केनरा बैंक में 1.70 करोड़ की धोखाधड़ी, EOW ने की बैंक अधिकारियों सहित 5 पर FIR दर्ज

Jitendra Shrivastava | May 15, 2026, 18:11 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. EOW इंदौर ने केनरा बैंक में 1.70 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी में 5 आरोपियों पर FIR दर्ज की है। फर्जी रजिस्ट्री और बिना सत्यापन के लोन दिया गया।

समझें पूरा मामला...

  • केनरा बैंक में 1.70 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई।
  • 23 लाख की जमीन को 1.25 करोड़ रुपए में दिखाया।
  • बैंक अधिकारियों ने बिना जांच के लोन दिया।
  • EOW इंदौर ने 5 आरोपियों पर FIR दर्ज की।
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में भी मामला दर्ज।

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) इंदौर ने केनरा बैंक धोखाधड़ी (Canara Bank Fraud) के एक बड़े मामले में पांच आरोपियों पर FIR दर्ज की है। एक प्रिंटिंग व्यवसायी ने फर्जी रजिस्ट्री (fake registration) से 23 लाख की जमीन को 1.25 करोड़ रुपए में दिखाया। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत (bank officials collusion) से 1.70 करोड़ का फर्जी लोन मंजूर हो गया।



क्या है पूरा मामला

इंदौर में केनरा बैंक (Canara Bank) में बड़ी धोखाधड़ी सामने आई है। मेसर्स एवी ग्राफिक्स एण्ड ट्रेडिंग के प्रोपराइटर विमलेश चतुर्वेदी मुख्य आरोपी हैं। वे विजय नगर, इंदौर के निवासी हैं। उन्होंने मनीष बाग कॉलोनी के भूखंड क्रमांक 2-बी के फर्जी दस्तावेज बनवाए। यह भूखंड 1000 वर्गफीट का था।



इस जमीन की असली बाजार कीमत मात्र 23 लाख रुपए थी, लेकिन फर्जी रजिस्ट्री में इसे 1.25 करोड़ रुपए में खरीदा हुआ दिखाया गया। HDFC बैंक के चेक का उल्लेख करते हुए नकली रजिस्ट्री (fake registration) तैयार कराई गई। वास्तव में केवल 13,75,000 रुपए का ही भुगतान हुआ था।



कैसे उठाया फर्जी लोन

21 दिसंबर 2023 को विमलेश चतुर्वेदी ने केनरा बैंक में आवेदन दिया। उन्होंने रंगीन प्रिंटिंग मशीनें खरीदने का बहाना बनाया। कनाड़िया रोड शाखा में 1.75 करोड़ रुपए के टर्म लोन की मांग की गई। साथ में 20 लाख की सीसी लिमिट (CC Limit) भी मांगी गई।



तत्कालीन शाखा प्रबंधक तरुण भार्गव ने बैंक के LAPS एप पर अपनी व्यक्तिगत आईडी से यह लोन आवेदन अपलोड किया। तरुण भार्गव बीकानेर, राजस्थान के निवासी हैं।



बैंक के नियम के अनुसार एक करोड़ से अधिक के लोन में संयुक्त निरीक्षण ज़रूरी होता है। लेकिन तरुण भार्गव ने यह नियम तोड़ा। उन्होंने अकेले ही स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार कर दी।



बैंक अधिकारियों की मिलीभगत

29 दिसंबर 2023 को प्रोसेसिंग अधिकारी खुशबू सिलावट ने बड़ी लापरवाही की। वे वडोदरा, गुजरात की निवासी हैं। उन्होंने बिना किसी वास्तविक निरीक्षण के ऑफिस नोट में यूनिट सत्यापन की गलत टिप्पणी लिख दी।



30 दिसंबर 2023 को सेक्शन हेड कौशिक कुमार प्रबुद्ध ने लोन मंजूरी दी थी। वे जिला अरवल, बिहार के निवासी हैं और उनकी उम्र 70 वर्ष है। उसी दिन मंडल प्रबंधक शर्मिष्ठा सिंह ने भी स्वीकृति दे दी। वे जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश की निवासी हैं। चारों बैंक अधिकारियों ने बैंक नियमों का खुलेआम उल्लंघन (bank rules violation) किया।



नियमों की अनदेखी से नुकसान

बैंक के MSME सुलभ कार्यालय से स्वीकृति लेने का नियम था। लेकिन सीधे शाखा से ही उसी दिन 1.25 करोड़ का टर्म लोन जारी कर दिया गया। मशीनें स्थापित होने से पहले ही 20 लाख रुपए की सीसी लिमिट भी चालू कर दी गई। न कोई भौतिक सत्यापन हुआ, न वैध मूल्यांकन कराया गया।



किसी भी अधिकारी ने इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की। यह सब जानबूझकर अपने आर्थिक हितों के लिए किया गया। इस पूरी साजिश से बैंक को 1.70 करोड़ की बैंक फ्रॉड हानि (bank fraud loss) पहुंचाई गई।



EOW जांच में खुला सच

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ EOW इंदौर (Economic Offences Wing Indore) ने गहन जांच की। जांच में सामने आया कि 12 अक्टूबर 2023 को उस संपत्ति की बाजार कीमत केवल 23 लाख रुपए थी।



लोन के लिए उसे 1.25 करोड़ रुपए में दर्शाया गया था। यह एक सुनियोजित साजिश थी। सभी आरोपियों ने मिलकर बैंक को चूना लगाया। पद का दुरुपयोग कर अवैध लाभ कमाया गया।



किन धाराओं में FIR दर्ज

पांचों आरोपियों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। धारा 420 धोखाधड़ी (cheating) के लिए लगाई गई है। धारा 467 मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी (forgery) के लिए है।



धारा 468 धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी के लिए है। धारा 471 जाली दस्तावेज असली की तरह इस्तेमाल करने के लिए लगाई गई है। धारा 120-बी आपराधिक षड्यंत्र (criminal conspiracy) के लिए है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7-सी भी लगाई गई है। प्रकरण की विवेचना जारी है।



ये हैं पांचों आरोपी...

  1. विमलेश चतुर्वेदी प्रोपराइटर, मेसर्स एवी ग्राफिक्स, इंदौर।
  2. तरुण भार्गव तत्कालीन शाखा प्रबंधक, केनरा बैंक, कनाड़िया रोड।
  3. कौशिक कुमार प्रबुद्ध तत्कालीन सेक्शन हेड, केनरा बैंक, सुलभ कार्यालय भमोरी।
  4. खुशबू सिलावट तत्कालीन प्रोसेसिंग अधिकारी, केनरा बैंक, सुलभ कार्यालय भमोरी।
  5. शर्मिष्ठा सिंह तत्कालीन मंडल प्रबंधक, केनरा बैंक, सुलभ कार्यालय भमोरी।

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