बस ऑपरेटर का सरकार को अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानी तो अनिश्चितकालीन हड़ताल!
समझें क्या है पूरा मामला
- सागर में 55 जिलों के बस ऑपरेटर जुटे।
- ऑपरेटरों ने सरकार को 7 अगस्त तक समय दिया।
- मांगें नहीं मानीं तो हड़ताल शुरू होगी।
- 8 अगस्त रात से बसें बंद हो सकती हैं।
- किराया वृद्धि और राष्ट्रीयकरण योजना मुख्य मुद्दे हैं।
सागर बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन की प्रदेश स्तरीय बैठक रविवार को सागर में हुई। इसमें प्रदेश के 55 जिलों के बस ऑपरेटर शामिल हुए। सभी ने सर्वसम्मति से सरकार को अंतिम चेतावनी देने का निर्णय लिया। बैठक आदर्श गार्डन, सागर में आयोजित की गई थी।
तय किया गया कि अगर 7 अगस्त तक मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो हड़ताल शुरू होगी। यह हड़ताल 8 अगस्त की रात 12 बजे से लागू होगी। इस दौरान प्रदेशभर की निजी बसों का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा। यह हड़ताल अनिश्चितकालीन रहने की बात कही गई है।
किराया वृद्धि बना सबसे बड़ा मुद्दा
एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन ने बताया कि बैठक में सात सूत्रीय एजेंडे पर चर्चा हुई। इनमें सबसे अहम मुद्दा बस किराए में लंबे समय से लंबित बढ़ोतरी का रहा। संचालकों का कहना है कि यह मांग कई वर्षों से अटकी हुई है।
बस संचालकों के अनुसार साल 2021 में डीजल की कीमत करीब 69 रुपए प्रति लीटर थी। अब यह 100 रुपए प्रति लीटर से भी ज्यादा हो चुकी है। इसके बावजूद बस किराए में कोई संशोधन नहीं किया गया। संचालकों का कहना है कि यह स्थिति उनके लिए मुश्किल बन गई है।
पड़ोसी राज्यों में समय-समय पर किराया बढ़ाया गया है। हाल ही में महाराष्ट्र में भी बस किराया बढ़ाकर करीब 2 रुपए प्रति यात्री प्रति किलोमीटर कर दिया गया है। बस संचालकों का तर्क है कि मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही कदम उठाया जाना चाहिए।
राष्ट्रीयकरण योजना का भी विरोध
बैठक में बस ऑपरेटर्स ने प्रस्तावित राष्ट्रीयकरण योजना का कड़ा विरोध किया। यह योजना 7 जुलाई 2026 को प्रकाशित राजपत्र (Gazette – सरकारी अधिसूचना पत्र) के माध्यम से सामने आई थी। संचालकों का कहना है कि इससे निजी बस ऑपरेटरों और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित होगा। इसलिए उन्होंने इस योजना को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
सात सूत्रीय मांगों में क्या-क्या शामिल
किराया वृद्धि के अलावा भी कई मांगें सरकार के सामने रखी गई हैं। इनमें टेंडर के जरिए रॉयल्टी वसूली की प्रक्रिया रोकने की मांग शामिल है। पहले से पंजीकृत वाहनों को वैध मानने की मांग भी की गई है। परिवहन कार्यालयों में लंबित कामों को समय पर निपटाने की बात भी उठाई गई।
एक अहम मांग 15 साल पुराने स्टेज कैरिज वाहनों से जुड़ी है। संचालक चाहते हैं कि इन वाहनों की आयु सीमा खत्म कर दी जाए। इसके बजाय फिटनेस अवधि तक परमिट जारी रखने की व्यवस्था हो। संचालकों का मानना है कि इससे उनका आर्थिक नुकसान कम होगा।
प्रदेशभर के परिवहन पर पड़ सकता है असर
जय कुमार जैन ने कहा कि प्रदेश के सभी 55 जिलों के प्रतिनिधि इस फैसले पर एकमत हैं। सभी ने मिलकर सरकार को 7 अगस्त तक की समय सीमा दी है। अगर इस दौरान कोई ठोस फैसला नहीं हुआ तो पूरे प्रदेश में निजी बसें बंद हो जाएंगी।
इससे आम यात्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासतौर पर उन इलाकों में जहां निजी बसें ही परिवहन का मुख्य साधन हैं। प्रदेश सरकार पर अब समय रहते फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है।
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