता है।
क्या जेंडर चेंज के बाद संभव है मां बनना?
डॉ. अरुण कुमार डोरा ने बताया कि मेडिकल साइंस जिस गति से आगे बढ़ रहा है, भविष्य में ट्रांसजेंडर महिलाओं में यूट्रस ट्रांसप्लांट (Uterus Transplant) संभव हो सकेगा। डोनेटेड एग्स और स्पर्म की मदद से वे न केवल एक महिला का शरीर पा सकेंगे, बल्कि गर्भधारण (Conception) कर मां बनने का अहसास भी कर सकेंगे।
जेंडर चेंज सर्जरी की पूरी प्रक्रिया
यह केवल एक ऑपरेशन नहीं है, बल्कि एक लंबी यात्रा है:
- काउंसलिंग (Counseling): मानसिक मूल्यांकन और कानूनी दस्तावेजों की तैयारी।
- हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy): दवाओं के जरिए शरीर में स्त्री गुणों का विकास। इसके लिए नशा छोड़ना अनिवार्य है।
- सर्जरी (Surgery): इसमें चेहरे का आकार बदलना (FFS), ब्रेस्ट इंप्लांट और जननांग पुनर्निर्माण (GRS) शामिल है।
- फॉलो-अप (Follow-up): सर्जरी के बाद नियमित चेकअप और दवाएं।
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