NTA के बाद CBSE से नाराज 18 लाख छात्र, स्कैन कॉपियां ब्लर, 15 ग्रेस अंक देने की मांग
INDORE. सीबीएसई के 12वीं के रिजल्ट में पहली बार इतनी गिरावट सामने आई है। इसके चलते कई युवा जेईई परीक्षा के लिए कटऑफ अंक तक भी नहीं पहुंच सके हैं। इसकी बड़ी वजह सामने आई है- पहली बार लागू किया गया OSM यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम।
इसका खुलासा तब हुआ जब छात्रों ने री-इवैल्युएशन प्रक्रिया के बाद अपनी कॉपियां पाईं। ये स्कैन कॉपियां इतनी ब्लर हैं कि इन्हें पढ़ना ही मुश्किल है। अब सवाल उठ रहा है कि ऐसे में 50 वर्ष से अधिक उम्र वाले टीचर्स ने इन्हें चेक कैसे किया होगा?
खराब स्कैन क्वालिटी के कारण इनमें नंबर देना टीचर्स के लिए संभव ही नहीं था। इसी वजह से यह रिजल्ट गिरा है। अब छात्रों और अभिभावकों ने 15-20 ग्रेस अंक देने की मांग की है।
क्या है OSM सिस्टम
परीक्षा खत्म होने के बाद इस बार कॉपियों को हाथ से चेक नहीं किया गया। सबसे पहले इन्हें रीजनल सेंटर्स पर भेजा गया, जहां तेज स्पीड वाली मशीनों से स्कैन करके कॉपियों को कंप्यूटर फाइल (डिजिटल फॉर्मेट) में बदला गया। इसके बाद इन सभी फाइलों को मेन सर्वर पर अपलोड कर दिया गया।
फिर कॉपी चेक करने वाले टीचर्स को एक आईडी और पासवर्ड दिया गया। टीचर्स ने इवैल्यूएशन सेंटर (मूल्यांकन केंद्र) जाकर कंप्यूटर पर अपना अकाउंट खोला और स्क्रीन पर ही कॉपियां चेक कीं।
इस सिस्टम में क्या परेशानी आई
स्कैन कॉपियां सामने आने के बाद साफ हुआ कि कॉपियों के पन्ने सही स्कैन नहीं हुए और ब्लर रहे। ऐसे में सवाल यह है कि फिर शिक्षकों ने इन्हें कैसे जांचा होगा। खासकर तब जब उनकी उम्र अधिकांश तौर पर 50 से अधिक होगी और चश्मा लगा होगा। साथ ही इसमें स्टेप मार्किंग सिस्टम खत्म हो गया।
फिजिकल जांच के दौरान शिक्षक देखता था कि यदि छात्र ने सवाल अटेंप्ट किया है और प्रक्रिया की है तो भले ही जवाब गलत हो प्रक्रिया के नंबर दिए जाते थे। लेकिन कंप्यूटर सिस्टम में वह सिस्टम खत्म हो गया। इसके कारण मार्किंग खत्म हो गई।
कॉपियां जांचने को लेकर बनाया टीचर्स पर दबाव
इन कॉपियों को जांचने में सबसे ज्यादा समस्या टीचर्स को हुई। स्क्रीन पर लगातार घंटों तक कॉपियां जांचना और वह भी इस तरह की ब्लर स्कैन वाली। सीबीएसई ने चेतावनी दी हुई थी कि यदि टीचर ने गलती की और देरी की तो स्कूल पर 50 हजार की पेनाल्टी लगा देंगे।
इससे टीचर और सेंटर पहले ही डरे हुए थे। इसलिए और सख्त चेकिंग हुई। मॉनिटरिंग पूरी एआई आधारित थी। ऐसे में शिक्षकों के पास छात्रों द्वारा अटेंम्ट किए गए सवाल का महत्व समझकर अंक देने की छूट खत्म हो गई।
सोशल मीडिया पर जबरदस्त गुस्सा
जब छात्रों ने दोबारा कॉपी चेक (री-इवैल्युएशन) कराने की कोशिश की, तो हद ही हो गई। सोशल मीडिया पर लाखों छात्रों ने अपना गुस्सा निकाला और कहा, सीबीएसई शर्म करो, क्या हमारे साथ मजाक हो रहा है? दो दिन तक सीबीएसई (CBSE Board) कहता रहा कि हमारी वेबसाइट ठीक चल रही है, लेकिन छात्रों के स्क्रीन पर अंडर प्रोसेस दिखता रहा और काम ही नहीं हुआ।
हजारों छात्रों का कहना है कि पैसे तो कट गए, पर उन्हें उनकी स्कैन कॉपियां मिली ही नहीं। जैसे ही री-इवैल्युएशन का लिंक खुला, लाखों बच्चों ने एक साथ अप्लाई कर दिया। इससे साफ है कि छात्र इस रिज़ल्ट से बिल्कुल खुश नहीं हैं। विरोध के बाद सीबीएसई ने फीस भले ही थोड़ी कम कर दी हो, लेकिन इतने सारे आवेदनों से वह फिर छात्रों से करोड़ों रुपए कमा लेगा।
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