छोटे शहरों में बढ़ा ब्रांडेड शॉपिंग का क्रेज, कंपनियां भी इन्हें बना रही अपनी पसंद
समझें क्या है पूरा मामला...
- इस फेस्टिव सीजन में बड़े ब्रांड्स की नजर अब छोटे शहरों पर ज्यादा है।
- टीवी, फ्रिज, मोबाइल के आधे कंज्यूमर लोन अब टॉप-100 शहरों के बाहर मिल रहे हैं।
- डायरेक्ट टू कंज्यूमर ब्रांड्स को तीन में से दो नए ऑर्डर छोटे शहरों से मिल रहे हैं।
- ऑनलाइन बाजार में भी टियर-2, टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।
- कंपनियां अब स्टॉक, स्टोर और मार्केटिंग की रणनीति स्थानीय मांग के हिसाब से बदल रही हैं।
छोटे शहरों में बढ़ी खरीदारी
इस फेस्टिव सीजन (festive season) में देश के बड़े ब्रांड्स की नजर बदल गई है। पहले सिर्फ दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगर अहम माने जाते थे। अब इंदौर, नागपुर, सूरत और भुवनेश्वर जैसे शहर भी उतने ही जरूरी हो गए हैं। इसकी बड़ी वजह क्रेडिट डेटा से सामने आई है। क्रिफ हाई मार्क (CRIF High Mark) की रिपोर्ट में यह साफ दिख रहा है। टीवी, फ्रिज और मोबाइल जैसी चीजें खरीदने के लिए दिए जा रहे हर दो कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में से एक अब टॉप-100 शहरों के बाहर दिया जा रहा है। यानी छोटे शहरों में खरीदारी की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है।
डी2सी (D2C) यानी सीधे ग्राहक को सामान बेचने वाले ब्रांड्स की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। इन ब्रांड्स को मिलने वाले हर तीन नए ऑर्डर में से दो टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं। इस बदलाव ने कंपनियों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। अब कंपनियां स्थानीय मांग के हिसाब से स्टॉक तय कर रही हैं। क्षेत्रीय भाषाओं में प्रचार भी बढ़ाया जा रहा है। छोटे शहरों में नए स्टोर और डिलीवरी नेटवर्क पर भी जोर दिया जा रहा है।
टॉप-100 शहरों के बाहर बढ़ा लोन
क्रिफ हाई मार्क के आंकड़े इस बदलाव को साफ दिखाते हैं। पहली तिमाही 2025 में कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन की कुल राशि में टॉप-100 शहरों के बाहर के इलाकों की हिस्सेदारी 39.2 प्रतिशत थी। यह पहली तिमाही 2026 में बढ़कर 40.8 प्रतिशत हो गई। पहली तिमाही 2027 तक यह हिस्सेदारी 43.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। लोन की संख्या के मामले में भी यही रुझान दिखा। 2025 में यह हिस्सेदारी 44.3 प्रतिशत थी, जो 2026 में 46.9 प्रतिशत और 2027 में 48.3 प्रतिशत हो गई। औसत लोन राशि भी 18 हजार 59 रुपए से बढ़कर 20 हजार 89 रुपए हो गई।
वहीं टॉप 51 से 100 शहरों की तस्वीर थोड़ी अलग है। यहां लोन की हिस्सेदारी लगभग स्थिर रही है। 2025 में लोन राशि की हिस्सेदारी 12.9 प्रतिशत थी, जो 2027 में मामूली गिरावट के साथ 12.8 प्रतिशत रही। लोन की संख्या की हिस्सेदारी भी 12.3 प्रतिशत से घटकर 11.9 प्रतिशत रह गई। हालांकि औसत लोन राशि जरूर बढ़ी है। यह 21 हजार 295 रुपए से बढ़कर 23 हजार 929 रुपए हो गई। यानी इन शहरों में लोगों ने महंगे उत्पाद खरीदना शुरू किया है।
ऑटो और पर्सनल लोन में भी उछाल
सिर्फ कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन ही नहीं, ऑटो लोन में भी बड़ा उछाल देखा गया है। यह उछाल खासतौर पर 50 हजार रुपए तक के छोटे ऑटो लोन में दिखा। टॉप 51 से 100 शहरों में ऑटो लोन में 112.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। पर्सनल लोन में यह बढ़त 53.1 प्रतिशत और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में 36.9 प्रतिशत रही। टॉप-100 शहरों से बाहर के इलाकों में भी यही रुझान दिखा। यहां ऑटो लोन 64.7 प्रतिशत, पर्सनल लोन 58.5 प्रतिशत और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन 51.5 प्रतिशत बढ़ा। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि छोटे शहरों में लोगों की खरीद क्षमता तेजी से बढ़ रही है।
