क्या कैबिनेट बैठकें बन रही हैं पॉलिटिकल टूरिज्म मॉडल ? अब गांव-गांव से होंगे बड़े फैसले

Ramanand Tiwari | Jul 18, 2026, 22:36 IST
क्या कैबिनेट बैठकें बन रही हैं पॉलिटिकल टूरिज्म मॉडल
मध्य प्रदेश में कैबिनेट बैठकें अब भोपाल से बाहर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर हो रही हैं। सरकार इसे जनता से जुड़ने का नया मॉडल बता रही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • एमपी में कैबिनेट बैठकें भोपाल से बाहर हो रही हैं।
  • सरकार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है।
  • जगदीशपुर में 19 जुलाई को बैठक प्रस्तावित है।
  • सरकार इसे प्रशासन जनता के करीब लाने का मॉडल बता रही है।
  • ढाई साल में सात बार स्थान बदलकर बैठकें हुई हैं।

कैबिनेट बैठकें सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं

मध्य प्रदेश में अब कैबिनेट बैठकें सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं हैं। सरकार लगातार ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और दूरदराज के इलाकों में मंत्रिपरिषद की बैठकें कर रही है। इससे एक तरफ स्थानीय विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने का दावा किया जा रहा है, वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह प्रशासन को जनता के करीब ले जाने का नया मॉडल है। रविवार 19 जुलाई को प्राचीन धरोहरों वाले जगदीशपुर गांव में होने वाली कैबिनेट बैठक इसी प्रयोग की अगली कड़ी है।



सरकार का नया प्रशासनिक मॉडल?

मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल में कैबिनेट बैठकों का स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है। अब मंत्रालय की चारदीवारी से बाहर निकलकर सरकार ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनजातीय क्षेत्रों में मंत्रिपरिषद की बैठकें कर रही है।



सरकार का तर्क है कि इससे विकास के फैसले सीधे क्षेत्रीय जरूरतों से जुड़ेंगे। साथ ही जिन स्थानों पर बैठकें हो रही हैं, वहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आएगी।



जगदीशपुर क्यों बना अगला पड़ाव?

भोपाल के पास स्थित प्राचीन गांव जगदीशपुर में 19 जुलाई को कैबिनेट बैठक प्रस्तावित है। सरकार का मानना है कि ऐसे स्थलों पर बैठक करने से लोगों का ध्यान स्थानीय धरोहरों की ओर जाएगा और भविष्य में पर्यटन को भी फायदा मिलेगा।



ढाई साल में सात बार बदली कैबिनेट की लोकेशन

सीएम मोहन यादव सरकार ने नियमित भोपाल बैठकों के अलावा प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सात मंत्रिपरिषद बैठकें आयोजित की हैं। इन बैठकों में सिर्फ स्थान नहीं बदले, बल्कि स्थानीय जरूरतों और जनकल्याण से जुड़े फैसलों को भी प्राथमिकता देने का दावा किया गया।



उज्जैन में भी कैबिनेट बैठक प्रस्तावित

सरकार सामान्य कैबिनेट के साथ कृषि कैबिनेट को भी अलग-अलग अंचलों में आयोजित करने की योजना पर काम कर रही है। इसी क्रम में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी कैबिनेट बैठक प्रस्तावित है।



विरासत से जोड़ने की कोशिश

अब तक जिन स्थानों पर बैठकें हुईं, उनका चयन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखकर किया गया। इनमें रानी दुर्गावती, देवी अहिल्याबाई, राजा भभूत सिंह और जनजातीय संस्कृति से जुड़े स्थान प्रमुख रहे हैं।



किन-किन जगहों पर हुईं कैबिनेट बैठकें?

  • 3 जनवरी 2024 – जबलपुर (शक्ति भवन)
  • 5 अक्टूबर 2024 – सिंग्रामपुर, दमोह
  • 24 जनवरी 2025 – महेश्वर, खरगोन
  • 20 मई 2025 – राजवाड़ा, इंदौर
  • 3 जून 2025 – पचमढ़ी, नर्मदापुरम
  • 9 दिसंबर 2025 – खजुराहो, छतरपुर
  • 2 मार्च 2026 – नागलवाड़ी, बड़वानी
  • 19 जुलाई 2026 – जगदीशपुर (प्रस्तावित)

भोपाल के बाहर भी कैबिनेट बैठकें

मध्य प्रदेश सरकार अब भोपाल के बाहर भी कैबिनेट बैठकें आयोजित कर रही है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को इसके लिए प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासन जनता के करीब पहुंचेगा। सरकार पर्यटन और स्थानीय पहचान बढ़ाने का भी दावा कर रही है। उज्जैन में भी कैबिनेट बैठक की तैयारी चल रही है।



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