35 हजार ट्रैक्टरों में लगेगा GPS ट्रैकिंग सिस्टम, चंबल में अवैध रेत खनन पर रोक
समझें क्या है पूरा मामला
- चंबल संभाग में अवैध रेत खनन को रोकने के लिए नया नियम लागू हुआ है।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब सभी ट्रैक्टरों में जीपीएस लगाया जाएगा।
- पुराने 35 हजार ट्रैक्टरों के साथ नए वाहनों में भी यह डिवाइस अनिवार्य है।
- सीमावर्ती राज्यों से आने वाले पुराने ट्रैक्टरों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
- एमपी परिवहन विभाग शरीफ किसानों को परेशान किए बिना केवल रेत चोरों पर कार्रवाई करेगा।
चंबल नदी से अवैध रेत का खनन रोकने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह सख्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद अब इस पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है। भिंड, मुरैना, श्योपुर और ग्वालियर जिले में रजिस्टर्ड सभी ट्रैक्टरों में जीपीएस डिवाइस लगाना जरूरी कर दिया गया है। परिवहन विभाग ने इस बड़े अभियान के लिए पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है।
इस नए नियम के दायरे में क्षेत्र के लगभग 35 हजार पुराने ट्रैक्टर आएंगे। इन सभी पुराने वाहनों में जल्द से जल्द जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम (gps tracking) लगाया जाएगा। इसके अलावा अब जो भी नए ट्रैक्टर बेचे जाएंगे, उनमें डीलर खुद GPS लगाकर देंगे। परिवहन विभाग ने इसके लिए स्थानीय वाहन डीलरों को पूरी तरह तैयार कर लिया है।
चंबल में अवैध खनन रोकने की नई रणनीति
इस विशेष अभियान के बीच मध्य प्रदेश के परिवहन आयुक्त उमेश जोगा खुद मुरैना पहुंचे। उन्होंने वहां वन विभाग, पुलिस, प्रशासन और माइनिंग अफसरों के साथ एक बड़ी बैठक की। इस बैठक में रेत चोरी रोकने के लिए सुरक्षा और तकनीकी उपायों पर गंभीर चर्चा की गई। बैठक के बाद अधिकारियों ने चंबल नदी और प्रमुख सुरक्षा चौकियों का जायजा भी लिया।
अफसरों की बैठक में यह बात सामने आई कि रेत चोरी में पुराने ट्रैक्टर इस्तेमाल होते हैं। यह ज्यादातर राजस्थान और धौलपुर से खरीदे गए पुराने और यूज्ड ट्रैक्टर होते हैं। इन बाहरी ट्रैक्टरों में जीपीएस लगवाना और नंबर प्लेट लगवाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। इसलिए अब चंबल अभयारण्य के आसपास के गांवों का पूरा रिकॉर्ड बनाया जाएगा।
गांवों के वाहनों का बनेगा पूरा रिकॉर्ड
वन विभाग की मदद से नदी के किनारे बसे गांवों का सर्वे किया जाएगा। हर गांव में किस व्यक्ति के पास कौन सा वाहन है, इसकी सूची बनेगी। इस सूची के आधार पर ही आगे वाहनों की नियमित जांच की जाएगी।
हालांकि माइनिंग विभाग के पास अभी केवल पांच लोगों का स्टाफ है, जिससे थोड़ी दिक्कत आ रही है। निरीक्षण के दौरान परिवहन आयुक्त ने RTO चेकपोस्ट पर तैनात कर्मचारियों का हौसला बढ़ाया।
उन्होंने स्टाफ से कहा कि वे पूरी ईमानदारी से नंबर प्लेट की जांच करें। इसके साथ ही उन्होंने कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखने की सलाह दी। इस मार्ग पर पहले भी सुरक्षाकर्मियों के साथ कुछ घटनाएं हो चुकी हैं।
आम किसानों को नहीं किया जाएगा परेशान
परिवहन आयुक्त ने अफसरों को साफ निर्देश दिए हैं कि आम लोगों को परेशान न करें। यदि किसी सीधे किसान के ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट नहीं है, तो उसे समझाएं। इस अभियान का असली मकसद केवल रेत चोरी करने वाले अपराधियों को रोकना है। प्रशासन की इस सख्ती से आम और शरीफ नागरिकों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
ग्वालियर, भिंड और श्योपुर के कलेक्टर और एसपी को भी अलर्ट कर दिया गया है। सभी जिलों में अवैध रेत के खिलाफ एक साथ चेकिंग अभियान शुरू हो रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इस सख्ती से रेत की अवैध मंडियों पर रोक लगेगी। जहां भी अवैध रूप से डंप रेत मिलेगी, उसे तुरंत नष्ट किया जाएगा।
FAQ
- चंबल संभाग में ट्रैक्टरों में जीपीएस लगाने का आदेश किसने दिया है?
चंबल संभाग के जिलों में रजिस्टर्ड सभी पुराने और नए ट्रैक्टरों में जीपीएस डिवाइस लगाने का यह सख्त निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन की गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाना है। - नए ट्रैक्टरों में जीपीएस लगाने की जिम्मेदारी किसकी तय की गई है?
परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार अब शोरूम से बिकने वाले हर नए ट्रैक्टर में जीपीएस लगाने की जिम्मेदारी डीलर की होगी। डीलर अब ग्राहकों को ट्रैक्टर में यह ट्रैकिंग डिवाइस फिट करके ही डिलीवर करेंगे। - बाहरी राज्यों से आने वाले पुराने ट्रैक्टरों पर क्या कार्रवाई होगी?
राजस्थान और अन्य इलाकों से आने वाले पुराने ट्रैक्टरों की पहचान के लिए चंबल अभयारण्य के नजदीकी गांवों में वाहनों का रिकॉर्ड बनेगा। इसके बाद बिना जीपीएस और नंबर प्लेट वाले संदिग्ध ट्रैक्टरों की सघन जांच होगी।
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