ऑनलाइन बाजार में भी छोटे शहर आगे
कर्ज के आंकड़ों में दिख रही यह रफ्तार अब ऑनलाइन शॉपिंग में भी नजर आ रही है। यूनिकॉमर्स (Unicommerce) ने छह हजार से ज्यादा डायरेक्ट टू कंज्यूमर ब्रांड्स के 40 करोड़ ऑर्डर का विश्लेषण किया है। इस विश्लेषण से पता चला कि वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़े डी2सी ऑर्डर में टियर-2 और टियर-3 शहरों का योगदान 66 प्रतिशत रहा।
देशभर में डायरेक्ट टू कंज्यूमर ऑर्डर सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़े। इनकी बिक्री मूल्य में हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक पहुंच गई। खास बात यह है कि यह बढ़त सिर्फ महंगे ऑर्डर की वजह से नहीं है। बिक्री की मात्रा में भी छोटे शहरों की हिस्सेदारी 72 प्रतिशत रही, जो इस बदलाव को और मजबूत करती है।
मौजूदा फेस्टिव सीजन में भी यही रुझान साफ दिख रहा है। मीशो (Meesho) के मुताबिक रक्षाबंधन पर उसके 73 प्रतिशत ऑर्डर गैर-महानगरीय बाजारों से आए। इस दौरान कुल ऑर्डर सालाना 36 प्रतिशत और बिक्री मूल्य 38 प्रतिशत बढ़ा।
फ्लिपकार्ट (Flipkart) की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2025 में प्री-नवरात्र डायरेक्ट टू कंज्यूमर ऑर्डर सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़े थे। कंपनियों को उम्मीद है कि 2026 में दिवाली के आसपास बिक्री में 35 से 40 प्रतिशत तक अतिरिक्त बढ़त देखने को मिल सकती है।
ब्रांड्स बदल रहे रणनीति
छोटे शहरों में बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनियां अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही हैं। अब हर इलाके के त्योहार, पसंद और खरीदारी के तरीके के हिसाब से प्रचार तय किया जा रहा है। स्टोर नेटवर्क भी इसी आधार पर बढ़ाया जा रहा है। लिवाइस (Levi's) की मार्केटिंग हेड निशा खत्री के मुताबिक कंपनी 60 शहरों में 100 नए स्टोर जोड़ने जा रही है। इनमें छोटे शहरों की बड़ी हिस्सेदारी रहेगी। जूलरी ब्रांड कैरेटलेन (CaratLane) की सीईओ (CEO) शैफाली गौतम भी कहती हैं कि अब क्षेत्रों की मांग के अनुसार ही स्टॉक तय किया जा रहा है।
मेटा (Meta) के एक अध्ययन में भी यह बदलाव साफ दिखता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के 63 प्रतिशत फेस्टिव खरीदार स्थानीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करना पसंद करते हैं। इसके बावजूद दुकान से खरीदारी की पसंद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यही वजह है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में कंपनियां अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं। कुल मिलाकर, यह पूरा डेटा बताता है कि आने वाले सालों में छोटे शहर ही देश के फेस्टिव बाजार की दिशा तय करेंगे।
ये खबरें भी पढ़िए...
भारत के लिए खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? ईरानी राष्ट्रपति ने रखी ये बड़ी शर्त...
फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम, लाल सागर से होर्मुज तक छिड़ा संग्राम
इस बार नहीं पड़ेगी कड़ाके की ठंड! डेंजर जोन में आया भारत, अल नीनो का दिखेगा रौद्र रूप
जहरीली शराब कांड से भी नहीं लिया सबक, भोपल में मंत्रालय के सामने ही बिक रही अवैध शराब